तीस्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 24 जुलाई 2015

तीस्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

सीबीआई की एक विशेष अदालत ने आज सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और उनके पति जावेद आनंद की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। तीस्ता और जावेद पर आरोप है कि उनकी कंपनी ने केंद्र से बगैर मंजूरी लिए विदेश से 1.8 करोड़ रुपये हासिल किए। इस मामले में सीबीआई तीस्ता और जावेद के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच कर रही है। 

विशेष न्यायाधीश अनीस खान ने याचिका खारिज करते हुए कहा, अग्रिम जमानत याचिका खारिज की जाती है। तीस्ता और उनके पति जावेद ने अदालत में 17 जुलाई को जमानत अर्जी दाखिल की थी। आदेश के तुरंत बाद तीस्ता ने अदालत से कहा कि वह फैसले से स्तब्ध हैं। 

तीस्ता ने कहा, फैसले से मैं स्तब्ध और दुखी हूं क्योंकि यह एक छोटा-मोटा अपराध है। मुझे और मेरे साथियों को लगता है कि ये (सरकार की ओर से) कुछ ताकतवर लोगों की हमें धमकाने और संभवत: रास्ते से हटाने की कोशिश है। सीबीआई ने आठ जुलाई को तीस्ता और जावेद के खिलाफ मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने आरोप लगाया कि उनकी कंपनी सबरंग कम्यूनिकेशन एंड पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड (एससीपीपीएल) ने विदेशी चंदा नियमन कानून (एफसीआरए) का उल्लंघन कर विदेशी चंदे के तौर पर करीब 2.9 लाख अमेरिकी डॉलर हासिल किए। 

सीबीआई के मुताबिक, एससीपीपीएल विदेश से चंदा लेने के लिए एफसीआरए के तहत पंजीकत नहीं है इसलिए करीब 1.8 करोड़ रूपए (2.9 लाख अमेरिकी डॉलर) कानून का उल्लंघन कर लिए गए। जांच एजेंसी का कहना है कि तीस्ता की कंपनियों को केंद्रीय गह मंत्रालय की पूर्व अनुमति लेने के बाद चंदा हासिल करना चाहिए था। तीस्ता और जावेद ने अपने वकील के जरिए अदालत को बताया कि वे बेगुनाह हैं और उन्हें फंसाया जा रहा है। उनके वकील मिहिर देसाई ने अदालत को बताया कि सीबीआई उन्हें सिर्फ इसलिए गिरफ्तार करना चाह रही है ताकि गुजरात में उनके कामों के लिए उन्हें अपमानित किया जा सके। पिछले शुक्रवार को सीबीआई ने अपने जवाब में कहा था कि एससीपीपीएल को विदेशी चंदे के अंतरण के पीछे की मंशा दिखाती है कि यह भारत की आंतरिक सुरक्षा और गतिविधियों में दखल के लिए था। 

तीस्ता की याचिका का विरोध करते हुए सीबीआई ने अपने जवाब में कहा था, विदेशी दानकर्ता की ऐसी गतिविधि से पूर्वाग्रहित रूप से राज्य के सुरक्षा, सामरिक, वैज्ञानिक और आर्थिक हित प्रभावित होंगे और इससे धार्मिक, सामाजिक, भाषायी या क्षेत्रीय समूहों, जातियों या समुदायों के बीच सदभाव पर असर पड़ेगा। सीबीआई ने कहा कि तीस्ता और जावेद के खिलाफ लगे आरोप गंभीर प्रकति के हैं और जांच के दौरान अपराध के सभी पहलू और साजिशें सामने आएंगी। 

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