श्री अरविन्द केजरीवाल ने 30 वर्षीया अपनी महिला साथी तथा आपनेता जयहिंद की पत्नी श्रीमती स्वाति मालीवाल को दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा नियुक्त कर सर्वप्रथम तो दिल्ली उच्चन्यायालय के उस आदेश का उल्लंघन किये जिसमें न्यायालय ने कहा था की जबतक अपेक्स कोर्ट का सम्पूर्ण फैसला नहीं आजाता तबतक दिल्ली के मुख्यमंत्री बिना एलजी के आदेश से कोई नियुक्ति न करें , केजरीवाल ने एलजी से नियुक्ति सम्बन्धी विचार तथा समर्थन लिए बिना ही श्रीमती मालीवाल को दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा नियुक्त कर दिए ।
इसमें केजरीवाल की दूसरी गलती यह है की इन्होने 30 वर्षीया अपनी महिला साथी तथा आप नेता की पत्नी की नियुक्ति की , जो आयु इस पद के लिए व्यवहारिक तौर पर बिना किसी अनुभव के बिलकुल ही उपयुक्त नही कहा जाएगा , इतने गम्भीर संस्था के प्रमुख पद के लिए कम से कम 40 आयु तथा अनुभव बहुत मायने रखता । यदि श्रीमती स्वाति मालीवाल को देखा जाय तो आंदोलन के अतिरिक्त समाजसेवा या इससब तरह के गतिविधि का उनको कोई अनुभव नहीं , और आंदोलन मात्र अनुभव नहीं कहा जा सकता ।
केजरीवाल को चाहिए था की कुछ दिनों के लिए श्रीमती मालीवाल को इसी आयोग में किसी मेंबर का पद देदेते तथा कुछ सालों के पश्चात संबंधित कार्य में परिपक्व हो जाने के बाद कोई भी पद देते । लेकिन केजरीवाल ने न्यायालय के आदेश सहित हर तथ्य को दरकिनार करते हुए अपनी पूर्वपरिचित महिला साथी तथा आमआदमी पार्टी के नेता की पत्नी को बिना किसी अनुभव के ही इतने संवेदनशील पदपर बिठा दिया ।
आमोद शास्त्री ,
दिल्ली ।
मोब=9818974495 & 9312017281 ,

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें