नयी दिल्ली, 14 जून, बढ़ते नगरीकरण के साथ खंडहर में तब्दील हुईं बावड़ियों के संरक्षण के लिए अब एक नयी पहल सामने आई है। भारतीय राष्टीय कला एवं सांस्कृतिक धरोहर टस्ट ईंटैकी शहर की इन बावड़ियों का अब डिजिटीकरण कर रहे हैं। बावड़ीज ऑफ डेल्ही-स्टेपिंग इनटू स्टेप वेल्से नाम की परियोजना में 1210 से 1540 के बीच बनी बावड़ियां शामिल हैं। इंटैक में दिल्ली चैप्टर के संयोजक एस लिडले ने कहा, प्रयास अधिक लोगों तक पहुंचने और उन्हें हमारे शहर की वास्तुशिल्पीय धरोहर के बारे में सूचना उपलब्ध कराने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचकर हम जन जागरूकता उत्पन्न कर रहे हैं जो संरक्षण की दिशा में पहला कदम है। लिडले ने कहा कि शहर में 20 से अधिक बावड़ियां हैं। लोगों में जागरूकता की कमी की वजह से इनमें से अधिकतर बावड़ियों की अनदेखी हुई है।
नयी दिल्ली, 14 जून, बढ़ते नगरीकरण के साथ खंडहर में तब्दील हुईं बावड़ियों के संरक्षण के लिए अब एक नयी पहल सामने आई है। भारतीय राष्टीय कला एवं सांस्कृतिक धरोहर टस्ट ईंटैकी शहर की इन बावड़ियों का अब डिजिटीकरण कर रहे हैं। बावड़ीज ऑफ डेल्ही-स्टेपिंग इनटू स्टेप वेल्से नाम की परियोजना में 1210 से 1540 के बीच बनी बावड़ियां शामिल हैं। इंटैक में दिल्ली चैप्टर के संयोजक एस लिडले ने कहा, प्रयास अधिक लोगों तक पहुंचने और उन्हें हमारे शहर की वास्तुशिल्पीय धरोहर के बारे में सूचना उपलब्ध कराने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचकर हम जन जागरूकता उत्पन्न कर रहे हैं जो संरक्षण की दिशा में पहला कदम है। लिडले ने कहा कि शहर में 20 से अधिक बावड़ियां हैं। लोगों में जागरूकता की कमी की वजह से इनमें से अधिकतर बावड़ियों की अनदेखी हुई है।
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