पटना पुलिस ने जिले के बाढ़ में चार युवकों के अपहरण और उनमें से एक की हत्या किए जाने के मामले में मोकामा से जनता दल (युनाइटेड) के विधायक अनंत सिंह की संलिप्तता उजागर होने की बात कही है। लेकिन विधायक ने आरोपों से इंकार किया और कहा कि पटना के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) जितेंद्र राणा ने पूर्वाग्रह के कारण उनका नाम उछाला है। विधायक अनंत ने बुधवार को कहा कि राणा स्थानांतरण के बाद ऐसा कह रहे हैं, जो सरासर गैरकानूनी है। विधायक ने पत्रकारों को बताया कि युवकों के अपहरण के बाद खुद उनके परिजनों ने फोन कर अपहृत युवकों को छुड़ाने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा, "बाढ़ और लदमा में जो भी होता है, उसका जिम्मेदार अनंत सिंह नहीं है।"
विधायक ने पुलिस अधिकारी राणा पर भ्रष्टचार में लिप्त होने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को राणा ने पदभार छोड़ने के ठीक पहले एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि गत 17 जून को पटना के बाढ़ क्षेत्र से जिन चार युवकों का अपहरण किया गया और उनमें से एक की हत्या कर दी गई थी, उसमें अनंत सिंह की संलिप्तता उजागर हुई है। राणा ने बताया कि इस मामले में गिरफ्तार भूषण सिंह, कन्हैया, मनीष, ऋषि और शिवम ने पुलिस के समक्ष विधायक की भूमिका उजागर की है। उन्होंने बताया कि मुख्य अभियुक्त प्रताप सिंह अभी भी फरार है।
एसएसपी ने बताया कि बाढ़ बाजार में कुछ युवकों द्वारा एक महिला के साथ छेड़खानी की गई थी। इसकी जानकारी जब विधायक को हुई तो उन्होंने प्रताप सिंह उर्फ घोड़ा को उन लड़कों को सबक सिखाने को कहा। इसके बाद प्रताप ने साथियों के साथ चार युवकों का अपहरण कर लिया। अगले दिन उनमें से एक पवन उर्फ पुटुस यादव का शव बरामद हुआ। उल्लेखनीय है कि राणा का स्थानांतरण पूर्वी चंपारण कर दिया गया है, जबकि विकास वैभव को पटना का एसएसपी बनाया गया है।
पुटुस के पिता के बयान पर भूषण सिंह, प्रताप सिंह, कन्हैया, मनीष, ऋषि व अज्ञात के विरुद्घ हत्या की प्राथमिकी बाढ़ थाने में दर्ज कराई गई थी। जद (यू) के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि कानून अपना काम करेगा। सरकार किसी भी विधायक को संरक्षण नहीं देगी।

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