- संविदा पर बहला अल्प वेतनभोगियों ने नियमित मानदेय देने की मांग
पटना। आईएएस हैं वंदना किनी। फिलवक्त प्रधान सचिव सह मिशन निदेशक, बिहार प्रशासनिक सुधार, मिशन सोसायटी, सामान्य प्रशासन विभाग में हैं। इनको 5 जून 2016 से शुरू बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम को लागू करने की जिम्मेवारी सौंपी गयी है। सूचना एवं जनसम्र्पक विभाग, अनुमंडल और जिल स्तर पर लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम का कार्यालय खोला गया है। आगत परिवादियों को विशेष सुविधा प्रदान करने की व्यवस्था है। काउंटर पर जाकर परिवादी आवेदन देते हैं। काउंटर पर बैठे कार्यालय सहायक आवेदन लेते हैं और पावती देते हैं। आवेदन की जानकारी मोबाइल पर भी देते हैं। परिवाद की सुनवाई और निवारण की नियत तिथि दी जाती है। बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत इस समय पटना जिले में 460 कार्यपालक सहायक बहाल किये गये हैं। इनकी नियुक्ति न्यूनतम योग्यता मैट्रिक पास पर की गयी है। सभी से आॅन लाइन साक्षात्कार लिया गया। मजे की बात है कि गरीब बेरोजगारों को ठगा गया है। इनलोगों को ही कार्यालय में काम करने के लिए खुद से डेस्ट टाॅप खरीदकर लाना पड़ा। डेस्ट टाॅप सेट में मोनिटर,सीपीयू,यूपीएस,प्रिंटर और माॅडम भी खरीदना पड़ा। एक कार्यपालक सहायक को 50 हजार रू0से अधिक व्यय करना पड़ा। जो सफल अभ्यर्थी डेस्ट टाॅप नहीं खरीद सके तो उनको बहाल ही नहीं किया गया। सुबह साढ़े नौ बजे से संध्या 6 बजे तक कार्य लिया जाता है।
खैर, कार्यपालक सहायक अप टू डेथ होकर डेस्ट टाॅप के साथ 11 मई 2016 से कार्य शुरू कर दिये। इनलोगों को बिहार प्रशासनिक सुधार, मिशन सोसायटी, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा संविदा पर बहाल किया गया है। इनको प्रतिमाह 11 हजार 345 रू0 मानदेय दिया जाएगा। अभी तक मानदेय नहीं मिला है। जानकार लोगों का कहना है कि बिहार में 2006 से लागू किया गया है कि सफल अभ्यर्थी डेस्ट टाॅप लाएंगे और कार्यालय में काम करेंगे। जो डेस्ट टाॅप सेट नहीं लाएंगे,ऐसे लोगों को बहाल ही नहीं किया जाएगा। भारी रकम व्यय करके सेट खरीदने वाले लोगों को कार्यपालक सहायक पद पर बहाल किया गया। सबसे पहले केवल 7 हजार रू0मानदेय दिया गया। इसके बाद 2 हजार रू0इजाफा करने के बाद 9 हजार रू0 कर दिया गया। अभी 11 हजार 345 रू0 मिल रहा है। वह भी 5 माह से मानदेय नहीं दिया जा रहा है। दूसरों का दुखवा दूर करने के सिलसिले में आवेदन लेने वाले कार्यपालक सहायकों का कहना है कि अल्प मानदेय में जीवन चलाना मुश्किल हो रहा है। डेस्ट टाॅप सेट खरीदने के लिए महाजन से ऋण व्याज पर लिया गया। उसे चुकता करने में परेशानी हो रही है। विभाग के द्वारा मानदेय मिल ही नहीं रहा है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें