प्रसिद्ध साहित्यकार और शिक्षाविद डॉ० शिबन कृष्ण रैणा को गृह मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी की गयी विज्ञप्ति के अनुसार “विधि एवं न्याय मंत्रालय” की हिंदी सलाहकार समिति में गैर-सरकारी सदस्य के तौर पर मनोनीत किया गया है।१९६६ में राजस्थान लोकसेवा आयोग से चयनित तथा कई पुरस्कारों और सम्मानों से विभूषित डॉ० रैणा कई वर्षों तक अलवर महाविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष रहे और बाद में भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान,शिमला में फेलो के रूप में चयनित हुए,जहाँ पर उन्होंने “भारतीय भाषाओं से हिंदी में अनुवाद की समस्याएँ” पर शोधकार्य किया.उनका यह कार्य संस्थान से प्रकाशित हो चुका है.डॉ० रैणा की अब तक पंद्रह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं.ये पुस्तकें भारतीय ज्ञानपीठ,राजपाल एंड संस,हिंदी बुक सेण्टर,साहित्य अकादमी आदि से प्रकाशित हुयी हैं.
राजस्थान साहित्य अकादमी का प्रथम अनुवाद-पुरस्कार प्राप्त करने का श्रेय डॉ० रैणा को है.डॉ० रैणा देश की कई साहित्यिक-सांस्कृतिक-अकादमिक संस्थाओं से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। हाल ही मैं भारत सरकार के संस्कृति-मंत्रालय ने इन्हें अपनी प्रतिष्ठित सीनियर फ़ेलोशिप प्रदान की है.पिछले दिनों केन्द्रीय हिंदी निदेशालय (मानव संसाधन विकास मंत्रलय) की हिंदी अनुदान और पुरस्कार समितिओं के भी डॉ0 रैणा विशेष-सदस्य मनोनीत किये गये थे।डॉ0 रैणा अपने इस सम्मान और उपलब्धि के लिए अपनी मेहनत और लगन को महत्व देने के साथ-साथ प्रभु श्रीनाथजी की अनुकम्पा को स्वीकार करते हैं। उल्लेखनीय है कि इनका अधिकांश सेवाकाल श्रीनाथद्वारा और अलवर में बीता है।प्रभु श्रीनाथजी की नगरी में डॉ० रैणा लगभग दस वर्षों (१९६७ से लेकर १९७७) तक रहे हैं.डॉ. रैणा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से एम०ए०(अंग्रेजी) की उपाधि भी अर्जित की है.

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