झारखंड सरकार ने स्वीकार किया है कि देवघर में सोमवार तड़के हुए भगदड़ का कारण श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन की नाकामी थी। भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई। अतिरिक्त मुख्य सचिव एन.एन.पांडेय की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एक दल ने प्रारंभिक जांच की रपट सोमवार को सरकार को सौंप दी। एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, "प्रारंभिक जांच में प्रशासनिक नाकामी की बात सामने आई है, जिसकी वजह से भगदड़ मची।" प्रारंभिक जांच के आधार पर सरकार ने देवघर के उपायुक्त अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक पी.मुरुगन, सिविल सर्जन दिवाकर कामत तथा स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्रीय उप निदेशक शिव शंकर प्रसाद को निलंबित कर दिया गया है।
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, देवघर जिले के बेलाबगान के निकट लगभग तीन हजार से पांच हजार श्रद्धालु एकत्रित थे और श्रद्धालुओं की कतार 10 किलोमीटर से भी अधिक लंबी थी। सोमवार तड़के 4.30 बजे के आसपास कुछ श्रद्धालुओं ने शोर मचाया कि मंदिर का दरवाजा खुल गया। इसके तुरंत बाद श्रद्धालुओं ने कतार तोड़कर मंदिर की तरफ दौड़ना शुरू कर दिया। वहां प्रकाश की व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण लोग अंधेरे में सो रहे श्रद्धालुओं को कुचलकर आगे निकल गए।
पुलिस के लाठी चार्ज करने के बाद हालात और बदतर हो गए। इस घटना में 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल चार श्रद्धालुओं को इलाज के लिए विमान से रांची भेज दिया गया। श्रद्धालु सुल्तानगंज में गंगा से जल भरकर पैदल 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देवघर स्थित भगवान शिव को जलार्पण करते हैं। प्रतिवर्ष 30 लाख से अधिक श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं।

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