बिहार : भाकपा-माले की 27 सितंबर की रैली की तैयारी अंतिम चरण में. - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 20 सितंबर 2018

बिहार : भाकपा-माले की 27 सितंबर की रैली की तैयारी अंतिम चरण में.

वाम दलों के अलावा राजद को रैली में शामिल होेने का आमंत्रण., भाजपाई फासीवाद के खिलाफ रैली में होगा जनता के आक्रोश की अभिव्यक्ति., विभिन्न तरीकों से रैली का किया जा रहा है प्रचार.
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पटना (आर्यावर्त डेस्क) 20 सितंबर 2018 भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि 27 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में आयोजित ‘‘भाजपा भगाओ-लोकतंत्र बचाओ, भगत सिंह-अंबेदकर के सपनों का भारत बनाओ’’ के नारे के साथ हमारी पार्टी की राज्यस्तरीय रैली की तैयारी अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है. पूरे बिहार में रैली का प्रचार-प्रसार तेज हो गया है. गांव-गांव में बैठकों का आयोजन करके लोगों को पटना लाने के लिए गोलबंद किया जा रहा है. हमारी यह रैली पिछली तमाम रैलियों का रिकार्ड तोड़ेगी. उन्होंने कहा कि वाम दलों क्रमशः सीपीआई, सीपीआईएम, एसयूसीआईसी, आरएसपी व अखिल हिंद फारवर्ड ब्लाॅक के राज्य सचिवों को रैली में शामिल होने का आमंत्रण भेजा जा रहा है. साथ ही, इस बार राष्ट्रीय जनता दल को भी हमने अपनी रैली में आमंत्रित किया है. यह रैली फासीवादी भाजपा के खिलाफ जनसंघर्षों को नई गति देने वाले सिद्ध होगी और इसी के साथ केंद्र की नरेन्द मोदी सरकार की उलटी गिनती भी शुरू हो जाएगी.उन्होंने कहा कि यह रैली ऐसे वक्त में हो रही है जब फासीवादी शासन के हर जोर-जुल्म के खिलाफ व्यापक जनता आज सड़कों पर है. आज जब भारतीय मार्का फासीवाद देश को साम्प्रदायिक आधार पर विभाजित करने तथा समाज पर मनुवादी - पितृसत्तात्मक वर्चस्व को स्थापित करने की जी तोड़ कोशिशें कर रहा है, तो ऐसे ही चुनौतीपूर्ण समय में हमारी पार्टी आगामी 27 सिंतबर को शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जन्म दिवस की पूर्व संध्या पर यह रैली कर रही है. हमें उम्मीद है कि रैली में समाज के विभिन्न तबकों व संघर्षशील ताकतों की एकता दिखेगी.

रैली का प्रचार-प्रसार हुआ तेज
27 सितंबर की रैली का प्रचार-प्रसार तेज हो गया है. 20 सितंबर से लेकर 25 सितंबर तक पूरे बिहार में मोटसाइकिल जुलूस, साइकिल मार्च, पदयात्रा, ग्रामीण बैठकें आदि के जरिए लोगों को पटना लाने के गोलबंद किया जा रहा है. रैली तैयारी को लेकर पटना जिले के विभिन्न प्रखंडों में आज इस तरह की यात्राएं निकाली गईं. नौबतपुर, पुनपुन, धनरूआ, फतुहा, बिहटा, मसौढ़ी, पालीगंज आदि प्रखंड केंद्रों पर जुलूसों का आयोजन किया गया और भाजपा को भगाने का संकल्प लिया गया. पटना शहर में रैली के प्रचार के सिलसिले में कंकड़बाग में निर्माण मजदूरों की बैठक हुई जिसमें सैकड़ों निर्माण मजदूरों ने भाग लिया. दीघा में गंगा किनारे बसे डोपड़ी पट्टी में गरीबों की बैठक हुई. बेउर मुशहरी, पटना सिटी, बांकीपुर आदि इलाकों में शहरी गरीबों के बीच बैठकें आयोजित की गईं.
रैली में छात्र-नौजवानों, आंगनबाड़ी-आशा कार्यकर्ताओं और समाज के अन्य कामकाजी हिस्से के बड़ी संख्या में शामिल होने की उम्मीद है.  

सोशल मीडिया से किया जा रहा है प्रचार
27 सितंबर की रैली का सोशल मीडिया पर भी प्रचार-प्रसार तेज हो गया है. रैली का एक फेसबुक पेज बनाया गया है, जिसपर पूरे बिहार की हर दिन की खबरें अपलोड की जा रही हैं. ट्विटर और व्हाट्सएप के जरिए रैली का संदेश और उसमें शामिल होने का आमंत्रण ज्यादा से ज्यादा लोगों को भेजा जा रहा है. रैली के नारों से संबंधित कई प्रकार के पोस्टर बनाए गए हैं. भाजपा भगाओ - लोकतंत्र बचाओ, भगत सिंह - अंबेदकर के सपनों का भारत बनाओ; जन-जन का है एक नारा, आजादी-बराबरी-भाईचारा; राफेल चोर गद्दी छोड़; बालिका गृह कांड के जिम्मेवार नीतीश-मोदी इस्तीफा दो; रुपया भी अब करे पुकार, मोदी हटाओ मुझे बचाओ, सामाजिक न्याय के तीन आधार - शिक्षा रोजगार भूमि सुधार आदि नारों से संबंधित बड़ी संख्या में पोस्टर बनाकर उन्हें फेसबुक, ट्विटर व अन्य सोशल मीडिया के चैनल पर डाला जा रहा है.

रैली के गानों ने मचा रखी है धूम
रैली को लेकर कई गानों का निर्माण किया गया है. संतोष झा लिखित - भगे भाजपा तो बचे लोकतंतर...संतोष सहर लिखित-गांधी मैदनवा, गांधी मैदनवा, 27 सितंबर रैली माले के ऐलनवा; जनकवि निर्माही रचित - जबसे देशवा में आइल फासीवादी सरकार..आदि गाने गांव-गांव में बज रहे हैं. इन गीतों के जरिए मोदी सरकार के फासीवादी चरित्र और पिछले साढ़े चार सालों में जनता से की गई वादाखिलाफी का भंडाफोड़ किया गया है. इन गीतों के अलावा जगह-जगह स्थानीय साथी भी रैली के गीत बना रहे हैं और प्रचार के दौरान उसके जरिए लोगों को पटना चलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
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