बिहार : मंजू वर्मा ने इस्तीफा दे कहा, 'रसूखदारों को बचाने की साजिश' - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 9 अगस्त 2018

बिहार : मंजू वर्मा ने इस्तीफा दे कहा, 'रसूखदारों को बचाने की साजिश'

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पटना, 8 अगस्त, बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय गृह में लड़कियों के यौनाचार मामले में विपक्षियों के निशाने पर रही बिहार की समाज कल्याण विभाग मंत्री मंजू वर्मा ने बुधवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने के बाद मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें 'टारगेट' किया गया। उन्होंने बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर आरोप लगाते हुए कहा कि कई रसूखदारों को बचाने के लिए उन्होंने मुझे निशाना बनाया। विपक्ष मंत्री के पति चंद्रेश्वर वर्मा से मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर से मधुर संबंध होने का आरोप लगाकर लगातार मंत्री से इस्तीफे की मांग कर रहा था। मंत्री मंजू वर्मा बुधवार को दोपहर के बाद मुख्यमंत्री आवास पहुंची और अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सौंप दिया। इस्तीफा देने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने अपने पति का बचाव करते हुए कहा, "मेरे पति निर्दोष हैं और जांच के बाद भी निर्दोष साबित होंगे।" उन्होंने खुद को राजनीतिक और सामाजिक व्यक्ति बताते हुए कहा, "किसी से बातचीत के आधार पर किसी को गलत नहीं ठहराया जा सकता। कई लोगों के फोन आते हैं और सभी का फोन रिसीव करती हूं। ब्रजेश ठाकुर से कई लोगों की बात होती होगी, सभी के नाम सार्वजनिक होने चाहिए और उन्हें भी दोषी मानना चाहिए।" मंत्री ने हालांकि यह भी कहा कि मामले की जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई द्वारा हो रही है और जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

इससे पूर्व मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय गृह में यौनाचार के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने मुजफ्फरपुर अदालत परिसर में पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में कहा था कि उसका मंत्री के पति से व्यावहारिक संबंध है। माना जा रहा है कि ब्रजेश ठाकुर के इस बयान के बाद मंजू वर्मा पर इस्तीफे का दबाव और बढ़ गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी सोमवार को कहा था कि इस मामले में जो भी दोषी पाए जाएंगे उन पर कार्रवाई की जाएगी। सेवा संकल्प एवं विकास समिति' द्वारा संचालित मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय गृह में करवाए गए सोशल आॅडिट में लड़कियों के यौन उत्पीड़न की बात कही गई थी। बाद में मेडिकल परीक्षण में 34 लड़कियों से दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। बिहार समाज कल्याण विभाग ने मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) की ओर से बिहार के सभी आश्रय गृहों का सर्वेक्षण करवाया था, जिसमें यौन शोषण का मामला सामने आया था। इस सोशल ऑडिट के आधार पर मुजफ्फरपुर महिला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संस्था के संरक्षक ब्रजेश ठाकुर समेत 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। वर्तमान में पूरे मामले की जांच सीबीआई कर रही है।
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