बिना लोकायुक्त ,लोकायुक्त कार्यालय पर हुये रू. 2.42 करोड़ खर्च, उत्तराखण्ड में शिकायतों के लिये न लोकायुक्त, न लागूू अधिनियम
देहरादून,9 जुलाई।उत्तराखंड में न तो 21 माह से लोकायुक्त ही है और न वर्तमान में जनता की भ्रष्टाचार की शिकायतों के लिये लोेकायुक्त अधिनियम ही लागू नहीं है। जबकि बिना लोकायुक्त के ही लोकायुक्त कार्यालय पर इस अवधि में 2 करोड़ 42 लाख रूपये से अधिक धनराशि खर्च हो चुकी है। यह खुलासा सूचना अधिकार के अन्तर्गत लोकायुक्त कार्यालय द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना से हुआ है। राष्ट्रीय स्तरीय सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन एडवोेकेट ने लोकायुक्त के पद पर रिक्ति, तथा लम्बित शिकायतों सहित 5 बिन्दुओें पर सूचना मांगी। लोकायुक्त कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी द्वारा अपनेे पत्रांक 194 दिनांक 29 जून 2015 से उपलब्ध करायी गयी सूचना से स्पष्ट है कि 23 सितम्बर 2013 को उ0प्र0 लोकायुक्त/उप लोकायुक्त अधिनियम 1975 निरसित करने के बाद से ही लोकायुक्त के पद पर अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं हुई है। जबकि उत्तराखंड के लोकायुक्त कार्यालय में लोकायुक्त का पद रिक्त होने की तिथि को 640 शिकायतें लम्बित है जिसमें 65 शिकायतें अभिकथन रूपी है। उल्लेखनीय है कि अभिकथन के स्प में केवल वही शिकायतें दर्ज होती हैै जिसमें भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप होते हैं। लोकायुक्त कार्यालय द्वारा श्री नदीम को लोकायुक्त न होने की अवधि में लोकायुक्त कार्यालय पर खर्च सम्बन्धी स्टेटमैंटोें की फोटो प्रतियां भी उपलब्ध करायी गयी हैं। इसके अनुसार वित्तीय वर्ष 2015-16 मेें मई 2015 तक कुल 2794.52 हजार की धनराशि खर्च हुई है जबकि वर्ष 2014-15 में 14512.54 हजार की धनराशि खर्च हुई हैै। इसके अतिरिक्त वर्ष 2013-14 मे कुल 16205.59 हजार की धनराशि खर्च हुई है। इस वर्ष में लोकायुक्त के कार्यरत रहने के माह सितम्बर 2013 तक 9258.80 हजार की धनराशि खर्च हुई है। इस प्रकार वर्ष 2013-14 में लोकायुक्त न रहने की अवधि में (कुल धनराशि में से सितम्बर 13 तक खर्च धनराशि घटाने से) रू. 6946.79 हजार की धनराशि खर्च हुई है। इस स्टेटमैंटों के आंकड़ों के अनुसार लोकायुक्त न रहने की अवधि मेें अक्टूबर 2013 से मई 2015 तक लोकायुक्त कार्यालय पर 2 करोड़ 42 लाख 53 हजार 850 रू. की धनराशि खर्च हुई है। श्री नदीम को उपलब्ध कराये गये विवरणों के अनुसार यह धनराशियां वर्ष 2015-16 मेें मई तक वेतन, मंहगाई भत्ते तथा अन्य भत्तों में खर्च की गयी है जबकि वर्ष 2013-14 व 2014-15 में जिन पदों पर धन खर्च किया गया है उनमें वेतन, मजदूरी, मंहगाई भत्ता, यात्रा व्यय, अन्य भत्ते, कार्यालय व्यय, विद्युत देय, लेखन सामग्री एवं फार्माें की छपाई, टेलीफोन पर व्यय, गाडि़यों का अनुरक्षण एवं पेट्रोल आदि का क्रय, व्यवसायिक सेवाओं के लियेे भुगतान, चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति, कम्प्यूटर अनुरक्षण तथा अन्य व्यय की मदें शामिल हैं। श्री नदीम ने बताया कि 23 दिसम्बर 2014 के उत्तराखंड गजट में प्रकाशित उत्तराखंड लोकायुक्त (संशोधन) अधिनियम 2014 की धारा 2 से उत्तराखंड लोकायुक्त अधिनियम की धारा 1(3) में संशोधन करके यह व्यवस्था की गयी है कि उत्तराखंड लोकायुक्त अधिनियम 2014 के प्राविधान तैयारी के प्रावधान ही वर्तमान में लागूू है और लोकायुक्त अधिनियम, लोकायुक्त की नियुक्ति के समय से ही लागूू होगा। इस प्रकार लोकायुक्त की नियुक्ति तक प्रदेश में कोई लोकायुक्त अधिनियम ही लागू नहीं है। इसलिये उत्तराखंड मेें भ्रष्टाचारियों की मौज हैै न तो लोकायुक्त है और न ही लोेकायुक्त अधिनियम, जिन लोक सेवकों के विरूद्ध शिकायतें लम्बित हैं उन्हें भी शीघ्र सजा मिलने का डर नहीं है।
