- सुबह से देर रात तक गूंजता रहा हर-हर महादेव का उद्घोष
- मंदिर के आसपास फूल और बेलपत्र के दुकानदारों की रही चांदी
- बेलपत्र, धतूरा, भांग और बेर व दूध की जमकर हुई बिक्री
मंगलवार को शहर हो या देहात हर तरफ देवाधिदेव भोलेनाथ पूरे आस्था से पूजे गए। मंदिरों में भक्तों की आस्था देखने ही लायक थी। हर कोई बाबा भोलेनाथ की एक झलक पाने को आतुर दिखा। सबके सब पूरे आस्था व विश्वास से व्रत धारण कर मंदिरों में जलाभिषेक किया। शाम ढलते ही जब बाबा की बारात निकली तो साथ हो लिए। इस दौरान भक्त हर-हर महादेव के जयघोष लगाते रहें। धर्म की नगरी काशी समेत पूरा उत्तर प्रदेश शिव की भक्ति से सराबोर नजर आई। मंदिर के आसपास फूल और बेलपत्र के दुकानदारों की चांदी रही। यहां बेलपत्र, धतूरा, भांग और बेर 20 रुपए में बेच रहे थे। वहीं, फूल और दूध सहित पूरी सामग्री 30 रुपए से लेकर 100 रुपए में भी बिक रही थी। सबसे ज्यादा डिमांड दूध को लेकर रही। दुकानों में दूध के पैकेट खत्म होने से कई भक्त इधर-उधर जुगाड़ लगाते भी दिखाई दिए। किसी भी अनहोनी से बचने के लिए पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाकर भीड़ को नियंत्रित किया जाता रहा।
सभी जगहों पर भक्तगण देर रात तीन बजे से ही लोग लाइन में लगकर भोलेनाथ पर जलाभिषेक करने के लिए तैयार खड़े थे। और जैसे ही मंदिरों के पट खुले भक्त बारी-बारी से जलाभिषेक करते नजर आएं। यह सिलसिला देररात तक चला। सबसे ज्यादा भीड़ बाबा विश्वनाथ मंदिर, मारकण्डेय महादेव, मृत्युंजय महादेव, मनकामेश्वर महादेव में देखने को मिली। बाबा विश्वनाथ को जल चढ़ाने के लिए सोमवार की रात से ही दूर-दराज से शिवभक्त पहुंचने लगे थे। सुबह की पहली किरण पड़ते ही जलाभिषेक का सिलसिला शुरु हुआ तो देर रात तक चला। शिवभक्तों ने तड़के गंगा में डुबकी लगाई और बेल, धतूरा, भांग और दूध लेकर बाबा विश्वनाथ को अर्पित करने कतार में लग गए। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए दूर-दूर से आए हजारों शिवभक्त रात से ही डेरा डाले हुए थे। काशी में गंगा नदी के घाटों से लेकर शिवालयों तक हर तरफ बम-बम भोले के जयकारे गूंजते रहे। हर-हर महादेव और ओम नमः शिवाय के नारों ने मंदिर परिसर गुंजायमान रहा। भक्तों ने शिवलिंग पर दूध और गंगाजल से अभिषेक कर फूल और बेलपत्र चढ़ाकर अपनी मनोकामनाएं मांगी। इसके अलावा गौरी केदारेश्वर मंदिर, तिलेभांडेश्वर मंदिरों में भी भारी भीड़ रही। ग्रामीण अंचलों में भी छोटे-बड़े शिवालयों में शिवभक्त लंबी कतारों में सुबह से ही हाथों में भांग, धतूरा, बेलपत्र व दूध लिए शिव दर्शन के लिए अपनी बारी का इंतजार करते दिखे।


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