दुमका : हिन्दी आत्मा, कामना व अनुभूति की भाषा : डॉ० रामवरण चौधरी - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

मंगलवार, 18 सितंबर 2018

दुमका : हिन्दी आत्मा, कामना व अनुभूति की भाषा : डॉ० रामवरण चौधरी

hindi-heart-language-ram-varan-chahuudhry
दुमका (अमरेन्द्र सुमन) राजभाषा हिन्दी सप्ताह पर सतीश स्मृति मंच के तत्वावधान में  क्वार्टर पाड़ा स्थित सतीश चौरा में  हिन्दी: दशा एवं दिशा पर परिचर्चा व  काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम  की अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत्त व्याख्याता डॉ रामवरण चौधरी ने हिन्दी की महत्ता को दर्शाते हुए कहा कि  हिन्दी आत्मा की भाषा है।  हिन्दी को कामना व अनुभूति की भाषा बताते हुए इसे कल्पवृक्ष कहा। उन्होंने कहा  इस कल्पवृक्ष को बचाये रखना आज की एक बड़ी  जरूरत है।  मंच के पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि निशब्दता में भी सतीश चौरा से  गूंज सुनाई पड़ रही है। पूर्व विधायक सह गीतकार कमलाकांत प्रसाद सिन्हा ने हिन्दी को प्रचारित-प्रसारित करने में सिनेमा जगत के योगदान की सराहना की। राजीव नयन तिवारी ने  सरकारी कार्यालय, न्यायालयों में  हिन्दी के अधिक से अधिक  प्रयोग पर  बल दिया।   अंजनी शरण ने रग-रग में हिन्दी व हिन्दी  के संस्कार  को बचाए रखने की जरूरत की बतलायी। अरूण सिन्हा ने  कहा हमें पहले घर में दीया जलाना चाहिए फिर मंदिर में।  स्वस्थ्य परिचर्चा ही हिन्दी की सच्ची सेवा होगी इसलिए शुरुआत घर से की जानी चाहिए ।विधापति झा ने  विभिन्न लोकभाषा को छोटी नदी एवं हिन्दी को गंगा से संज्ञायित करते हुए कहा हिन्दी आज भी अविरल, निश्चल बह रही है। बस भाषा के प्रति सम्मान बनी रहनी चाहिए। कविता सत्र की शुरुआत अशोक सिंह ने अपनी प्रकाशित कविता संग्रह "कई-कई बार होता है प्रेम"से 'कभी न आने वाली ट्रेन की प्रतीक्षा में'एवं 'हमारे जाने के बाद भी उन दोस्तों के लिये जो करीब रहकर भी दूर रहे'भी प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।मनोज घोष एवं ऋतुराज कश्यप की हिन्दी को समर्पित कविता ने भी शमां बांधी।  इसके पूर्व कवि, पत्रकार अमरेंद्र सुमन ने मंच संचालन करते हुए हिन्दी भाषा के विस्तार पर विस्तृत प्रकाश डाला एवं ऐसे कार्यक्रमो को समय-समय पर आयोजित करने पर बल दिया। कार्यक्रम में शहर के कई गणमान्य व्यक्तियों  सहित सहजानन्द राय, मनोज प्रसाद, पवन कुमार झा, चम्पा देवी, अर्णव वत्स आदि की उपस्थिति सराहनीय रही।
एक टिप्पणी भेजें