सांसदों को पूड़ी-सब्जी खाने पर 88 फीसद की रियायत दी जा रही है। कैंटीन में चिप्स के साथ तली हुई मछली 25 रुपये प्रति प्लेट, मटन कटलेट 18, उबली सब्जियां 5, मटन करी 20 व मसाला डोसा 6 रुपये में मिलता है। इन सभी खानों पर क्रमश: 63, 65, 83, 67 व 75 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है।
33 रुपये में मांसाहारी थाली
सांसदों को 90 फीसद सब्सिडी के साथ महज 4 रुपये प्रति प्लेट की दर से मसालेदार सब्जियां परोसी जाती है जबकि इन्हें तैयार करने में 41.25 रुपये की अनुमानित लागत आती है। इसी तरह मांसाहारी खाने की थाली को 66 फीसद सब्सिडी के साथ 99.5 की जगह मात्र 33 रुपये में उपलब्ध कराया जाता है। पापड़ की कीमत 1.98 रुपये है, जबकि इसे मात्र एक रुपये में दिया जाता है।
आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल ने कहा कि यह व्यंजनों की वर्तमान दर है जिसे दिसंबर 20, 2010 से संशोधित नहीं किया गया है। यहां सिर्फ रोटी पर ही मामूली फायदा लिया जाता है। एक रोटी का लागत मूल्य सिर्फ 77 पैसे है जिसे एक रुपए में दिया जाता है। गौरतलब हो कि संसद की करीब आधा दर्जन कैंटीनों का संचालन उत्तर रेलवे द्वारा किया जाता है। सब्सिडी की राशि लोकसभा सचिवालय की तरफ से दी जाती है।
सांसदों से वापस ली जाएं सुविधाएंआरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल का कहना है कि सांसदों को भत्ते के रूप में कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं। ऐसे में जनता के पैसे से सांसदों को खाने में सब्सिडी देने की क्या जरूरत है। इस सुविधा को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

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