बिहार सरकार की उपलब्धि हवा-हवाई - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 5 अप्रैल 2018

बिहार सरकार की उपलब्धि हवा-हवाई

  • * दानापुर अनुमंलडीय अस्पताल में अल्ट्रासांउड स्कैनिंग मनमौजी
  • * अल्ट्रासांउड बाहर करवाने से ई.डी.डी. 2 अप्रैल 2018 को
  • * दानापुर अनुमंडल अस्पताल में अल्ट्रासांउड करवाने से ई.डी.डी. 12 मई 2018
  • * 40 दिनों के अंतर होने पर तब डाक्टर रूपम को विश्वास ही नहीं होता है

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दानापुर. बिहार सरकार व स्वास्थ्य विभाग के द्वारा सुरक्षित प्रसव कराने के लिये महिलाओं को प्रोत्साहित किया जाता है. आशा बहनों के सहयोग से उनको प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र,रेफर हॉस्पिटल,अनुमंडलीय अस्पताल और सरकारी अस्पतालों में भेजा जाता है. एम्बुलेंश की भी व्यवस्था है.जच्चा-बच्चा को पोषाहार के लिये राशि दी जाती है. दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल में अल्ट्रासांउड स्कैनिंग खराब होने से बिहार सरकार की उपलब्धि हवा हवाई होने लगी है. एक व्यक्ति परेशान हैं अपनी  गर्भवती पत्नी को लेकर. वह प्रथम बार माँ बनने वाली हैं. दोनों यानी पति-पत्नी स्वस्थ बच्चे चाहते हैं. पर उसे मालूम नहीं है कि कब अंतिम बार माहवारी हुई थी ? प्रथम बार माँ और बाप बनने की खुशी व स्वस्थ बच्चे की चाहत ने दोनों को धरती के भगवान के द्वार पहुंचा दिये. शुरूआती  चरण की जांच करवाने  लेडी डाक्टर के पास पहुंचे.डाक्टर साहब ने गर्भवती महिला से पूछा कि अंतिम माहवारी कब हुई? हां उसे लास्ट मंथली पीरियड की तिथि (एलएमपी) मालूम नहीं है. तो डाक्टर साहब ने अल्ट्रा सोनोग्राफी  करवाने की सलाह दी. 600 रू. करके अल्ट्रासांउड करवाने से पता चला कि गर्भवस्त शिशु स्वस्थ है. प्रसव की  संभावित तिथि (ई.डी.डी.) 2 अप्रैल 2018 है.डाक्टर साहब ने छह माह के बाद भी अल्ट्रासांउड कराया. सब सामान्य ही था.

आज मंद्धिम दर्द होने लगा. संभावित तिथि  2 अप्रैल के 3 दिनों के बाद प्रसव नहीं होने पर चल पड़े दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल.दो रूपये देकर पर्चा बना लिया. इसके बाद दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल में पदस्थापित डाक्टर रूपम के कक्ष में गर्भवती को दिखाया गया. डाक्टर रूपम ने बाहर से किया गया अल्टासांउड पर यकीन नहीं. तब उन्होंने अपने अनुमंडलीय अस्पताल में अल्ट्रासांउड करा लेने को कहा. कुछ समय के बाद परिजन अल्टासांउड लेकर आये. अल्ट्रासांउड देखकर   डाक्टर साहिबा परेशान हो गयी. यहां तो प्रसव की संभावित तिथि 12 मई 2018 दिखा दिया. 40 दिनों के अंतर होने पर तब डाक्टर रूपम को कहना पड़ गया कि अनुमंडल अस्पताल के अल्ट्रा सोनोग्राफी पर विश्वास नहीं है. इसके बाद बड़बोल डाक्टर साहब ने हमदर्दी दिखाते गर्भवती महिला के पति को मोबाइल नम्बर दे दी.जब भी प्रसव पीड़ा हो तो फोन करें. अस्पताल में ही मंद्धिम दर्द सहने वाली को ऑर्ब्जवेशन वार्ड में भरती नहीं. सवाल है कि क्या आज 5 अप्रैल 2018 को ही डाक्टर रूपम को पता चला कि अल्ट्रासांउड स्कैंनिग अविश्वसनीय है? इसकी जांच होनी चाहिये. 

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