जौनपुर जेल में पुलिस की पिटाई से कैदी की मौत, हंगामा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 5 जुलाई 2015

जौनपुर जेल में पुलिस की पिटाई से कैदी की मौत, हंगामा

  • कैदी की मौत के बाद आक्रोशित बंदियों एवं पुलिस के बीच खूनी संघर्ष, पथराव, आगजनी, पुलिस ने दागे आंसू गैस  के गोले 
  • हालात काबू न होने पर पुलिस ने की अंधाधुंध फायरिंग, थानाध्यक्ष समेत 12 पुलिसकर्मी व 25 से अधिक कैदी जख्मी 

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जौनपुर। शनिवार की शाम ढलते ही जौनपुर जिला कारगार गोलियों की तड़तडाहट से गूंज उठा। गोलियों की गूंज व चीख-पुकार से जेल परिसर से लेकर बाहरी पास-पड़ोस के मुहल्लेवासी खौफजदा हो गए। देर रात कैदियों व बंदी रक्षकों के बीच कभी आगजनी तो कभी पथराव तो कभी मार-मार-पकड़-पकड़, मर गया रे, पुलिस के गोलियों की आवाज, सायरन की चीख ही सुनाई दे रहे थे। काफी देर तक हुए संघर्ष के बाद पता चला कि पुलिस की ब़ड़े ही बेरहमी से पिटाई के चलते बंदी श्याम कुमार यादव की मौत के बाद इस तरह के हालात पैदा हुए। जिलेभर की पुलिस बल सहित सीनियर अधिकारियों की मौजूदगी में कैदियों से बातचीत के बाद स्थिति पर काबू पाया। इस बीच उपद्रव में थानाध्यक्ष जफराबाद समेत 12 पुलिसकर्मी व कुछ जख्मी कैदियों को अस्पताल पहुंचाया गया। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को जेल के अंदर हवाई फायरिंग व आंसू गैस के गोले दागने पड़े। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भरसक कोशिश की गयी, लेकिन हालात बिगड़ते ही पुलिस को भी जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। 

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सायंकाल करीब चार बजे चोरी के आरोप में बंद बक्शा थाना क्षेत्र के लखौंवा गांव का निवासी श्याम कुमार यादव पानी पीने मुलाकाती घर के पास आया था। वहां उसकी कथित तौर पर किसी बंदी रक्षक के साथ अभद्रता हो गयी। यह देख बंदी रक्षक दौड़ पड़े और श्याम को बड़े ही बेरहमी से लाठी से पीट-पीट कर अधमरा करने के बाद बैरक में ले गए, जहां उसकी मौत हो गयी। हालांकि बंदी रक्षकों ने दिखावे के तौर पर उसे जिला अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया गया। कैदी की मौत की खबर लगते ही अन्य कैदी आग बबूला हो गए। फिर दोनों ओर से जमकर ईंट-पत्थर भी चले। इससे जेल के अंदर भगदड़ मच गई। तब तक पुलिस भी जेल के अंदर पहुंच चुकी थी। पुलिस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगातार हवाई फायरिंग करती रही तथा आंसू गैस के गोले छोड़ती रही। फायर ब्रिगेड को बुलाकर पानी की बौछार भी मारी गई, किंतु उपद्रव पर अमादा बंदियों ने पीछे हटने के बजाए जेल परिसर में ही आग लगा दी। सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक भारत सिंह यादव सहित कई पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी दर्जन भर थानों की फोर्स व पीएसी लेकर स्थिति को नियंत्रित करने में लगे रहे। देर रात तक स्थिति जस की तस बनी हुई थी। स्थिति नियंत्रण न होने पर उग्र कैदियों पर काबू पाने के लिए पुलिस ने करीब दो घंटे तक रुक-रुक कर हवा में फायरिंग की। इस दौरान लेल की बिजली भी काट दी गयी थी। कैदियों की चीखने चिलाने की आवाजें जेल के बाहर तक सुनाई दी। कहा जा रहा है कि जिला कारागार में मृत बंदी श्याम कुमार सिकरारा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय फिरोजपुर प्रथम में शिक्षिका प्रियंका सिंह संग की गई चेन लूट के मामले में गिरफ्तार था। 27 मई को उसे तत्कालीन थानाध्यक्ष योगेंद्र बहादुर सिंह ने तमंचे व पांच हजार रुपये के साथ गिरफ्तार किया था। उसने विद्यालय में घुसकर ही इस घटना को अंजाम दिया था। 

जिला अस्पताल पहुंचे मृतक के परिजन 
श्याम कुमार की मौत के बाद घटना की जानकारी लखौंवा स्थित उसके परिवार वालों को दी गई। करीब दो घंटे बाद परिवार के लोग अस्पताल पहुंच गए। वे यहां काफी देर तक रोते-बिलखते रहे तथा पिता लुट्टुर यादव अन्य लोग मामले की जांच की मांग करते रहे। पुलिस पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में लगी रही। 

पूर्व में भी हो चुका है उपद्रव 
जिला कारागार में उपद्रव, मारपीट, गोली चलना आश्चर्य की बात नहीं है। ऐसा आए दिन होता रहता है। चैदह साल पूर्व खान-पान में अनियमितता, उत्पीड़न से आक्रोशित बंदियों ने आठ घंटे तक जेल पर कब्जा जमा लिया था। घटना में बंदी रक्षक की मौत भी हो गई थी। सुविधा देने के नाम पर वसूली, खान-पान में अनियमितता, उत्पीड़न और वर्चस्व को लेकर जिला कारागार में आए दिन कोई न कोई छोटी-बड़ी घटनाएं होती रहती हैं लेकिन शनिवार की घटना ने सितंबर 2001 की याद ताजा कर दिया है। बंदी रक्षकों द्वारा वसूली, प्रताड़ना और कारागार में निरुद्ध एक शिक्षक के उत्पीड़न से बंदी उग्र हो गए थे। कारागार परिसर स्थित पेड़ों, चहारदीवारी व बैरक की छतों पर चढ़कर जमकर पथराव किया था। उनके गुस्से का कोपभाजन बने थे बंदी रक्षक सुनील कुमार। उन्हें आरोपियों ने पीट-पीट कर मार डाला। आंसू गैस के गोले, फायरिंग के जरिए स्थिति पर काबू का प्रयास किया गया। उपद्रवियों पर नियंत्रण के सारे प्रयास बेकार साबित हुए। गुरिल्ला युद्ध से असहाय पुलिस-प्रशासन मनुहार में जुट गया था। जनपद के कुछ मानिंद लोगों की पहल पर बंदी वार्ता के लिए तैयार हुए। प्रतिनिधि मंडल से एक घंटे तक चली बातचीत के बाद किसी तरह स्थिति नियंत्रण में आई थी। वर्ष 2000 में शातिर अपराधी जेपी सिंह की हत्या की नीयत से आए बदमाश छद्म नाम से मिलने के बहाने से गेट तक पहुंचा और अत्याधुनिक हथियार से फायरिंग झोंक दिया। इस घटना में जेपी तो बच गया लेकिन उसके साथ मिलने आए धीरेंद्र सिंह निवासी कैथी जनपद वाराणसी की मौत हो गई। 




(सुरेश गांधी)

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