भारत और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की रविवार को होने वाली बैठक पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। भारत ने पाकिस्तान को सलाह दी है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज़ की कश्मीरी अलगाववादियों से बैठक नहीं की जाये क्योंकि यह उफा में दोनों देशों के दौरान बनी समझ के अनुरूप नहीं होगा लेकिन पाकिस्तान ने कहा कि वह हुर्रियत नेताओं को निमंत्रित करने को लेकर अडिग है तथा उसका एजेंडा भारत की आपत्तियों से प्रभावित नहीं होगा। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता काजी खलीलुल्लाह ने कहा कि श्री अजीज दिल्ली में कश्मीर सहित सभी मुद्दे उठाएगें जबकि भारत ने जोर देकर कहा है कि बातचीत सिर्फ आतंकवाद पर ही होगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने आज यहां कहा कि पाकिस्तान को कल ही सलाह दी गई है कि श्री अजीज की हुर्रियत नेताओं के साथ बैठक उचित नहीं होगी तथा यह ऊफा समझौते की भावना के विपरीत होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने देानों सलाहकारों के बीच बातचीत के लिए 18 अगस्त को भेजे गए एजेंडे की पुष्टि करने को भी कहा है। पाकिस्तानी पक्ष द्वारा हुर्रियत नेताओं से मुलाकात के फैसले और नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम के उल्लंघन की घटनाओं के बीच सुरक्षा सलाहकारों की बैठक को लेकर सरकार को अंदरूनी और बाहरी दोनों दबाव का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस ने पूछा है कि क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसी अंतर्राष्ट्रीय दबाव में हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने कहा है कि इस बैठक को तुरंत स्थगित कर देना चाहिए और पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित को आवंछित व्यक्ति करार देकर देश से निकाल देना चाहिए। श्री सिन्हा ने इसके लिए प्रधानमंत्री की भी आलोचना की और कहा कि अगर श्री मोदी समझते हैं कि वह अपने पूर्ववर्तियों से अलग हैं और पाकिस्तान संबंधी समस्याएं सुलझा सकते हैं तो वह भ्रम में हैं। उन्होंने कहा कि इस समय जिस प्रकार की परिस्थितियां हैं, उनमें पर्दे के पीछे से बातचीत ही समस्या सुलझाने और रिश्तों को आगे ले जाने का बेहतर विकल्प होगा।
भारत ने पिछले साल विदेश सचिव स्तर की बातचीत को पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित द्वारा हुर्रियत नेताओं द्वारा आमंत्रित किये जाने के बाद रद्द कर दिया था। इस समय सरकार ने निर्णय लिया है कि बातचीत होनी चाहिए क्योंकि वह आतंकवाद पर ही केन्द्रित है और इस मुद्दे को तुरंत हल करना जरूरी है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की ओर से उकसावे वाली हरकतें इसलिये हो रही हैं कि भारत पर बातचीत बंद करने का दोष मढ़ा जा सके। पाकिस्तान ने कश्मीरी नेताओं को आमंत्रित करने के अलावा उकसावे के लिए नियंत्रण रेखा पर गोलाबारी तेज कर दी है तथा गुरूदासपुर और उधमपुर में आतंकवादी हमलों को अंजाम दिया। पाकिस्तान राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के इस्लामाबाद में प्रस्तावित सम्मेलन के लिए जम्मू कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष को नहीं आमंत्रित करके एक और विवाद पैदा कर दिया जिसका नतीजा यह हुआ कि सम्मेलन का आयोजन इस्लमाबाद की बजाय अन्यत्र कराने का निर्णय लिया गया।

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