शराब नीति में संशोधन राज्यहित एवं जनहित में, सर्वसम्मति से हो पारित : नीतीश - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 30 जुलाई 2016

शराब नीति में संशोधन राज्यहित एवं जनहित में, सर्वसम्मति से हो पारित : नीतीश

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पटना, 29 जुलाई, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी को सामाजिक मुद्दा बताया और कहा कि शराब नीति में नया संशोधन राज्यहित एवं जनहित में है, इसे सर्वसम्मति से विधानमंडल से पारित होना चाहिए। श्री कुमार ने आज यहां विधान मंडल के मॉनसून सत्र के पहले दिन विधान मंडल परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनका मानना है कि जिस तरह से पिछली बार उत्पाद अधिनियम में संशोधन का कानून सर्वसम्मति से पारित हुआ है, उसी तरह से जो नया संशोधन लाया जा रहा है, उसके लिये भी सबकी सहमति मिलनी चाहिये। विधानसभा और विधान परिषद में जो शराबबंदी को सर्वसम्मति से पारित कर संदेश दिया गया, उसका जनमानस पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ा है। मुख्यमंत्री ने शराबबंदी को सामाजिक मुद्दा बताया और कहा कि इसे राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिये, इससे समाज का भला हो रहा है । शराबबंदी से सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद पड़ी है, लोगों के मन में खुशी है और उसको ध्यान में रखकर ही यह कानून लाया गया है। संशोधन होने के बाद जो पुराना 1915 का कानून था, उसमें कतिपय विरोधाभास है, जिसके कारण कई प्रकार की अड़चनें आ रही थी, उन सभी अड़चनों को दूर करने के लिये नये कानून का प्रावधान किया गया है। 


श्री कुमार ने कहा कि शराबबंदी को लेकर पहले और अब के कानून में बुनियादी फर्क है। पहला कानून नियंत्रित 
करने का था लेकिन अब का कानून पाबंदी का है। शराबबंदी का निर्णय लेने के बाद इसके लिए कानून उसी के अनुरूप बनेगा। जहां तक सरकारी कर्मचारी एवं अधिकारी उत्पाद या पुलिस का सवाल है, यदि वे किसी को फंसाने की कोशिश करते पाये जायेंगे तो वैसी स्थिति में संशोधन विधेयक में जो प्रावधान था, नये संशोधन में उससे सजा ज्यादा बढ़ा दी गयी है। राज्य में बाढ़ की स्थिति को लेकर पूछे गये प्रश्न के उत्तर में श्री कुमार ने कहा कि उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया है। पिछले सात दिनों के दौरान नेपाल में करीब एक हजार मि0मी0 वर्षा हुयी है जिस कारण महानंदा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ा है। कई नदियों में तटबंध के अभाव में पानी का फैलाव निचले इलाकों में हुआ है। महानंदा जहां गंगा से मिलती है, वहां तटबंध है जिसे सुदृढ़ किया गया है। बाढ़ से बचाव के लिए पांच चरण में महानंदा पर तटबंध बनाने का सरकार का प्रस्ताव है, उसमें एक फेज पुराने तटबंध का सुदृढ़ीकरण का काम पूरा हो गया है। बाकी का प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पास लंबित है। श्री कुमार ने कहा कि राज्य में बाढ़ग्रस्त इलाकों में करीब बीस लाख से अधिक की आबादी प्रभावित हुई है लेकिन धीरे-धीरे पानी का स्तर घट रहा है। एन0डी0आर0एफ और एस0डी0आर0एफ टीमें बाढ़ग्रस्त इलाकों में लोगों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर लगी हुई है। मुख्य सचिव के स्तर पर भी एवं प्रधान सचिव आपदा प्रबंधन के स्तर से निरंतर निगरानी हो रही है। बिहार में जो बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है, उसका राज्य में होने वाली वर्षा से कोई संबंध नहीं है। नेपाल में यदि अधिक वर्षा होगी तो उसके कारण बिहार की नदियों में उफान होगा और लोग प्रभावित होते हैं। 


मुख्यमंत्री ने स्थानीयता को लेकर पूछे गये प्रश्न पर इसे वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिक बताया और कहा कि देश की जो संवैधानिक व्यवस्था है, उसके अन्तर्गत देश के किसी हिस्से में लोग जाकर सेवा कर सकते हैं, नौकरी कर सकते हैं लेकिन अब धीरे-धीरे एक ऐसी स्थिति आ गयी है कि स्थानीयता का मुद्दा जोर पकड़ रहा है। उन्होंने खुद झारखण्ड में स्थानीयता के मुद्दे का समर्थन किया है। श्री कुमार ने कहा कि बिहार में यदि इस प्रकार का कोई मुद्दा उठता है तो उससे अलग राय रखने का कोई प्रश्न नहीं है। यह एक ऐसा प्रश्न है, जिस पर गहन विचार-विमर्श करके निर्णय लेना चाहिये और इस पर सभी दलों की राय लेकर तथा उनकी सहमति से इस पर निर्णय लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो कुछ भी प्रावधान देश के कानून में है तो केन्द्र सरकार को भी पहल करनी चाहिये। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि देश के सभी जगह के लोगों को किसी भी प्रान्त में जाकर काम करने की इजाजत रहनी चाहिये, साथ-साथ स्थानीय लोगों को प्राथमिकता एवं उनकी हिस्सेदारी तो मिलनी ही चाहिये। खासकर जो राज्य सरकार की सेवायें हैं, उसमें तो मिलनी ही चाहिये। यह एक देशव्यापी मसला है। उल्लेखनीय है कि गुरूवार को महागठबंधन सरकार के अहम सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने बिहार में स्थानीय मूल वासियों के लिये राज्य सरकार की नौकरियों में 80 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने की मांग की थी। 

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