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रविवार, 1 अप्रैल 2018

विचार : कश्मीर को कश्मीरी भाषा में कशीर तथा इस भाषा को काशुर कहते हैं

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कश्मीर को कश्मीरी भाषा में कशीर तथा इस भाषा को काशुर कहते हैं. कश्मीर शब्द के कशमीर,  काश्मीर, काशमीर आदि पर्यायवाची भी मिलते हैं. इन में से सवार्धिक प्रचलित शब्द कश्मीर ही है. माना जाता है कि कश्मीर का नाम कश्यप ऋषि के नाम पर पहले तो कश्यपमर या कश्यपपुर पड़ा जिसका अपभ्रंश बाद में कश्मीर हुआ.  सहस्रों वर्ष पूर्व सतीसर नाम से विख्यात यह सारा भूभाग पूर्णतया जलमग्न था जिस में जलदभू नाम का एक विशाल दैत्य रहता था. इस दैत्य ने अखण्ड तपस्या द्वारा ब्रह्मा से तीन वरदान प्राप्त कर लिये थे:जल से अमरत्व,अतुलनीय विक्रम तथा मायाशक्ति की प्राप्ति.यह दैत्य इन वरदानों को प्राप्तकर निरंकुश हो गया था और तत्कालीन जनता को,जो आसपास की पहाड़ियों पर रहती थी, संत्रस्त करने लगा.उस पापी के आतंक से सारा भूभाग एक तरह से जनशून्य हो गया था.  एक बार बह्मापुत्र कश्यप ने इस भू-भाग की यात्रा की. यहां की दुरवस्था का जब उन्होंने लोगों से कारण पूछा तो उन्होंने जलद्भू दैत्य का सारा वृत्तान्त सुनाया जिसे सुनकर कश्यप का हृदय दयार्द्र हो उठा.उन्होंने तुरन्त इस भूखण्ड का उद्धार करने का निश्चय कर लिया. वे हरिपुर के निकट नौबन्धन में रहने लगे तथा यहां पर उन्होंने एक सहस्र वर्षों तक महादेव की तपस्या की. महादेव कश्यप की तपस्या से प्रसन्न हो गये तथा उन्होंने जलद्भू दैत्य का अन्त करने की प्रार्थना स्वीकार कर ली. महादेव ने दैत्य का अन्त करने के लिए विष्णु और ब्रह्मा की भी सहायता ली. ऐसा माना जाता है कि विष्णु और दैत्य के बीच सैकंडों वर्षों तक युद्ध चलता रहा.  विष्णु ने जब देखा कि दैत्य जल और पंक में रहकर अपनी रक्षा करता है तो उन्होंने वराहमूला (आधुनिक बारामूला) के समीप जल का निकास कराया.जल के निकलते ही दैत्य दृष्टिगोचर होने लगा.दैत्य को पकड़कर उसका अन्त कर दिया गया.चूंकि यह सत्कार्य कश्यप की कृपा से संपन्न हुआ था इसलिए कशिपसर,कश्यपुर,कश्यपमरआदि नामों से यह घाटी प्रसिद्ध हो गई.  एक अन्य मत के अनुसार कश्मीर क व समीर के योग से बना है.क का अर्थ है जल और समीर का अर्थ है हवा.जलवायु की श्रेष्ठता के कारण यह घाटी कसमीर कहलायी और बाद में कसमीर से कश्मीर शब्द बन गया.एक अन्य विद्वान के अनुसार कश्मीर कस और मीर शब्दों के योग से बना है.कस का अर्थ है स्रोत तथा मीर का अर्थ है पर्वत. चूंकि यह घाटी चारों ओर से पर्वतों से घिरी हुई है तथा यहां स्रोतों की अधिकता है, इसलिए इसका नाम कश्मीर पड़ गया.उक्त सभी मतों में से कश्यप ऋषि से सम्बन्धित मत अधिक समीचीन एवं व्यावहारिक लगता है.  
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