पटना 03 अप्रैल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कहा कि अगले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को दुबारा केंद्र की सत्ता पर काबिज होने से रोकने के लिए मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को महागठबंधन बनाने की पहल करनी चाहिए। श्री कुमार ने यहां सवांददाताओं से कहा कि कांग्रेस ने पंजाब में सरकार बनाई वहीं वह गोवा और मणिपुर में बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि यह अलग बात है कि भाजपा इन दोनों राज्यों में जोड़-तोड़ की बदौलत सरकार बनाने में सफल रही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बड़ी पार्टी है इसलिए विपक्ष को एकजुट करने की सबसे अधिक जिम्मेवारी उसकी है । मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में यदि समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी को प्राप्त मतों को जोड़ दिया जाए तो यह राजग को मिले मतों से 10 प्रतिशत से अधिक होगा। उन्होंने कहा कि जहां विपक्ष में एकता होती है वहां अच्छे परिणाम आते हैं। यदि उत्तर प्रदेश में विपक्ष के बीच एकता होती और तीनों पार्टियों ने महागठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा होता तो उत्तर प्रदेश चुनाव का परिणाम आज कुछ और होता।” श्री कुमार ने कहा कि वह उत्तर प्रदेश में भाजपा को सरकार बनाने से रोकने के लिए बिहार की तर्ज पर महागठबंधन बनाने की लगातार वकालत करते रहे लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। लेकिन, वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को केंद्र में सरकार बनाने से रोकने के लिए कांग्रेस को महागठबंधन बनाने की पहल करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पूर्व महागठबंधन को मूर्त रूप देने के लिए वामदलों भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को अन्य दलों से भी बातचीत करनी चाहिए क्योंकि इस दिशा में वामदलों की अहम भूमिका हो सकती है। श्री कुमार ने उच्चतम न्यायालय के 01 अप्रैल से सभी राजमार्गों के आसपास शराब की दुकानों को बंद करने के फैसले के बारे में पूछे जाने पर कहा कि पूर्ण शराबबंदी लागू करने की दिशा में बिहार ने पूरे देश को रास्ता दिखाया है। उन्होंने कहा कि राजमार्गों पर 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानों को हटाने के उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद यदि राज्य सरकारें राजमार्गों पर खुली हुयी शराब की दुकानों को शहर या गांव में ले जायेगी तो इससे कोई समाधान नहीं होगा बल्कि देश में पूर्ण शराबबंदी लागू करने की पहल होनी चाहिए और जनता इसके समर्थन में है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी और उसके बाद नोटबंदी से बिहार को राजस्व का नुकसान नहीं हुआ है और हमारा राजस्व संग्रह कमोबेश पहले की तरह ही है। उन्होंने कहा कि पहले शराब पर लागू वैट और उत्पाद शुल्क से राज्य को पांच हजार करोड़ रुपये की आमदनी होती थी लेकिन शराबबंदी के बाद आये आंकड़ों से स्पष्ट हो गया है कि सरकार को जितना राजस्व वर्ष 2015-16 में प्राप्त हुआ था उतनी ही आमदनी वर्ष 2016-17 में भी हुई है, अभी इसमें और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू करने के बाद राजस्व में पहली बार कमी जरूर आती है लेकिन लाेगों ने शराब की लत छूटने से हुई 10 हजार करोड़ रुपये की बचत को रेडिमेड वस्त्रों, फर्नीचर एवं अन्य क्षेत्रों में खर्च किया। इससे राजस्व की शुरुआती कमी की भरपाई करने में मदद मिली।
श्री कुमार ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के अवैध बूचड़खानों को बंद करने की कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर कहा, “भाजपा को लोकहित के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि बिहार में अवैध बूचड़खाने न के बराबर हैं। यहां इसके खिलाफ वर्ष 1955 से कानून बना हुआ है। अवैध बूचड़खाने चलाने की अनुमति नहीं है। यह एक अनावश्यक मुद्दा है, जिसे उठाया जा रहा है। सही मुद्दों पर बहस होनी चाहिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में रोजगार की कमी एवं बढ़ रहे कृषि संकट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस होनी चाहिये। उन्होंने कहा कि असल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिये यह सब चलता रहता है लेकिन यह ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि यदि मुद्दा उठाना ही है तो शराबबंदी की उठाई जाये क्योंकि कोई भी धर्म शराब पीने की अनुमति नहीं देता है। श्री कुमार ने कहा कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने लोगों से वादा किया था कि यदि उनकी सरकार बनी तो विदेशों से कालाधान वापस लाकर देश के प्रत्येक गरीब के खाते में 15 लाख रुपये जमा कर दिया जाएगा लेकिन सरकार बने ढाई साल होने के बावजूद इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा, “मैने केंद्र से नोटबंदी की तरह बेनामी संपत्ति जब्त करने की मांग की थी लेकिन यह पता नहीं चल पाया कि अभी तक कितनी बेनामी संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं।”

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