सरकार ने गैस कीमत बढ़ायी, सीएनजी, पाइप वाली रसोई गैस होगी महंगी - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 30 मार्च 2018

सरकार ने गैस कीमत बढ़ायी, सीएनजी, पाइप वाली रसोई गैस होगी महंगी

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नयी दिल्ली, 29 मार्च, सरकार ने प्राकृतिक गैस कीदर में छह प्रतिशत की वृद्धि की है और इसके साथ यह दो साल में उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी है। इससे सीएनजी तथा रसोई गैस के भाव ऊंचे होंगे। पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ की तरफ से जारी अधिसूचना के अनुसार घरेलू फील्ड से उत्पादित अधिकांश प्राकृतिक गैस की कीमत एक अप्रैल से3.06 डालर प्रति इकाई (प्रति10 लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट) होगी। यह वृद्धि एक अप्रैल से छह महीने के लिये की गयी है। अभी यह2.89 डालर है। अमेरिका, रूस और कनाडा जैसे गैस अधशिष वाले देशों में औसत दरों के आधार पर प्राकृतिक गैस की कीमत हर छह महीने बाद निर्धारित की जाती है। भारत अपनी कुल जरूरत का करीब आधा हिस्सा आयात करता है। आयातित गैस की कीमत घरेलू दर के मुकाबले दोगुने से अधिक होती है। यह लगातार दूसरा मौका है जब गैस के दाम बढ़ाये गये हैं। इससे अप्रैल्- सितंबर2016 के बाद गैस की दर उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी है। उस समय इतनी ही कीमत घरेलू उत्पादकों को दी जाती थी। गैस कीमत में वृद्धि से आयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन( ओएनजीसी) तथा रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी उत्पादक कंपनियों की आय में बढ़ोतरी होगी। साथ ही इससे सीएनजी और पाइप के जरिये घरों में पहुंचने वाली रसोई गैस महंगी होगी। इसका कारण इसमें प्राकृतिक गैस का उपयोग कच्चे माल के रूप में किया जाता है। इससे यूरिया तथा बिजली उत्पादन की लागत भी बढ़ेगी। साथ ही गहरे पानी, उच्च तापमान जैसे कठिन क्षेत्रों में नये फील्डों से उत्पादित गैस की कीमत सीमा अप्रैल- अक्तूबर2018 के लिये बढ़ाकर6.78 डालर प्रतिइकाई कर दिया गया है। फिलहाल यह6.30 डालर प्रति10 लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट है। इस वृद्धि से घरेलू गैस आधारित बिजली उत्पादनकी लागत करीब3 प्रतिशत बढ़ेगी। साथ ही इससे सीएनजी तथा पाइप के जरिये घरों में पहुंचने वाली रसोई गैस की कीमत क्रमश: 50-55 पैसे तथा35-40 पैसे प्रति घन मीटर बढ़ेगी। इससे पहले, अक्तूबर2017- मार्च2018 की अवधि के लिये गैस कीमत बढ़ाकर2.89 डालर प्रति10 लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट कर दिया गया था। इससे पहले यह2.48 डालर प्रति इकाई थी। इस बारे में इक्रा ने कहा, ‘‘ यह बढ़ोतरी उम्मीद के अनुरूप है। इससे गैस उत्पादकों को कुछ राहत मिलेगी।’’ 
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