अपना भविष्य और बच्चों का वर्तमान निर्माण करने में लगी हैं जयश्री - Live Aaryaavart

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शनिवार, 16 सितंबर 2017

अपना भविष्य और बच्चों का वर्तमान निर्माण करने में लगी हैं जयश्री

  • नो ग्रांट्स टीचरों के बारे में सीएम सोचे, बंधुआ मजदूरों से भी बदतर जिंदगी जीने को बाध्य हैं टीचर

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लातूर। महाराष्ट्र में लातूर है। यहां उदगीर गांव में रहती हैं हाई स्कूल की टीचर जयश्री जाधव। जो 4 साल से बच्चों को पढ़ाती हैं। पढ़ाने के एवज में फुट्टी कौड़ी भी नहीं मिलती है। बस एक उम्मीद से पढ़ा रही हैं कि दिन नन ग्रांट्स टीचर को सरकार ग्रांट्स देना शुरू कर देगी। 'कौन बनेगा करोड़पति' के हॉट सीट पर बैठी हैं हाई स्कूल की टीचर जयश्री जाधव। द्यर से हाई स्कूल की दूरी है 45 किलोमीटर। इसके कारण रोजाना 90 किलोमीटर तय करती हैं। दोनों तरफ का भाड़ा 105 रू.देना पड़ता है। 4 साल से पढ़ा रही हैं मगर एक पैसा नहीं मिलता है। यह सुनकर बिग बी अमिताभ बच्चन परेशान हो उठते हैं। आखिर परिवार कैसे चलता है। तब जयश्री कहती हैं कि मेरे पतिदेव रामराज जाधव भी शिक्षक हैं। उनकी सालरी से चलता है। पति रामराज जाधव कहते हैं कि नो ग्रांट्स टीचर के रूप में कार्य करने के बाद वेतन मिलना शुरू है। बिग बी जयश्री के पिता पांडुराम जाधव से बातचीत करते हैं। जयश्री के पिता कहते हैं कि हमलोग पढ़े लिखे नहीं हैं। 


गांवद्यर के विपरित परिस्थियों में बेटी को   10 वीं कक्षा तक पढ़ाये। इसके बाद अच्छा परिवार और लड़ना मिलने पर शादी कर दिये। ससुराल में जाकर 12 वीं कक्षा उर्तीण की हैं। यह पूछने पर वेतन नहीं मिलता है तब भी जयश्री पढ़ा रही हैं। महाराष्ट्र में बेरोजगारी अधिक है और प्रतियोगिता भी है। सरकार ने शिक्षा विभाग को ग्रांट्स देना बंद कर दी है। इसके आलोक में 2012 से नियुक्ति बंद है। ग्रांट्स आने पर वेतन के 20 प्रतिशत दिया जाता है। इसी तरह हरेक साल 20 प्रतिशत बढ़ाते-बढ़ाते 10 साल के बाद पूर्ण वेतन मिलता है। तबतक भविष्य की उम्मीद पर बच्चों का भविष्य उज्जवल किया जाता है। बातों-बातों में जयश्री जाधव 6 लाख 40 हजार रू.जीत जाती है। एक सवाल का जवाब नहीं दें सकने के गेम को छोड़ चली गयी।
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