आईएएस अफसर के खिलाफ एक्शन को भटक रही महिला, दरबार से भी नहीं मिला न्याय
- आईएएस अफसर पर महिला को धमकाने का आरोप, महिला आयोग ने भी किया था सुलह कराने का दावा
- प्रताडि़त महिला न्याय की आस में खा रही है ठोकरें
देहरादून,9 जुलाई। महिलाओं को आगे लाने और बराबरी का दावा करने वाली सरकारों का सच एक आईएएस अफसर की प्रताड़ना का शिकार बनी महिला के दर्द से आसानी से समझा जा सकता है। पहले तो पुलिस ने मामला दबाया और फिर बाद में राज्य महिला आयोग ने दोनों के बीच सुलह कराने का दावा किया। लेकिन सच है यह है कि महिला आज भी न्याय के लिए भटक रही है। हुजूर के दरबार में फरियाद करने गई तो वहां भी उसकी आवाज को दबा दिया गया। यूपी के जमाने में पीसीएस में सलेक्ट हुए एक अफसर को उत्तराखंड में आने के बाद आईएएस अवार्ड हुआ है। ये जनाब कई अहम महकमों के मुखिया है। एक महकमे का मुखिया होने के नाते अपने ससुर की एक कंपनी पर मेहरबानियां बरसाने के लिए चर्चित हो चुके इस अफसर पर एक महिला ने घर में आकर अभद्रता करने और धमकियां देने का आरोप लगाया। इसकी शिकायत पुलिस से की गई। लेकिन पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया। हां, अफसर ने अपने महकमे के एक जूनियर अफसर से इस महिला के खिलाफ पुलिस को एक तहरीर दिलवाकर पेशबंदी जरूर कर ली। मामला मीडिया में उछला तो राज्य महिला आयोग ने इसका संज्ञान लिया। आयोग ने अफसर को तलब किया। कथित तौर पर काउसिलिंग के नाम पर आयोग ने महिला और अफसर को आमने-सामने बैठाकर बातचीत करवा दी। बाद में महिला आयोग ने दावा किया कि दोनों के बीच सुलह करवा दी गई है। उस वक्त लगा कि हो सकता है कि मामला महज गलतफहमी का हो और आयोग ने इसे सुलटा दिया है। लेकिन मुख्यमंत्री के जनता दरबार में हो कुछ हुआ, उससे लग रहा है कि महिला को न्याय नहीं मिला है और अफसर के दबाव में मामले को रफादफा करने की कोशिश महज हुई है। बीेते रोज सीएम लोगों की समस्याएं सुन रहे थे। अचानक एक महिला ने अपनी आवाज बुलंद की और कहा कि एक अफसर उसका मकान खाली कराने को दबाव बना रहा है। कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वहां मौजूद पुलिस अफसरों ने उसे पहचान लिया और समझ गए कि यह वही महिला है, जिसके साथ एक आईएएस अफसर का विवाद चल रहा है। आनन-फानन में उस महिला को वहां से पुलिस से रुखसत कर दिया गया। जाहिर है कि दरबार में पहुंचकर भी उसकी आवाज सरकार के कानों तक नहीं पहुंच पाई। ऐसे में सवाल यह खड़ा हो रहा है कि अगर महिला आयोग ने दोनों के बीच सुलह करा दी थी तो फिर महिला को जनता दरबार में आकर शोर करने की क्या जरूरत थी। यह भी हो सकता है कि आयोग में वार्ता के दौरान दोनों पक्षों के बीच जो सहमति बनी हो, उस पर अमल ही न हो रहा हो। सत्यता क्या है यह तो जांच का विषय है,लेकिन इतना साफ हो गया है कि कहीं न कहीं गड़बड़ी जरूर है। सरकारी तंत्र के साथ ही महिला आयोग भी अफसर के साथ खड़ा दिख रहा है। हो सकता है कि इस मामले में महिला की ही गल्ती हो। लेकिन जांच की बजाय मामले को दबाने की कोशिशें इस बात का इशारा जरूर कर रही है कि महिला सशक्तीकरण की बात करने वाली सरकारों का असली चेहरा क्या है।
जमीनी विवाद की आशंका
अब सवाल यह उठ रहा है कि महिला और अफसर के बीच आखिर विवाद है क्या। बताया जा रहा है कि मामला एक बेशकीमती जमीन ने जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि महिला और अफसर की मुलाकात उत्तरकाशी में तैनाती के दौरान हुई थी। वहीं पर इस जमीन को लेकर कथित तौर पर सौदा हुआ। अब दोनों के बीच इसी जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। शायद यही वजह है कि महिला बार-बार कह रही है कि आईएएस अफसर उससे जबरन मकान खाली कराना चाहता है।
हरेला पर्व को पर्यावरण व वृक्षारोपण से जोड़े जाने का कांग्रेस ने किया स्वागत
देहरादून 9 मई (निस)। जिस प्रकार लगातार हरियाली कम होती जा रही है उसकी रक्षा के लिए पर्यावरण व वृक्षारोपण के कार्यक्रम के आयोजन आवष्यक हैं ताकि अपने पर्वों के साथ इन त्यौहारों का महत्व और बढे़। उत्तराखण्ड प्रदेष कांग्रेस कमेटी ने मुख्यमंत्री हरीष रावत के हरेला पर्व के बारे में लिये गये निर्णय का स्वागत करते हुए उन्हें बधाई दी है। प्रदेष कांग्रेस अध्यक्ष किषोर उपाध्याय ने कहा कि हरेला पर्व मनाने के बारे में मुख्यमंत्री हरीष रावत जी का निर्णय सराहनीय एवं स्वागत योग्य है। उत्तराखण्ड विषेशकर हिमालयी क्षेत्र का देष एवं पर्यावरण की रक्षा में विषेश योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार लगातार हरियाली कम होती जा रही है उसकी रक्षा के लिए इस प्रकार के आयोजन आवष्यक हैं। विष्व पर्यावरण की रक्षा करने के साथ-साथ अकेले उत्तराखण्ड की धरती 600 लाख लोगों को जीवन देने का काम कर रही है। पर्यावरण की रक्षा में उत्तराखण्ड के महत्व को अन्तर्राश्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिया जाता रहा है। वृक्षा रोपण त्यौहार का प्रतीक हरेला महोत्सव देवभूमि उत्तराखण्ड में कर्क संक्रांन्ति के दिन आदिकाल से मनाया जाता रहा है। वृक्षारोपण के साथ हरेला को नये रूप में मनाने के मुख्यमंत्री जी के प्रयासों को मजबूती प्रदान करने के लिए गांववासियों विषेशकर महिलाओं के सहयेाग से गांवों एवं षहरों में वृक्षा रोपण कर 10 वर्श तक पेड़ों की रक्षा सुनिष्चित की जानी चाहिए। हिमालयी राज्य होने के कारण यहां के जनमानस का वृक्षों के प्रति विषेश श्रद्धा एवं आदर का भाव रहा है। उन्होंने कहा कि आज समय की मांग है हम सबको मिलकर पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ हिमालय की रक्षा के लिए आगे आना होगा।
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का प्रदेशवासियों को मिले लाभ: हरीश रावत
देहरादून 9 मई (निस)। मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि योजना का लाभ प्राप्त करने में किसी भी व्यक्ति को कोई कठिनाईं न हो, इसका सभी संबंधित अधिकारी ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है। इसलिए योजना के अधीन आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को बिना किसी परेशानी के स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करायी जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार पर ध्यान दिया जाए। प्रत्येक जिले में इसकी नियमित रूप से बैठक आयोजित हो, सभी सरकारी, चिन्ह्ति गैर सरकारी अस्पतालों एवं बीमा कम्पनीयों के साथ समय-समय पर विचार-विमर्श कर योजना के सफल क्रियान्वयन की समीक्षा की जाय। बीजापुर अतिथि गृह में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना की स्वास्थ्य मंत्री एवं उच्चाधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री हरीश रावत ने समीक्षा के दौरान यह बातें कहीं। मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि आम आदमी को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही प्रदेश में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की गई है। स्वास्थ्य विभाग इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर फोकस करे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि आम जनता से जुड़ी इस योजना का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाय। