चीनी निवेशक भारत में बदलाव की हवा का लाभ उठाएं: मोदी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 16 मई 2015

चीनी निवेशक भारत में बदलाव की हवा का लाभ उठाएं: मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चीन दौरे का आज आखिरी दिन है। पीएम ने आज सुबह शंघाई में उद्योग जगत की हस्तियों के साथ बैठक की। चीन की 20 बड़ी कंपनियों के सीईओ से भी मिले।

पीएम मोदी वर्ल्ड एक्सपो सेंटर में भारतीयों को संबोधित करते हुए कहा, वक्त किस तेजी से बदल रहा है। 16 मई को एक साल पहले दुनिया भर से एक ही स्वर सुनाई दे रहा था दुख भरे दिन बीते रे भैया, दुख भरे दिन बीते से भैया। एक साल पहले दुनिया में लोग भारतीय को देखकर कहते थे उह ये इंडिया से है। एक साल में दुनिया आपको सम्मान से देख रही है। सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय में भरोसा है। हमने अपना भाग्य बदला है। लोग कहते थे गुजरात के बाहर मोदी को कौन जानता है। चुनाव में मेरे लिए गलत प्रचार हुआ। मेरी आलोचना सही थी, लेकिन आशंका सही नहीं थी। मेरे बायोडाटा में पीएम जैसे शब्द नहीं था। भारत ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया। कोई मुझे पसंद नहीं करता था। एक गरीब मां के बेटे को जनता ने आशीर्वाद दिया। आलोचनाएं काम करने की प्रेरणा देती है। 

मैंने अपना काम ईमानदारी किया। मैं मेहनत करने में कोई कसर नहीं छोड़ता हूं। हर किसी से कुछ सीखने को कोशिश करता हूं। गरत इरादे को कोई काम नहीं करूंगा। आलोचकों से भी बहुत कुछ सीखने को मिला। गलत इरादे काम करने का कोई आरोप नहीं लगा। भारत का हर कोना यहां मौजूद है। भारत के विकास के लिए आपका आशीर्वाद चाहिए। आपके आशीर्वाद में बहुत बड़ी ताकत है। शंघाई में लघु भारत देखने को मिला। जनता जनार्दन ईश्वर का रूप होता है। ईश्वर ने जितने शक्ति दी है, उस ताकत से काम करता हूं। मेरी यह यात्रा भारत-चीन के अहम है। चीन के राष्ट्रपति ने जो किया वह पहले कभी नहीं हुआ। दूसरे शहर में जाकर जिनपिंग ने स्वागत किया। ये स्वागत 125 करोड़ भारतीयों का स्वागत था। ये मजबूत नींव की शुरुआत है। 

भारत-चीन का विकास से 1/3 विश्व का विकास होगा। दुनिया को देने के लिए हमारे पास बहुत है। हमारे पूर्वजों ने विश्व को परिवार माना है। हिंदुस्तान आगे बढ़ने को तैयार है। ग्लोबल वार्मिंग दुनिया के लिए बड़ी समस्या है। ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति इंसान ने पैदा की है। हमारे पूर्वजों ने हमें प्रकृति से प्रेम करना सीखाया। हम अपने आप को भूल गए हैं। हमें अपनी ताकत को पहचानने की जरूरत है। जितना भी काम करूं मेरी आलोचना होती है। मेरे शरीर का प्रत्येक कण 125 करोड़ भारतवासियों के लिए है। 30 साल में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार है। बहुमत की सरकार पर लोगों का विश्वास है। छात्रों से मिलने का कार्यक्रम अद्भूत रहा। शियान का रिश्ता मेरे गांव से रहा है। जिनपिंग ने पूरी पढ़ाई की मोदी क्या चीज है। हमारा और जिनपिंग का रिश्ता बड़ा गहरा है।

