दुमका (अमरेन्द्र सुमन) भगवान शिव की महिमा अपरम्पार है। उनके अनन्य भक्तों की आस्था भी अनूठी है, तभी तो श्रावणी मेले में पहुचने वाले श्रद्धालुओं में अलग-अलग रूप व अलग-अलग तरह की भक्ति देखने को मिलती है। कोई श्रद्धालु वजनी कांवर लेकर बाबा के दरबार पहुँचता है तो कोई दंडवत ही इस कठिन यात्रा को पूरी करता हैं। सैकड़ो श्रद्धालु भक्त ऐसे हैं जो श्रावणी मेला के पावन महीने के प्रत्येक सोमवार को बाबा पर जलार्पण करने फौजदारी बाबा के दरबार पहुँचते हैं। ऐसी इनकी आस्था कि पैर में छाले पड़ जाने के बाद भी कदम रुकते नहीं। धनबाद के रहने वाले सौरभ, बमबम सिंह, धीरज कुमार, सुशील व मनीष श्रावणी माह में प्रत्येक सोमवार को बाबा पर जलार्पण करने पहुचते हैं। मेला के दौरान बाबा बासुकीनाथ धाम पहुँचने वाले कांवरियों की भक्ति अपने आप में अनूठी व अलौकिक होती है, जो इस कठिन यात्रा को हँसते-खेलते पूरा कर लेते हैं। एक बार की ही कांवर यात्रा जहाँ एक ओर किसी के शरीर को थका देती है वहीं दूसरी ओर धनबाद से फौजदारी बाबा के दरबार में पहुँचने वाले कांवरियों के इस अनोखे दल की भगवान् शिव के प्रति आस्था ही उन्हें ऐसी शक्ति प्रदान करती है कि वे इस कठिन कांवर यात्रा को एक ही सावन में 4-4 मर्तबा पूरा कर लेते हैं। किसी वर्ष श्रावणी माह में 5 सोमवार पड़ने पर 5 बार की कठिन कांवर यात्रा से भी वे नहीं हिचकते। भोले के दरबार में जलार्पण के बाद उनमें असीम आनन्द की अनुभूति होती है।
मंगलवार, 14 अगस्त 2018
दुमका : सोमवार को कांवर यात्रा कर बाबा पर जलार्पण करने वालों को असीम आनन्द की अनुभूति
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