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सोमवार, 10 जुलाई 2017

कर नही देना किसी व्यवसाय का मौलिक अधिकार,यह नही चल सकता : जेटली

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रायपुर 09 जुलाई, केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी)का विरोध करने वाले कुछ व्यवसायों से जुड़े लोगो को आड़े हाथों लेते हुए आज कहा कि..कोई कर नही देगा यह उसका मौलिक अधिकार हैं,यह 2017 में नही चल सकता..। श्री जेटली ने यहां छत्तीसगढ़ के वाणिज्यक कर(जीएसटी)विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए खासकर कपड़ा व्यवसाय का नाम लिए बगैर उसकी ओर इशारा करते हुए कहा कि..वह फाइवर और यार्न पर जो कर देंगे इसका उन्हे इनपुट पर क्रेडिट मिलेगा तो लगने वाला कर लगभग नही के बराबर होगा..।पहले की व्यवस्था में कुछ लोग कर नही देते थे,इसलिए वह उनका मौलिक अधिकार है,वह मौजूदा व्यवस्था में नही चल सकता। उन्होने सर्राफा व्यवसाय का जिक्र करते हुए कहा कि उन पर एक प्रतिशत कर लगाने की वित्त मंत्री रहते प्रणव दा,चिदम्बरम जी ने कोशिश की लेकिन उऩ्हे वापस लेना पड़ा लेकिन वह कड़े विरोध के बाद भी पीछे नही हटे,आज वहीं सर्राफा व्यवसायी जीएसटी में तीन प्रतिशत कर लगने पर भी कोई विरोध नही कर रहे है।उन्होने कहा कि..कर तो आपको उपभोक्ता से लेना है जब वह विरोध नही कर रहा तो फिर आपके विरोध का क्या मायने है..। जीएसटी को आर्थिक रूप से देश के एकीकरण का कदम बताते हुए उन्होने कहा कि सरदार पटेल ने आजादी के बाद 550 रजवाड़ों को कई तरह की कोशिशे कर देश का एकीकरण जरूर कर दिया था लेकिन उसे 70 वर्षों बाद जीएसटी आर्थिक रूप से एकीकृत करेगी।उन्होने कहा कि अब तक चल रही व्यवस्था के सफल होने की कतई संभावना नही थी।जीएसटी से निर्माता,विक्रेता और देश सभी को लाभ होगा। 

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