 चीन के छात्रों में भारत के लिए जिज्ञासा है। चीनी छात्रों में भारत के प्रति धारणा बदलना जरूरी है। भारत-चीन के लोग एक-दूसरे को समझें। हम अपनी ताकत पर गर्व करें, हम अपनी देश का सम्मान बढ़ाएं। आगे बढ़ने के लिए माद्दा होना चाहिए। भाषाओं के जरिए अपना बात रख सकते हैं। भारत सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला देश है। चीन को बदलने में 30 साल लगे। भारत में विकास दर आगे बढ़ानी होगी। जैसे हमारे सपने हैं वैसे हमारे पैर जमीन पर भी हैं। लालकिले से टॉयलेट की बात की तो आलोचना हुई। यहां जमा हुए लोग दुनिया को संदेश देंगे। यह भाषण नहीं वक्त बदलने का संदेश है। 2016 चीन को भारत आने का वर्ष है। आपने इतना बड़ा कार्यक्रम किया आपको सलाम करता हूं।

 फूदान यूनिवर्सिटी में पीएम मोदी ने छात्रों को संबोधित किया, मुझे चीन के दो यूनिवर्सिटी में बोलने का सौभाग्य मिला। ज्ञान का न पूरब होता है, ना पश्चिम होता है। वेद में कहा गया है हर दिशा से ज्ञान आने दो। गीता के मूल दर्शन कर्म को भी छात्रों ने सामने रखा। गीता के मूल दर्शन को भी छात्रों ने सामने रखा। भारत और चीन दोनों देश ज्ञान के प्यासे हैं। 1400 साल पहले ह्वेनसांग भारत आए। ज्ञान के दरवाजे खोलने के लिए भीतरी ताकत चाहिए। आर्थिक व्यापार के दरवाजे खोलना सरल है। बुद्ध के बाद गांधी के सहारे चीन को जानना बड़ी बात है। ज्ञान के आधार पर बने संबंधों से पीढ़ियों का कल्याण होता है। महात्मा गांधी युग पुरुष थे। गांधी का ज्ञान आज रास्ता दिखाता है। पूरी दुनिया गांधी और बुद्ध की शिक्षा अपनाना चाहती है। गांधी का जन्म भारत में हुआ लेकिन वे विश्व पुरुष थे। आतंकवाद, ग्लोबल वार्मिंग दुनिया के सामने बड़ी चुनौती हैं। गांधी के विचारों से इनका हल संभव है। अमरण अनशन के समय गांधी सिर्फ जैंग शैंग से मिले थे। जैंग शैंग टी को गांधी ने शांति टी नाम दिया। शांति टी के प्रति गांधी का असीम प्रेम था। मानवता, बुध और गांधी की सोच से सफलता हासिल करें। भारत-चीन मिल जाए तो दुनिया का एक तिहाई हिस्सा संकट मुक्त हो जाएगा। 21वीं सदी एशिया की सदी है। अंत में मोदी-मोदी के नारे लगे। पीएम ने सेंटर फॉर गांधी स्टडीज का उद्घाटन किया।

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-चीन बिजनेस फोरम में कहा, चीन और भारत के बीच औद्योगिकी क्षेत्र में भागीदारी से दोनों देशों में निवेश और रोजगार बढ़ेगा और लोगों की संतुष्टि में सुधार होगा। इस अवसर पर, भारत और चीन की कंपनियों के बीच कुल 22 अरब डॉलर मूल्य के 21 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

