मामला उप राजधानी दुमका के प्रखण्ड सरैयाहाट के पंचायत नवाडीह का है। इस पंचायत के अन्तर्गत कुल 8 ग्राम आते हैं-बैठा, पोखरिया, झबरी, पतनुकी, तितमोह, कामतापाथर, नवाडीह व ऋषिवेल। उपरोक्त तमाम ग्रामों में पोखरिया, पतनुकी व कामतापाथर बेचिरागी गाँव है। जनसंख्या 2011 के अनुसार (राजस्व ग्रामवार) थाना न0-47 के तहत ग्राम ऋषिवेल को अनुसूचित जाति के काॅलम में श्रेणीबद्ध करते हुए इनकी संख्या 73 बतलायी गई जबकि अन्य की संख्या 96 बतलाकर कुल संख्या 169 कर दी गई है जबकि यह गाँव पूरी तरह आदिवासियों की जनसंख्या वाला गाँव है।
ग्राम पंचायत नवाडीह (सरैयाहाट) दुमका के ग्राम ऋषिवेल में आदिवासियों की संख्या रहते हुए भी जनगणना वर्ष-2011 के दस्तावेज में उनकी संख्या शून्य कर दी गई है। पंचायत चुनाव-2015 के लिये होने वाले चुनाव में यह प्रश्न जिला निर्वाची पदाधिकारी सहित मुख्य निर्वाचन आयुक्त, झारखण्ड, राँची के लिये काफी गंभीर सवाल उत्पन्न कर सकता है। ग्राम पंचायत नवाडीह की वर्तमान मुखिया बसंती मुर्मू कहती हैं-नवाडीह पंचायत (प्रखण्ड सरैयाहाट) के अन्तर्गत पड़ने वाले कुल 8 ग्रामों में ऋषिवेल ही एकमात्र ऐसा गाँव है जहाँ की पूरी जनसंख्या सिर्फ व सिर्फ आदिवासियों (संताल) की है, बाकी तमाम गाँवों में गैर आदिवासी समुदाय के लोग ही मौजूद हैं। मुखिया बसंती मुर्मू का कहना है इस पंचायत को आदिवासी विहीन करने की एक बड़ी साजिश रची गई है ताकि पेशा एक्ट के तहत आदिवादियों के लिये आरक्षित एकल पदों का लाभ अन्य समुदाय के लोग उठा सकेंे। मुखिया वसंती मुर्मू ने कहा जानबूझ कर इस विसंगति को पैदा किया गया है।
मुखिया बसंती मुर्मू का कहना है ग्राम पंचायत नवाडीह में जनगणना-2011 के तहत ग्राम पंचायतों की जनसंख्या प्रतिवेदन में आदिवासियों की संख्या शून्य कर देने के विरुद्ध डीपीआरओ, डीसी सहित मुख्य सचिव, झारखण्ड को पत्र के माध्यम से जानकारी देने के बाद भी अभी तक इसमें कोई सुधार नहीं किया गया है। मुखिया ने कहा नवाडीह पंचायत के अन्तर्गत कुल 8 ग्राम आते हैं-बैठा, पोखरिया, झबरी, पतनुकी, तितमोह, कामतापाथर, नवाडीह व ऋषिवेल। उपरोक्त तमाम ग्रामों में पोखरिया, पतनुकी व कामतापाथर बेचिरागी गाँव है। जनसंख्या 2011 के अनुसार (राजस्व ग्रामवार) थाना न0-47 के तहत ग्राम ऋषिवेल को अनुसूचित जाति के काॅलम में श्रेणीबद्ध करते हुए इनकी संख्या 73 बतलायी गई जबकि अन्य की संख्या 96 बतलाकर कुल संख्या 169 कर दी गई है जबकि यह गाँव पूरी तरह आदिवासियों की जनसंख्या वाला गाँव है। विदित हो जनगणना 2011 के अनुसार ग्राम पंचायतों की जनसंख्या प्रतिवेदन में नवाडीह पंचायत अन्तर्गत ग्राम बैठा में अनुसूचित जाति की संख्या 20, तितमोह में 59, नवाडीह में 29 व ऋषिवेल में 73 अंकित किया गया है, जबकि अन्य की श्रेणी में उपरोक्त ग्रामों में क्रमशः 713, 1457, 3775 व 96 संख्या अंकित किया गया है।
पंचायत निर्वाचन 2010 के समय गठित ग्राम पंचायत में सम्बद्ध ग्राम को ही प्रतिवेदन में शामिल करने व राजस्व ग्रामवार अंकित जनसंख्या 2011 के प्रकाशित आँकड़ों से शत-प्रतिशत मिलान का प्रमाणपत्र प्रखण्ड विकास पदाधिकारी व जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त दुमका द्वारा दिया गया है। बीडीओ सरैयाहाट, दुमका गौतम कुमार से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होनें कहा नवाडीह पंचायत अन्तर्गत ग्र्राम ऋषिवेल का मामला उनके समक्ष आया है। इस संबंध में भूल-सुधार से संबंधित जानकारी डीसी व डीपीआरओ दुमका को दे दी गई है। डीपीआरओ ने राज्य निर्वाचन कार्यालय में इस समस्या से संबंधित बातचीत भी की है। यह मामला राज्य निर्वाचन आयोग का है इसलिये वे खुद के स्तर से कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। उन्होनें कहा वर्ष 2011 में जनसंख्या सर्वे का कार्य किसी एनजीओ के माध्यम से करवाया गया था। एनजीओ स्तर से किये गए कार्य का ही परिणाम है कि यह मुद्दा विवादित हो चुका है। प्रखण्ड व जिलास्तर पर जो भी कार्रवाई हो सकती है हमलोग उसे करने से चूक नहीं रहे। देखने की बात यह है कि आगे होता है क्या। इधर मुखिया बसंती मुर्मू का आरोप है कि नवाडीह पंचायत में आरक्षण खत्म करने के पीछे प्रखण्ड कार्यालय सरैयाहाट में प्रतिनियुक्त एक सरकारी कर्मी द्वारा ही गलत सर्वे रिपोर्ट तैयार कर आदिवासियों की संख्या शून्य कर दी गई है।
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