साहित्यकार स्व0 सतीश चन्द्र झा की सातवीं पुण्यतिथि के अवसर पर क्वार्टर पाड़ा, दुमका स्थित उनके आवास पर “सतीश स्मृति मंच” के तत्वावधान में श्रद्धांजलि सह कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों, साहित्यप्रेमियों ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा की एवं काव्य पाठ के माध्यम से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित किया। साहित्यकार डाॅ0 रामवरण चैधरी की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्यों ने शहर में फिर से साहित्यिक गतिविधि को जागृत करने पर जोर दिया। अशोक सिंह ने जहाँ पूर्व में गठित विभिन्न साहित्यिक मंचों द्वारा साहित्यिक कार्यक्रमों को याद करते हुए साहित्यिक कार्यक्रमों की अनवरत यात्रा को बनाए रखने की वकालत की वहीं डाॅ0 चतुर्भुज नारायण मिश्र ने कहा ये सतीश बाबू के कृतित्व का ही प्रतिफल है जो शहर में साहित्यिक चुप्पी को समय-असमय तोडने का काम किया जा रहा। ़
डाॅ0 अमरेन्द्र सिन्हा, अनंतलाल खिरहर, विद्यापति झा ने उपस्थित जनों के समक्ष मासिक कवि गोष्ठी चलाने का सुझाव दिया जिसे एक स्वर से पारित किया गया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डाॅ0 रामवरण चैधरी ने दुमका के दिवंगत साहित्यकारों को याद करते हुए उन सबों के कृतित्व पर एकल चर्चा/कविता पाठ का सुझाव देते हुए मासिक कवि गोष्ठी के आयोजन की सहमति पर प्रसन्नता व्यक्त की। कार्यक्रम के दूसरे व अंतिम सत्र में कवि, पत्रकार व साहित्यकार अमरेन्द्र सुमन की कविता -गर्भ में पल रही बच्ची का माँ से प्रलाप कविता की इन पंक्तियों “एक बेटी का अंतिम अनुरोध ठुकराओ ना माँ, स्वीकार लो, यह जीवन मुझे लौटा दो,” के द्वारा जहाँ बेटी के प्रति सामाजिक भेद-भाव को मार्मिक ढंग से उकेरा वहीं राजीव नयन तिवारी की दोहा “खेती विष की मत करो, न रहो सर्प के संग !लाख पिलाओ दूध पर डँसता वही भुजंग” !! के द्वारा देश में बैठे अपनों के ही बीच दुश्मनों को पहचानने की मसीहत दी। विश्वजीत राहा ने “ताला” शीर्षक कविता की पंक्ति “किसी मामूली छुटभैये नेता लगा सकते है, सुरक्षा के नाम पर मनुष्य के विवेक पर ही ताला” का पाठ कर जड़ हो चुके सामाजिक ताने-बाने को रेखांकित किया।
रोहित स्वप्निल “मिलो न मिलो फूलों की तरह खिलो” ने परायों की खुशी को अपनी खुशी के रूप में इंगित किया। डाॅ0 अमरेन्द्र सिन्हा की कविता “आया भूकंप” ने जहाँ नेपाल त्रासदी को अभिव्यक्त किया वहीं स्व0 सतीश बाबू की कविता “कंटक-पथ पर तुम चलने दो, जीवन की गति को बढ़ने दो” की प्रस्तुति विद्यापति झा द्वारा किया गया। उक्त अवसर पर विभिन्न कवियों, साहित्यप्रेमियों सहित चम्पा देवी, अरविन्द कुमार, मनोज कुमार घोष, सुबोध कुमार लाल, अनुराग कुमार, पवन कुमार झा, दीपक झा, अमृता झा एवं अर्णव की उपस्थिति सराहनीय रही। मंच संचालन का कार्य वरिष्ठ पत्रकार, व कवि अमरेन्द्र सुमन ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन मंच के सचिव कुन्दन कुमार झा ने किया।

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