बिहार : आशा के मासिक मानदेय को नकारना मोदी सरकार की नाइंसाफी : शशि यादव - Live Aaryaavart

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बुधवार, 12 सितंबर 2018

बिहार : आशा के मासिक मानदेय को नकारना मोदी सरकार की नाइंसाफी : शशि यादव

बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ मासिक मानदेय को लेकर आंदोलन तेज करेगा
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पटना,12 सितम्बर। कल प्रधानमंत्री ने देश की आगंबाड़ी सेविका-सहायिकाओं और ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशा को सम्बोधित करते हुए जो घोषणा की उससे आशाओं को निराशा हाथ लगी है।24 घन्टे और सातो दिन जनता के बीच कार्यरत देश की आशाओं को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री हमे लंबित मांग मासिक मानदेय देंगे।प्रधानमंत्री ने आशाओं की न्यायोचित मांग मासिक मानदेय पर चुप्पी साध ली और संस्थागत प्रसव के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि मे वृद्धि करने की घोषणा की जो पूर्व से ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एजेंडा पर था। बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ सम्बद्ध गोप गुट की राज्य अध्यक्ष शशि यादव ने आज जारी बयान में कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा आशा के साथ जो नाइंसाफी की गई है,इसका खामियाजा राजग सरकार को उठाना होगा।पूरे देश की तकरीबन 10 लाख और बिहार की 85000 आशाएं इसका विरोध कर रही हैं और जल्द ही मासिक मानदेय को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितकालीन हड़ताल संगठित की जाएगी।आशा नेत्री श्रीमती यादव ने कहा कि जल्द ही आशा से सम्बंधित सभी संगठनों की संयुक्त बैठक आहूत की जाएगी।उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नाइंसाफी औऱ राज्य सरकार की उपेक्षा ने आशाओं की स्थिति और बदतर बना दी है।बिना मज़दूरी के आशाओं से दिन रात काम लिया जा रहा है।राज्य सरकार द्वारा गठित चौधरी कमिटी ने भी इन्हें कोई आर्थिक सहायता नही दी है।आगे उन्होंने कहा है कि बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ जल्द ही आंदोलन की घोषणा करेगा।

प्रखंड मुख्यालयों पर पीएम का पुतला दहन 
बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ की राज्य अध्यक्ष सरोज चौबे एवं राज्य सह सचिव सोना देवी ने बयान जारी कर रसोइयो का मानदेय नहीं बढने पर आक्रोश व्यक किया है। संघ का कहना है कि रसोइयो को महज 1250 रूपए मिलते हैं वह भी महज 10 महीने का।रसोइयो का वर्कलोड बढता जा रहा है लेकिन सुविधाओं के नाम उन्हें कभी शौचायय न बनवाने के नाम पर नौकरी से निकाल देने की धमकी दी जाती है तो कभी पंचायत चुनाव लडने पर रोक लगा दी जाती है और अब जब आशा का इंसेन्टिव दोगुना और आंगनवाडी सेविका - सहायिका का मानदेय डेढगुना बढाया गया तो देश की रसोइया जानना चाहती हैं कि रसोइयों को क्यों छोड़ दिया गया? रसोइया ही हैं जिनके चलते विद्यालयों में बच्चों की संख्या बढी। रसोइया लोग सरकार की इस कार्रवाई को अपने साथ हुए विश्वासघात के रूप में देखती हैं और अगर उनका मानदेय नहीं बढाया गया तो इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पडेगा। इसके प्रथम चरण में 14 और 15 सितंबर को विरोध दिवस का आह्वान किया गया है जिसके तहत बिहार के प्रखण्ड मुख्यालयों पर प्रधानमंत्री का पुतला जलाया जाएगा।

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