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में योजना की जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (एम.एस.बी.वाई.) कार्ड बनाने में तेजी लाने के साथ ही आशा कार्यकत्र्रियों व बीएलओ की भी इसमें मदद ली जाय। देहरादून-हरिद्वार जनपदों में योजना के संबंध में विशेष अभियान संचालित किया जाय। योजना में अधिक से अधिक लोगो के शामिल होने से चिकित्सा सेवाओं में भी सुधार होगा। अधिक से अधिक अन्य बडे निजी अस्पताल भी इस योजना में शामिल हो सकेंगे। मुख्यमंत्री श्री रावत ने बैठक में इस योजना के संबध में सभी संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर उनके द्वारा दिए गए सुझावों एवं इंगित की गई कठिनाईयों का भी निराकरण किया। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए योजना के अधीन निर्धारित धनराशि के अतिरिक्त भी बीमारी की गंभीरता व आवश्यकता को देखते हुए व्याधि निधि से भी धनराशि की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि महिलाओं की चिकित्सा सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जाय। प्रेमनगर व डोईवाला को सर्पोटिंग हाॅस्पिटल के रूप में विकसित किया जाय। उन्होंने गांधी नेत्र चिकित्सालय के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि आगामी 02 अक्टूबर को गांधी जयन्ती के अवसर पर इसका शुभारम्भ किया जाएगा। इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय से सुनिश्चित कर ली जाय। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी, कैबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह, विधायक उमेश शर्मा काऊ, राजकुमार, प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ओमप्रकाश, अपर सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य नीरज खैरवाल, अतर सिंह, यूनाईटेड इण्डिया इंश्योरेन्स कंपनी के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक रमेश अययर, नोडल अधिकारी संजय जोशी आदि उपस्थित थे।
कृषि एवं उद्यान विभाग की समीक्षा बैठक, भविष्य में बीजों की उपलब्धता के संबंध में कोई कठिनाईं न हो: रावत
देहरादून 9 मई (निस)। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कृषि व उद्यान विभाग के अधिकारियों से सब्जी व अन्य फसलों की उच्च गुणवत्ता वाले बीजांे की व्यवस्था समय पर सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने कृषि व औद्यानिकी से जुडे किसानों को तकनीकि सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सब्जियों के अतिरिक्त अन्य खाद्य उत्पादों के कलस्टर तैयार करने को भी कहा है। उन्होंने आगामी 15 दिन में विभागीय स्तर पर इस संबंध में की जाने वाली कार्यवाही की कार्ययोजना प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए है। बीजापुर अतिथि गृह में कृषि एवं उद्यान विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री रावत ने निर्देश दिए कि भविष्य में बीजों की उपलब्धता के संबंध में कोई कठिनाईं न हो। किसानों को समय पर बीज उपलब्ध हो जाए, यह विभागीय अधिकारी अभी से सुनिश्चित कर लें। इसके लिए टी.डी.सी. के अलावा औद्यानिकि विश्वविद्यालय भरसार, विवेकानन्द कृषि अनुसंधान संस्थान के साथ ही निजी बीज उत्पादक किसानों से समन्वय बनाया जाए। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में भौगोलिक स्थिति के अनुरूप साग सब्जी, अदरक, लहसुन, प्याज, हल्दी के उत्पादन क्षेत्र चिन्ह्ति करें। निजी किसानों को बीज उत्पादन के लिए विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाए। उनके बीजों को क्रय करने की व्यवस्था की जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान इसमें आगे आए। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति के अनुरूप इससे उत्पादन भी बढे़गा। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कृषिकरण के साथ ही कृषि रक्षा के प्रति भी ध्यान देने को कहा। मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि विभाग किसानों का हितैषी बनकर उनकी मदद करें। खेती के प्रति लोगों का रूझान कैसे और अधिक बढ़े, इसकी तरफ ध्यान दिया जाए। दलहन के क्षेेत्र में भी विशेष ध्यान देने के निर्देश उन्होंने दिए। इसके लिए भी क्षेत्रों का चिन्ह्किरण करने के निर्देश भी उन्होंने दिये। इसके साथ ही मुनस्यारी, नीति माण, मलारी, हर्षिल जैसे सीमान्त क्षेत्रों के क्षेत्रीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया जाए। मक्का, राजमा, रामदाना व लालधान, मंडुआ की पैदावार बढ़ाने के तरीके भी विभाग किसानो को उपलब्ध कराये। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति के अनुरूप साग सब्जी, अदरक, लहसुन, प्याज, हल्दी के उत्पादन क्षेत्र चिन्ह्ति करें। निजि किसानों को बीज उत्पादन के लिए विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाए। उनके बीजों को क्रय किये जाने की व्यवस्था की जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान इससे आगे आयें। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति के अनुरूप इसमें उत्पादन भी बढ़ेगा। बैठक में कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी, प्रीतम सिंह, विधायक राजकुमार, हीरा सिंह बिष्ट, उमेश शर्मा काऊ, निदेशक उद्यान बी.एस.नेगी, सलाहकार कृषि सी.एस. मेहरा, संयुक्त निदेशक कृषि परमा राम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
शराब दुकानों से ब्रांड फिर गायब, नई एफएल-टू नीति बन रही परेशानी का सबब
- खास व्यक्ति के दखल से हो रही दिक्कतें, सरकार को राजस्व के नुकसान की आशंका
देहरादून 9 मई (निस)। सरकार की ओर से लागू की गई नई एफएल-टू नीति शराब विक्रताओं और मयकशों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। इस धंधे में एक खास व्यक्ति की बेवजह की दखलंदाजी से शराब का व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है। आलम यह है कि शराब की फुटकर दुकानों से कई ब्रांड गायब हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि शराब कंपनियां एक खास व्यक्ति से डील करने को तैयार ही नहीं हो रही हैं। सरकार ने तमाम विरोध के बाद भी सूबे में शराब की बिक्री के लिए नई नीति लागू की है। एक मई से लागू की गई यह नीति ढाई माह में ही दम तोड़ती दिख रही है। राज्य में खुली शराब की दुकानों को उनकी मांग के अनुसार शराब के ब्रांड ही नहीं मिल रहे हैं। एक बार तो कई रोज तक दुकानें पूरी तरह से खाली भी हो चुकी है। हालात फिर पहले जैसे होते दिख रहे हैं। इस समय शराब की दुकानों से कई ब्रांड गायब हो चुके हैं। इसी का फायदा उठाकर विक्रेता तय कीमत से ज्यादा राशि वसूली जा रही है। बताया जा रहा है कि इसकी बड़ी वजह एक खास व्यक्ति की दखलंदाजी है। सूत्रों का कहना है कि ऊपर के मौखिक आदेश से इसी व्यक्ति को शराब कंपनियों से डील करने का अघोषित अधिकार दिया गया है। यही