मुंबई, 11 सितंबर, बंबई उच्च न्यायालय ने 17 वर्षीय बलात्कार पीड़िता की उसके 20 सप्ताह के गर्भ को चिकित्सीय रूप से खत्म करने की याचिका खारिज कर दी है। न्यायामूर्ति ए एस ओका और न्यायामूर्ति एम एस सोनाक की पीठ ने सोमवार को दिए आदेश में यह बात कही। पीठ ने चिकित्सकीय विशेषज्ञों के पैनल के उस सुझाव के बाद यह निर्णय दिया, जिसमें कहा गया था कि गर्भ के आखिरी चरण में होने के कारण इस समय गर्भपात से याचिकाकर्ता की जान को खतरा हो सकता है। चिकित्सकीय पैनल के सुझाव के बावजूद गर्भपात कराने की अनुमति मांगते हुए याचिकाकर्ता ने पिछले सप्ताह अदालत का रुख किया था। उसने दलील दी थी कि गर्भ को बनाए रखने के लिए मजबूर किए जाने से उसके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और इससे उसे और आघात पहुंचेगा। पीठ ने कहा कि पुणे के ससून हॉस्पिटल के चिकित्सकीय बोर्ड के चिकित्सकीय रूप से गर्भ को खत्म करने को जोखिम भरा बताने के बाद, अदालत के लिए एमटीपी की अनुमति देना ‘‘असंभव’’ है। उसने कहा कि ऐसा कोई रिकार्ड भी मौजूद नहीं है कि अदालत छह वरिष्ठ चिकित्सकों की राय को ना माने। याचिका के अनुसार कॉलेज की छात्रा (याचिकाकर्ता) का इस साल मार्च से मई के बीच यौन शोषण किया गया और अब वह 20 सप्ताह की गर्भवती है। एमटीपी अधिनियम के अनुसार एक डॉक्टर से परामर्श के बाद 12 सप्ताह तक के गर्भ को खत्म करने की अनुमति दी जा सकती है।
मंगलवार, 11 सितंबर 2018
बलात्कार पीड़िता की गर्भपात की याचिका खारिज
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