- भले ही एक दोस्त हो, लेकिन अच्छे विचारों वाला हो
षिर्डी 2 अगस्त 2015। जीवन में तीन रिश्ते किस्मत से मिलते हैं। अच्छी पत्नी, अच्छी संतान और अच्छा दोस्त। पत्नी का चुनाव घर वाले और रिश्तेदार की सहमति से होता है। संतान प्रकृति की देन है, लेकिन दोस्त का रिश्ता तो हम स्वयं चुनते हैं। यदि पत्नी खराब मिली तो एक जन्म ही खराब होता है, लेकिन यदि दोस्त खराब बन गया तो तुम्हारी आदतें और संस्कार सब बेकार हो जाएंगे और सारा जीवन पाप कमाने में निकल जाएगा, जिससे एक नहीं कई जीवन बर्बाद हो जाएंगे। पत्नी से भी अधिक सावधानी मित्र के चयन में बरतना चाहिए। यह विचार सलाहकार दिनेष मुनि ने रविवार 2 अगस्त 2015 को जैन स्थानक ‘षिर्डी’ में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
सलाहकार दिनेष मुनि ने कहा कि एकांत वातावरण से जीवन में नीरसता आती है। भले ही एक दोस्त हो लेकिन अच्छे विचारों वाला हो। जहां दोस्त में स्वार्थ पनपने लगता है, वहीं से दोस्ती की हत्या हो जाती है। हमारा आचरण संगति पर टिका होता है और जीवन आचरण पर। जीवन की सार्थकता सद्वविचारों के व्यक्ति के साथ संगति तथा सदाचरण से होती है।
बेटियां हीरे के समान
मुनिश्री ने कहा कि मेरे पास कई बार बच्चियां शिकायत लेकर आती हैं कि हमारे माता-पिता हम पर अत्यधिक पाबंदी लगाते हैं और भाईयों को पूरी आजादी मिलती है। मैंने कहा कि याद रखना बेटियां हीरे के समान होती हैं और हीरे को ही तिजोरी में ही रखा जाता हैै। मुनिश्री ने उन्हें समझाइश देते हुए कहा कि किसी से मित्रता रखने से पहले देखो कि उसके विचार कैसे हैं। डाॅ. द्वीपेन्द्र मुनि ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में सारे मंत्र निष्फल हो सकते हैं, पर सकारात्मक सोच का मंत्र आज तक कभी निष्फल नहीं हुआ। नकारात्मक सोचने वाला कभी स्वर्ग में नहीं जाता और सकारात्मक सोचने वाले को यहीं स्वर्ग मिल जाता है।
समारोह में डाॅ. पुष्पेन्द्र मुनि ने मित्रता शब्द की व्यख्या करते हुए कहा कि सच्चा मित्र ढाल की तरह होता है जो विपत्ति में हमारे साथ होता है। जैन शास्त्र ‘भगवती सूत्र’ में गौतम स्वामी व स्कंधक परिव्राजक की पूर्वभव की मित्रता का उल्लेख किया व साथ ही सुदामा कृष्ण, कर्ण और राम व सुग्रीव की मित्रता की मिसाल बताते हुए उनके जैसी मित्रता निभाने का समझाया। समारोह में ‘लुक एण्ड लरन’ के पाठषाला के नन्हें मुन्ने बालक - बालिकाओं द्वारा ‘सुख आते है दुख आते है पर हम सब में मस्त रहते है’ गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया गया। साहिल चैपड़ा व साईष ओस्तवाल द्वारा ‘भोजन में झूठा नहीं छोड़ना’ नामक नाटिका प्रस्तुत की गई और खुषी पारख, खुषी ओस्तवाल, दर्षना तोडरवाल द्वारा ‘माता - पिता से जिद नहीं करना’ इस विषय पर आधारित एक लघु नाटिका की प्रस्तुति की गई।

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