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रविवार, 10 जून 2018

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर प्राचीन भारतीय ज्ञान के बारे में जागरूकता फैलाएगी NCERT

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नयी दिल्ली, 10 जून, आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के आधार के सृजन एवं सुदृढ़ीकरण में प्राचीन भारतीयों द्वारा खोजे गए अनेक सिद्धांतों और तकनीकों के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महत्व पर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कर रही है । राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के एक अधिकारी ने  बताया कि ‘‘भारतीय ज्ञान : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी’’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन नयी दिल्ली में 17 से 19 जुलाई को किया जा रहा है।  उन्होंने कहा कि इसमें विभिन्न विद्यार्थी, शिक्षाविद, शोधकर्ता और नीति निर्माता प्रस्तुतीकरण दे सकते हैं। इसमें शिक्षा के विभिन्न पक्षकारों से लेख एवं शोधपत्र भी आमंत्रित किये गए हैं।  अधिकारी ने बताया कि प्राचीन भारतीयों द्वारा खोजे गए अनेक सिद्धांतों और तकनीकों ने आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के आधार का सृजन किया और उसे मजबूत बनाया है। इस क्षेत्र के शोधकर्ता न केवल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अनेक अज्ञात प्रश्नों एवं तथ्यों से पर्दा उठा सकते हैं बल्कि ऐसे साक्ष्य भी प्रस्तुत कर वैज्ञानिक परिकल्पना को भी सुदृढ़ बना सकते हैं ।  भारतीय ज्ञान : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य विज्ञान, गणित और प्रौद्योगिकी में साक्ष्य आधारित प्राचीन भारतीय ज्ञान के बारे में जागरूकता पैदा करना तथा विज्ञान, गणित एवं प्रौद्योगिकी के बारे में प्राचीन ज्ञान पर विचारों के आदान प्रदान के लिये अवसर प्रदान करना है। 

एनसीईआरटी का इस बात पर जोर रहा है कि विद्यालय शिक्षा एवं उच्चतर शिक्षा में प्राचीन ज्ञान एवं आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के परिप्रेक्ष्यों के बीच कड़ियों को समझकर प्राचीन भारतीय ज्ञान पर विचारों के सतत आदान प्रदान के लिये देशभर के इतिहासकारों, शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों का नेटवर्क बनाना चाहिए । इस सम्मेलन के दौरान तीन महत्वपूर्ण विषयों पर विचारों का मंथन होगा। इनमें प्राचीन भारतीय पाठों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक ज्ञान के पुनर्मूल्यांकन, पुन: खोज एवं पुनर्मान्यकरण के लिये वर्तमान पहल तथा प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक ज्ञान तथा उनके समकालीन अनुप्रयोग शामिल हैं ।  भारत में प्राचीन काल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यापक उच्च ज्ञान विद्यमान था। यह प्राचीन स्मारकों की वास्तुकला, खगोलीय गणनाओं आदि से और भी स्पष्ट दिखाई देता है तथा पूरे महाद्वीप में संस्कृत और अन्य भाषाओं में विभिन्न पुरातन धर्मग्रंथों में समृद्ध साहित्य उपलब्ध है । हालांकि इसे जोड़ने और वैज्ञानिकता के साथ इसे प्रस्तुत करना एक चुनौती है।  वर्तमान तारीकों और तकनीकों का प्रयोग करते करते हुए प्राचीन भारतीय ज्ञान के पुनर्मान्यकरण से महत्वपूर्ण परन्तु गुप्त तथ्यों का पता चल सकता है जो कि विज्ञान, गणित और प्रौद्योगिकी के विकास में आधुनिक परिप्रेक्ष्य में उपयोगी हो सकते हैं । 

प्राचीन भारतीयों द्वारा खोजे गए अनेक सिद्धांत और तकनीकों ने आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के आधार का सृजन किया और उसे मजबूत बनाया है। इस क्षेत्र के शोधकर्ता न केवल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अनेक अज्ञात प्रश्नों एवं तथ्यों से पर्दा उठा सकते हैं बल्कि ऐसे साक्ष्य प्रस्तुत कर वैज्ञानिक परिकल्पना को भी सुदृढ़ बना सकते हैं ।  इस सम्मेलन के दौरान इन्हीं कारकों को ध्यान में रखते हुए गणितीय विज्ञान, भौतिकी विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, आयुर्वेद, औषध शास्त्र, कृषि एवं सिंचाई, कला एवं वास्तुकला, परिवहन, नौवहन, संचार धातु विज्ञान आदि पर प्राचीन ज्ञान को साक्ष्य एवं तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत किया जायेगा ।
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