बेगूसराय : संत महावीर किंडंगार्टन शिक्षण संस्थान में बच्चों के द्वारा मनाया गया शिक्षक दिवस। - Live Aaryaavart

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बुधवार, 5 सितंबर 2018

बेगूसराय : संत महावीर किंडंगार्टन शिक्षण संस्थान में बच्चों के द्वारा मनाया गया शिक्षक दिवस।

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बेगूसराय (अरुण कुमार) , आज 5 सितम्बर को लगभग भारत के सभी छोटे बड़े विद्यालयों,महाविद्यालयों में भी बड़े ही धूम-धाम से सन 1962 से ही मनाया जाता आ रहा है शिक्षक दिवस।और ये शिक्षक दिवस सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी शिक्षक दिवस मनाया जाता है।क्या सभी शिक्षकों का जन्म 5 सितम्बर ही हिता है? यह एक सवाल बनकर चतुर्थ और पञ्चम वर्ग के मन मे उभारता है।उनके लिये यह जानकारी के रूप में प्रस्तूत है।यह शिक्षक दिवस उन महान व्यक्तित्व के धनी व्यक्तियों के याद में मनाया जाता है,जिन्हें मात्र याद करने भर से मन मातिषक ओजमय हो जाता है।ऐसे थे हमारे सर राधाकृष्णन।जिनका जन्म 5 सितम्बर 1888 ईस्वी को तिरुमनी गाँव जो कि मद्रास से लगभग 60 किलोमीटर की दुरी पर है,ये एक मामूली परिवार से थे फिर भी शिक्षा के काहेतर में इनका योगदान अनुकरणीय है।इनके पिता का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी और माता का नाम सिताम्मा था।इनका विवाह सिवाकामु से 1904 ईस्वी में हुआ, इन्हें 5 पुत्रियों सहित एक पुत्र का भी सुख प्राप्त हुआ था।इन्होंने दर्शन शास्त्र में M A किया था इन्हें अपने पूरे जीवन काल में पढ़ाई के दौरान छात्रवृत्ति मिलती रही।1909 में इन्हें मद्रास प्रेसिडेंसी कॉलेज में दर्शन शास्त्र का प्रोफेसर पद पर नियुक्ति मिली,आगे सन 1916 ईस्वी में मद्रास रेजिडेंसी कॉलेज में दर्शन शास्त्र के सहायक प्राध्यापक बने कालान्तर मे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में भारतीय दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर बने।राधाकृष्णन सभी जगहों पर शिक्षा की ही प्राथमिकता देते थे।फिर जिस कॉलेज से इनका शिक्षण हुआ था बाद में इन्हें ूाि कॉलेज का कुलपति बना दिया गया।कुलपति बनैने के बाद इन्होंने दर्शन शास्त्र पर कई पुस्तकें लिखी जो आज भी दर्शन शास्त्र के विद्यार्थियों के लिये एक वरदान स्वरुप है।आजादी के बाद इन्होंने राजनीति में पंडित जवाहरलाल नेहरू के विशेष आग्रह पर राजदूतों के रूप में कार्यभार संभालने को कहा।फिर प्रथम उपराष्ट्रपति के रूप में 13 मई 1952 से 13 मई 1962 तक देश के उपराष्ट्रपति फिर उसी दिन यानी 13 मई 1962 को ही राष्ट्रपति निर्वाचित हुए।उस वक्त देश की स्तिथि कुछ ज्यादा अच्छी नही थी।सन सर राधाकृष्णन 1954 में सर्वोच्च अलंकरण "भारत रत्न" से सम्मानित हुए।सन 1962 में ही उन्हें ब्रिटिश एकेडमी का सदस्य बनाया गया।पॉप जॉन ने इन्हें "गोल्डन स्पर" भेंट किया।इंग्लैंड सरकार द्वारा इन्हें "आर्डर ऑफ मेरिट" का सम्मान प्राप्त हुआ।सन 1975 में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन ही गया।निधनोपरान्त अमेरिकी सरकार द्वारा टेम्पलटन पुरस्कार से सम्मानित किया गया,जो कि धर्म के क्षेत्र में उत्थान के लिये प्रदान किया जाता है।इस पुरस्कार को पाने वाले ये प्रथम गायर ईसाई साम्प्रदाय के व्यक्ति थे।ये बच्चों के लिये सहज गुरु कर रूप में भी जाने जाते हैं।इन्होंने बच्चों में ज्ञान ठूँसने नही बल्कि ज्ञानवान बनाने पर जोड़ दिया है।तो इस रूप में इन्होंने सम्पूर्ण जगत के शिक्षकों को सम्मानित किया है फिर इनका सम्मान तो अति आवश्यक है।ऐसे गुरुदेव को शत शत नमन।
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