कुछ चंद स्वार्थी लोग अपने मतलब को साधने के लिये समाज में यह प्रतिस्थापित करने का षड़यंत्र करते है कि अब ईमानदारी के लिये गुंजाईश नहीं है अब जो कुछ भी होगा वह बेईमानी से ही संभव है। ईमानदारी बेकार की बात है, गुजरे समय की बात है। परन्तु दिल्ली के चुनाव में जनता ने यह तय कर दिया कि यदि ईमानदारी का विकल्प है तो अवश्य ही जनता बेईमानी को ठोकर मारकर ईमानदारी को ही गले लगायेगी। उक्त बातें एक विज्ञप्ति में टोंको-रोंको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने दिल्ली चुनाव परिणाम के संबंध में प्रतिक्रिया देते हुये कही है। श्री तिवारी ने कहा कि केजरीवाल ईमानदार हैं यह उनको अभी प्रमाणित करना बाकी है लेकिन उनके द्वारा अपनी बातों में यह कहा गया कि मैं ईमानदार हूं, मेरे कथनी, करनी में दोगलापन नहीं है तो मतदाता ने उन्हें ‘‘सिर आंखों पर’’ बैठाया। ईमानदारी से कार्य करने वाले को तो जनता अपने पलकों पर रखेगी।
श्री तिवारी ने छोटभैया नेताओं को नसीहत देते हुये कहा कि वह अपने कुकर्मों को छिपाने के लिये ईमानदारी को ‘‘इक्सपाईरी’’ बताकर चुनावी राजनीति को दारू, पैसा, जाति धर्म, वंशवाद के दल-दल में ढकेलने का कार्य न करें। श्री तिवारी ने कहा कि दिल्ली का चुनाव परिणाम भाजपाईयों के लिये यह संदेश भी है कि अपने स्वार्थ के शिखर तक चढ़नें के लिए अपनों की छाती को सीढ़ी बनाओगे तो आंैधे मुंह गिरोगे। श्री तिवारी ने कहा कि हमारी समझ है कि दिल्ली में केजरीवाल को मिली सफलता से पूरे देश में चमत्कार हो जायेगा और सबकुछ ठीक हो जायेगा, ऐसा होने वाला नहीं है मेरा मानना है कि दिल्ली के मतदाता के निर्णय से यह सीख लेने की जरूरत है कि हम जो जिस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं वहां ईमानदारी से कार्य करें अवश्य ही स्वीकारता मिलेगी तथा ईमानदारी का विकल्प बेईमानी नहीं हो सकती, नहीं हो सकती।

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