 मोदी ने चीन की कंपनियों को भारत में निवेश के ऐतिहासिक अवसरों का फायदा उठाने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा, हमने भारत में व्यवसाय का माहौल बनाने और उसमें सुधार लाने का बीड़ा उठाया है। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि यदि आपने भारत में कदम रखने का फैसला किया तो मुझे पूरा विश्वास है कि आपको कारोबार में उत्तरोत्तर और अधिक आसानी होगी। उन्होंने कहा कि कई चीनी कंपनियां भारत की संभावनाओं का दोहन करने के लिए हमारे यहां निवेश कर सकती हैं। भारत में विनिर्माण, प्रसंस्करण और ढांचागत क्षेत्र में निवेश के विशाल अवसर हैं। भारत में कारोबार की सुगमता के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, हम कर व्यवस्था को पारदर्शी, स्थिर और भरोसेमंद बना रहे हैं। हमने कर प्रणाली में बहुत सी प्रतिकूल चीजों को समाप्त कर दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के उद्योग जगत की हस्तियों को भरोसा दिया कि भारत का आर्थिक परिवेश बदल चुका है और चीजें आसान हुई हैं। उन्होंने कहा, हमारी नियामकीय व्यवस्थाएं अब काफी पारदर्शी, संवेदनशील और मजबूत हो चुकी हैं। हम अब विभिन्न विषयों पर दूरगामी और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण अपना रहे हैं। कारोबार में आसानी के लिए अब भी बहुत से उपाय किए जा रहे हैं। मोदी ने कहा कि सरकार ने निवेशकों को परेशान करने वाले बहुत से मुद्दों को सुलझाया है। उन्होंने कहा, हम मानते हैं कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश महत्वपूर्ण है और यह देश में वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी कारोबारी माहौल के बिना आकर्षित नहीं किया जा सकता। दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, भारत और चीन की भागीदारी को फलना-फूलना चाहिए और यह निश्चित रूप से फले फूलेगी। मैं उम्मीद करता हूं कि हमारे दोनों देशों की भागीदारी का परिणाम बहुत अच्छा होगा। हम विगत में एक दूसरे के पूरक रहे हैं और वर्तमान तथा भविष्य में भी हम एक दूसरे का सहयोग कर सकते हैं।

 मोदी ने कहा कि चीन की तरह ही भारत भी विनिर्माण क्षेत्र को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करना चाहता है ताकि देश की युवा आबादी के लिए रोजगार के अवसर सृजित हों। उन्होंने कहा कि भारत की आबादी का 65 प्रतिशत हिस्सा युवा है। इसलिए हम ‘मेक थिंग्स इन इंडिया’ (चीजों को भारत में ही बनाना) चाहते हैं। हमने इसके लिए मेक इन इंडिया अभियान शुरू किया है। हमें श्रमोन्मुखी उद्योगों के विकास, मजबूत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए माहौल तैयार करने, कौशल विकास, बुनियादी ढांचे के निर्माण और निर्यातोन्मुखी विकास के मॉडल के बारे में आपसे काफी कुछ सीखना है। मोदी ने आज अलीबाबा, मोबाइल फोन कंपनी शियाओमी और कई नामी कंपनियों के मुख्य कार्यकारियों से मुलाकात की।

 भारत-चीन बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, भारत-चीन के पास एक जैसा इतिहास, चीन के पास प्राचीन ज्ञान से भी भारत को फायदा है। बौद्ध धर्म सफलता का बीज है। तुलसी रामायण का चीनी भाषा में अनुवाद हुआ। गीता और महाभारत का भी चीन में मशहूर है। प्राचीन भारत और चीन विज्ञान में बहुत आगे थे। भारत-चीन के पास विकास की अनंत संभावनाएं हैं। चीन ने गन पाउडर खोजा और भारत ज्योतिष और गणित। भारत का समाज ज्ञान से जुड़ा हुआ है। भारत स्मार्ट सिटी बनाने जा रहा है, 50 शहरों में मेट्रो ट्रेन चलाने की योजना है। स्मार्ट सिटी के लिए एफडीआई की जरुरत है। हमने 14 करोड़ बैंक खाते खोले। 175 गीगा वाट बिजली पैदा करने की योजना है। हमने मेक इन इंडिया शुरू किया। हमें व्यापार के बारे में आप से सीखना होगा। एफडीआई, उद्योग, मजदूरों के हितों के बारे में आप से सीखना होगा। चीनी कंपनियों के लिए भारत में निवेश का अच्छा मौका है। हम कारोबार के लिए माहौल बेहतर बना रहे हैं। व्यापार को इजाजत देने की व्यवस्था पारदर्शी हुई। हमने बीमा क्षेत्र ने 49 फीसदी एफडीआई शुरू किया। हमने बहुत सारे टैक्स खत्म किये। हमने टैक्स प्रणाली में कई बड़े सुधार किए। रोड और रेल के लिए ज्यादा पैसे दिए। बाजार के लिए लागातार अच्छा माहौल बना रहे हैं। हम लाइसेंस की प्रक्रिया को आसान बना रहे हैं। निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इस साल एफडीआई में 39 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हम जल्दी की जीएसटी लागू करेंगे।


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