बाल अधिकार कार्यकर्ता और नोबेल विजेता कैलास सत्यार्थी ने कहा कि भारतीय संसद में बाल श्रम पर पेश हो चुका विधेयक नई सरकार के लिए एक परीक्षा साबित होगा। यह देखना होगा कि मोदी सरकार किस तरह सर्वाधिक शोषित बच्चों के मुद्दों को अपनी प्राथमिकता में लाती है।
बाल श्रम (निषेध और नियमन) अधिनियम में संशोधन के बारे में चर्चा करते हुए 61 वर्षीय सत्यार्थी ने बताया कि इस संशोधन से 14 साल की उम्र तक के सभी तरह की बाल मजदूरी पर प्रतिबंध लग जाएगा। इसके अलावा खतरनाक कार्यो के संदर्भ में 18 साल की उम्र तक बाल मजदूरी पर रोक लगाने का प्रावधान है। उन्होंने कहा, 'इस कानून में पुनर्वास को भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए और तभी यह कानून अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के समझौते के अनुरूप होगा।
हम इंतजार कर रहे हैं कि मौजूदा सरकार किस तरह सर्वाधिक शोषित बच्चों के मुद्दों को अपनी राजनीतिक प्राथमिकता में लाती है। यह उसके लिए एक परीक्षा होगा।' नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से उठाए गए कुछ सकारात्मक कदमों को स्वीकार करते हुए सत्यार्थी ने कहा, 'यह सरकार सामाजिक एजेंडे पर कई साहसिक पहल कर रही है। चाहे वह स्वच्छ भारत अभियान हो या फिर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ। ये बहुत बुनियादी सामाजिक कदम हैं जो सरकार और प्रधानमंत्री ने खुद उठाए हैं।'
सत्यार्थी ने बताया, 'मैंने प्रधानमंत्री से कहा है कि जब हम एक स्वच्छ भारत बनाने का प्रयास कर रहे हैं तो यह तभी सतत होगा जब हम भारत को बच्चों के अनुकूल बनाएंगे।'
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