व्यक्ति तय करता है कि किस कंपनी के कौन से ब्रांड की शराब मंडी परिषद खरीदेगी। बताया जा रहा है कि शराब कंपनियां इस खास व्यक्ति से किसी तरह की डील करने को तैयार ही नहीं हैं। कंपनियों का कहना है कि थोक का कारोबार मंडी परिषद के पास हैं तो मंडी के अफसरों से ही बात की जाएगी। बताया जा रहा है कि इस तरह की स्थिति से राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। फुटकर दुकानदारों को मांग के अनुसार माल न मिलने से उनकी बिक्री पर भी इसका असर पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री का चीनी मिलों को चेतावनी, किसानों के गन्ने का भुगतान न किया तो होगी कानूनी कार्यवाही: मुख्यमंत्री
देहरादून 9 मई (निस)। जिन निजी चीनी मिलों द्वारा आगामी सोमवार तक गन्ना किसानों के बकाये का 50 प्रतिशत का भुगतान नहीं किया जाएगा, उन पर राज्य सरकार द्वारा आवश्यक कानूनी कार्यवाही की जाएगी। गुरूवार को बीजापुर में हरिद्वार के विभिन्न गांवांे से आए किसानों के प्रतिनिधिमण्डल को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि हम किसानों के दुख-दर्द से वाकिफ हैं। उŸाराखण्ड सरकार अपने किसानों के लिए अन्य राज्यों से बेहतर करेगी। किसान हिम्मत रखें, राज्य सरकार उनके साथ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि में चीनी व बासमति चावल की कीमत गिरने पर राज्य सरकार का नियंत्रण नहीं है। चीनी के दाम कम होने से चीनी मिलें गन्ना किसानों का बकाया भुगतान नहीं कर रही है। परंतु उनसे स्पष्ट कह दिया गया है, निजी चीनी मिलें सोमवार तक गन्ना किसानों के बकाए का 50 प्रतिशत भुगतान करना सुनिश्चित करें ताकि भारत सरकार के पैकेज का लाभ उठाया जाए सके। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि उŸाराखण्ड देश में सबसे अधिक गन्ना मूल्य देने वाले राज्यों में से एक है। हम गन्ना किसानों को 2 रूपए प्रति क्विंटल का बोनस भी दे रहे हैं। उŸाराखण्ड ही ऐसा राज्य है जहां गन्ना किसानों के पिछले वर्ष का कोई बकाया नहीं है। उŸाराखण्ड एक छोटा राज्य है और यहां के विŸाीय संसाधन सीमित हैं। हम केवल अपने स्तर पर बकाए का पूरी तरह से भुगतान नहीं कर सकते हैं। इसमें केंद्र सरकार को सहायता देनी होगी। यूपीए सरकार के समय देश में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के लिए 6500 करोड़ रूपए का पैकेज स्वीकार किया गया था। परंतु वर्तमान केंद्र सरकार ने बहुत दबाव के बाद कई तरह की शर्तों के साथ लगभग 6 हजार करोड़ रूपए का पैकेज की घोषणा की है, जबकि इस बार गन्ना किसानों का बकाया की राशि बहुत अधिक थी। इसमें भी अभी तक एक भी पैसा राज्य सरकार को नहीं मिला है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि प्राकृतिक मार के कारण किसानों की फसलों को काफी नुकसान हुआ है। हमने मुख्यमंत्री राहत कोष से मुआवजा वितरण के लिए 25 करोड़ रूपए दिए हैं। फसलों के पूरी तरह से नुकसान को देखते हुए केंद्र सरकार से किसानों के बैंक ऋणों की वसूली को 6 माह के लिए रोकते हुए इस अवधि का ब्याज माफ करने का अनुरोध किया था। इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा आश्वस्त किया गया था कि 6 माह के लिए वसूली को रोक दिया जाएगा और इस अवधि का किसानों का ब्याज माफ करने के लिए विŸा मंत्रालय को संस्तुति की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे शीघ्र ही दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री के सामने इस मामले को रखेंगे। इस अवसर पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, गौरव चैधरी, चैधरी बाबूराम, कटार सिंह, सुरेंद्र सिंह, मेघराज, नरेंद्र त्यागी सहित हरिद्वार के विभिन्न गांवों से आए किसानों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
