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शनिवार, 26 मई 2018

निपाह वायरस से मरने वालों की संख्या 12 हुई, बढ़ रही है संख्या

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कोझिकोड , 26 मई, केरल में निपाह वायरस के कारण आज एक और व्यक्ति की मौत हो गई जिसके साथ ही इस घातक वायरस के प्रकोप के चलते मरने वालों की संख्या 12 तक पहुंच गई।  आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 75 वर्षीय कल्याणी का यहां के मेडिकल कॉलेज में 16 मई से इलाज चल रहा था। दो दिन पहले इस विषाणु के संक्रमण के कारण 61 वर्षीय वी मूसा की मौत हो गई थी। उनके परिवार के दो लोगों की मौत भी इसी वायरस के कारण हुई थी।  उनके बड़े बेटे की भी मौत हो गई लेकिन उसके नमूनों की जांच नहीं हुई।  पेराम्बरा तालुक अस्पताल में मूसा के प्रभावित परिवार का शुरुआती इलाज करने वाली नर्स लिनी पुथुसेरी की मौत भी इस संक्रमण के चपेट में आने के कारण हुई थी।  स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि करीब 160 नमूनों को जांच के लिए पुणे के राष्‍ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनवीआई) भेजा गया जिसमें 15 मामलों में संक्रमण की पुष्टि हुई है।  इन 15 मामलों में से अब तक 12 की मौत हो चुकी है।  कीड़े खाने वाले चमगादड़ों के नमूनों की जांच निगेटिव आने पर निपाह वायरस से प्रभावित क्षेत्र पेराम्बरा के निकट फल खाने वाले चमगादड़ों के नमूने एकत्रित किये जा रहे हैं और इन्हें परीक्षण के लिए भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान (एनआईएचएसएडी) भेजा जायेगा। पशुपालन विभाग के निदेशक डा.एन एन सासी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि राष्‍ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी), पुणे और पशुपालन तथा वन विभाग के विशेषज्ञों ने नमूनों को इकट्ठा करना शुरू कर दिया है जो एनआईएचएसएडी को भेजे जाएंगे जहां फल खाने वाले इन चमगादड़ों में विषाणु की मौजूदगी की जांच की जाएगी।  उन्होंने बताया कि मूसा परिवार के एक अप्रयुक्त कुएं से कीड़े-मकौड़े खाने वाले तीन चमगादड़ों को पकड़ा गया था और उनके नमूने प्रभावित क्षेत्र के पांच किलोमीटर के घेरे में आने वाले सूअरों, बकरियों और मवेशियों के नमूनों के साथ भोपाल प्रयोगशाला भेजे गये थे और इन सभी के परीक्षण नेगेटिव आये हैं। सासी ने कहा,‘‘ हम अब पेराम्बरा क्षेत्र से फल खाने वाले चमगादड़ों को पकड़ने का प्रयास कर रहे हैं।’’  अधिकारी के मुताबिक चमगादड़ों के पेशाब, मल और स्राव को भी जांच के लिए भेजा जाएगा।  केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के परामर्श में कहा गया है कि आमतौर पर चमगादड़ों, सूअरों, कुत्तों और घोड़ों को प्रभावित करने वाला यह वायरस मनुष्यों में भी फैल सकता है और गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। मनुष्यों में यह वायरस निपाह से प्रभावित लोगों, संक्रमित चमगादड़ और सूअरों के संपर्क में आने के कारण फैल सकता है। इस बीच केरल सरकार ने कहा कि यात्रियों को केवल कोझिकोड और मलप्पुरम जिलों में जाने से बचना चाहिए। 
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