भीषण गर्मी व तेज धूप से उप राजधानी दुमका का जन-जीवन इन दिनों काफी मुश्किलों भरा हो गया है। प्रातः 9 बजे के बाद जहाँ एक ओर घरों से निकलना आम जन-जीवन के लिये काफी दुष्कर भरा होता जा रहा है, वहीं सरकारी व निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिये पेयजल का संकट और भी मुश्किलों भरा हो गया है। विभिन्न विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की शिकायत है कि विद्यालयों में ठण्डे पानी का घोर अभाव है। विभिन्न विद्यालयों में भवन के उपर बने टंकियों मे एकत्रित गर्म पानी से ही बच्चों को अपनी प्यास बुझानी पड़ती है। कई-कई विद्यालयों में चापाकल का अभाव भी देखने को मिल रहा है। गर्म पानी से बच्चे अपनी प्यास बुझाने को बाध्य देखे जा रहे हैं। अलग-अलग विद्यालयों मे पढ़ने वाले बच्चों के कतिपय अभिभावकों का कहना है कि निजी विद्यालयों में प्रति माह ली जाने वाली फी की तुलना में उनके बच्चों को वे सुविधाएँ मुहैया नहीं करवायी जाती जिसकी अपेक्षा की जाती है।
निजी विद्यालयों में छात्रों की तुलना में पंखों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। जब तक विद्युत विभाग की लाईन मोजूद रहती है तब तक ऐन-केन-प्रकारेन उन्हें हवा तो प्राप्त हो जाती है किन्तु लाईन चले जाने के बाद जेनरेटर का इस्तेमाल विरले ही किया जाता है। कई-कई विद्यालयों में जेनरेटर तक उपलब्ध नहीं होता। डवलपमेंट, इन्टरटेनमेंट व सुविधा शुल्क के नाम पर प्रतिमाह ली जाने वाली राशि की वनिस्वत बच्चों को उक्त सुविधाओं से वंचित रखा जाता है। जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग को इन सुविधाओं के मद्देनजर विद्यालयों को कड़े निर्देश जारी किये जाने की आवश्यकता है। विदित हो प्रातः साढ़े छः बजे से विद्यालय में पठन-पाठन का कार्य प्रारंभ होता है जो दोपहर 12ः 30 तक चलता रहता है।
विद्यालय में छुट्टी होने के बाद बच्चों को घर पहुँचने तक तेज धूप व भीषण गर्मी के प्रकोप को सहन करना पड़ता है। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में पठन-पाठन का समय पूर्वा0 10ः 30 तक होना चाहिए ताकि समय पर ब्रच्चे घर वापस पहुँच सकें। जिन अभिभावकों के पास बाईक, फोर व्लीलर्स व अन्य साधन मौजूद है, अपने बच्चों को वे उन माध्यमों से वापस घर ले जाते हैं किन्तु जिन अभिभावकों के पास ऐसी कोई सुविधाएँ मौजूद नहीं, वैसे अभिभावकों के बच्चों को पैदल ही घर पहुँचना पड़ता है जो काफी कष्टदायक है।
--अमरेन्द्र सुमन--

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