अशासकीय विद्यालय संगठन का वेतन भुगतान को लेकर क्रमिक अनशन 39 दिन भी जारी
देहरादून,9 जुलाई (निस)। परेड ग्राउंड के समीप धरना स्थल पर अशासकीय विद्यालय संगठन का वेतन भुगतान को लेकर क्रमिक अनशन 39 दिन भी जारी रहा। अनशन में कई कर्मचारी उपस्थित रहे जो मांगो को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी कर रहे थे। संगठन के अध्यक्ष त्रिलोक सिंह भंडारी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने वेतन भुगतान के सम्बन्ध में अपना अनुमोदन बीती चार जून को दे दिया था, लेकिन शासन द्वारा इस प्रक्रिया पर बार बार रोक लगायी जा रही है एवम दोगला रैवैया अख्तियार किया जा रहा है व साथ ही विभिन्न प्रकार की भ्रांतियां फैलाई जा रही है। क्रमिक अनशनकारियों का कहना है की शासन की सुस्त रफ्तार के विरोध में जल्द ही वे सचिवालय के घेराव करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया है कि मुख्य सचिव एवं सचिव षिक्षा द्वारा समाचार पत्रों में यह अफवाह फैलाई जा रही है कि आन्दोलनकारियों को वेतन भुगतान किया जा रहा है परन्तु धरातल पर कुछ भी स्पष्ट नजर नही आ रहा है। उन्होने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि शासन के दोगले रेवैये से व सुस्त चाल को लेकर संगठन वेतन भुगतान की एकसूत्रीय मांग को लेकर सचिवालय का घेराव करेगा। वहीं गुरूवार को उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने अनशनकारियों से मुलाकात की। क्रमिक अनशन पर गुरूवार को जनपद चमोली से चन्द्र सिंह एवम पौड़ी गढ़वाल से जीतेन्द्र सिंह टम्टा बैठे रहे। वहीं इनके समर्थन में संगठन के सभी पदाधिकारी एवम कर्मचारी बैठे रहे। जिसमें प्रमोद कुमार, जोशी, जगदीश, महिताब सिंह बुरोला आदि उपस्थित थे।
सरकार ने खोले भ्रश्टाचार के लिए नये दरवाजे अजय भट्ट
देहरादून,9 जुलाई (निस)। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने प्रदेष सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने अपने 16 जून, 2015 के वित्त विभाग के आदेष में 1.5 करोड़ तक की लागत के कार्यों को एकल निविदा के अन्तर्गत कराने तथा पर्वतीय क्षेत्रों में 1.5 करोड़ के कार्य बिना टैण्डर के कराये जाने के आदेष कर, भ्रश्टाचार के लिए नये दरवाजे खोल दिये हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह आदेष सीधे-सीधे अपने चहेतों को लाभ पहुॅचाने के उद्देष्य से जारी किया है। उन्होंने कहा कि इससे भ्रश्टाचार और अधिक बढेगा तथा प्रतिस्पर्धा का लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही पारदर्षिता का अभाव होने के कारण इससे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा।भट्ट ने कहा कि यह सरकार मनमाने तरीके से मनमर्जी के आदेष निकाल रही है तथा जनहित को सीधे-सीेधे तार-तार किया जा रहा है। मात्र अपने कार्यकर्ताओं को खुष करने के अलावा इसे प्रदेष की आम-जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रह गया है। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री के जनता दरबार में कांगे्रस कार्यकर्ताओं की दबंगई को लेकर कहा कि प्रदेष की सीधी और भोली भाली जनता का दुःख दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। जिस प्रकार कांगे्रस कार्यकर्ताओं ने जनता दरबार में आये फरियादियों को धक्का देकर तथा हाथ पकड़कर खींचते हुए बाहर निकाला यह बहुत ही षर्मनाक एवं संवेदनहीन कृत्य है। उन्होंने कहा कि जब फरियादियों की बातें तक सुनने को सरकार राजी नहीं है तो फिर दिखावे के लिए मुख्यमंत्री जनता दरबार लगाने का औचित्य ही क्या है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेष में भ्रश्टाचार चरम पर है तथा बिना लेन-देन के कोई कार्य नहीं किये जा रहे हैं। श्री भट्ट ने कहा कि जब राश्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने प्रदेष मंे हरेले के अवसर पर 25 लाख पेड़ लगाने का संकल्प लिया उसके बाद सरकार द्वारा आरएसएस की तर्ज पर नकल करते हुए हरेले से पेड़ लगाने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि हरेला हमारी परम्परा, संस्कृति एवं आस्था का प्रतीक रहा है। हमारा विरोध केवल यह है कि सरकार मात्र नकल न करे कुछ फैसले स्वयं भी लेने की आदत डाले।
बादल फटने से पांच लोग जिन्दा दफन
देहरादून,9 जुलाई(निस) । पूरे उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश से आफत कम नहीं हुई है। चैबट्टाखाल तहसील के अंतर्गत मेड गांव में तेज बारिश के दौरान बादल फटने से एक मकान ढह गया। इससे एक ही परिवार के पांच लोग जिंदा दफन हो गए, जबकि एक महिला घायल है। गत रात से ही पौड़ी जनपद में तेज बारिश होने लगी। आधी रात के बाद करीब एक बजे अचानक रणवीर लाल का मकान ढह गया। इस दौरान परिवार के सदस्यों को बाहर भागने का मौका तक नहीं मिला। मकान गिरने के दौरान जोरदार आवाज होने पर पड़ोस के लोग भी घरों से निकल गए और मलबे से परिवार के सदस्यों को निकालने में जुट गए। हादसे में रणवीर लाल उम्र 35 वर्ष के साथ ही उनकी बेटी कु. ज्योति उम्र 11 वर्ष, रितू उम्र 8 वर्ष, राधा उम्र वर्ष व बेटा रोशन उम्र 5 वर्ष की मौत हो गई। जबकि रणवीर की पत्नी उमा देवी घायल है। उसे निकटवर्ती स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया है। सूचना पर प्रशासन की टीम मौके पर पहंुची और स्थानीय लोगों की मदद से राहत एंव बचाव कार्य किया। इधर क्षेत्र के छानी गांव के पास भी रात में बादल फट गया। इससे एक पुल और चार वाहन बह गए। मिली जानकारी के अनुसार, बीती रात पाबो ब्लॉक के छानी गांव के पास बादल फट गया। इससे एक पुल और चार वाहन बह गए। ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को दी है। ग्रामीणों ने बताया कि पुल बहने से लोगों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। अभी तक कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है। वहीं मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जनपद पौड़ी की तहसील चैबटाखाल में अतिवृष्टि के कारण हुई लोगो की मृत्यु पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति एवं दुःख की इस घडी में उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है। साथ ही इस घटना में घायल हुई महिला के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने जिलाधिकारी पौड़ी को निर्देश दिये कि मृतकों के परिजनों को अनुमन्य राहत राशि तत्काल उपलब्ध करायी जाए। साथ ही दुर्घटना में घायल हुई महिला के उपचार की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र से प्राप्त सूचना के अनुसार विगत दिवस रात्रि लगभग 11ः30 बजे तहसील चैबटाखाल के अन्तर्गत ग्राम मैड़ा में अतिवृष्टि के कारण 01 आवासीय भवन क्षतिग्रस्त हो गया। जिसमें 05 (03 बालिका, 01 पुरूष, 01 बच्चा) लोगों की मृत्यु व एक महिला घायल हुई है। घायल महिला को उपचार हेतु प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एकेश्वर में भर्ती कराया गया है।



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