विश्व के उन चुने हुए नेताओं में गांधी जी एक थे जिन्होंने नेतृत्व की अगली कई पीढ़ियों को ही तैयार नहीं किया अपितु उनके लिए समन्वयकारी आदर्श भी स्थापित किए: कुलपति एसकेएमयू
दुमका (अमरेन्द्र सुमन) महात्मा गांधी की 150 वीं वर्षगांठ के अवसर पर वर्ष पर्यन्त चलनेवाले कार्यक्रमों की शृंखला में सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका में गांधी जयंती (2 अक्टूबर) 2018 के अवसर पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के मिनी कांफ्रेंस हॉल में विभिन्न महाविद्यालयों के दलों ने महात्मा गांधी से जुड़ी प्रस्तुतियां रखीं। विश्विद्यालय के निदेशानुसार पूर्व में ही महाविद्यालयों में महात्मा गांधी के जीवन व दर्शन से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। इन आयोजनों से चयनित दलों ने 2 अक्टूबर को विश्वविद्यालय में गांधी जयंती में अपने-अपने समय का अंशदान किया। अनुष्ठान में प्रमुख रूप से गांधी के जीवन पर आधारित एकांकी व छाया नाटकों का मंचन किया गया। एस पी कॉलेज दुमका की ओर से गांधी जी के चंपारण सत्याग्रह पर आधारित नाटक को प्रथम, उनके बचपन की घटनाओं पर आधारित जसीडीह बी एड कॉलेज नाटक को द्वितीय व स्वच्छता के संदेश आधारित हिंदी विद्यापीठ की प्रस्तुति को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। इसी क्रम में गांधी दर्शन से जुड़े भजनों के प्रस्तुति में मधुपुर कॉलेज ने प्रथम, के के एम कॉलेज, पाकुड़ ने द्वितीय एवं हिंदी विद्यापीठ देवघर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। देवसंग इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल रिसर्च, देवघर की छाया नाटिका को विशिष्ट रचनात्मकता के लिए पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में साहबगंज महाविद्यालय के दल ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम के प्रारंभ में महात्मा गांधी के सार्ध-शतकीय समारोह के वर्ष भर के विश्वविद्यालय के कार्यक्रमों के संयोजक डॉ अजय सिन्हा ने विषय प्रवेश कराते हुए गांधी की ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डाला। डॉ सिन्हा ने इन कार्यक्रमों की रूपरेखा बताते हुए गांधी पर होने वाले विशेषज्ञों के व्याख्यान की चर्चा की। कुलपति प्रो मनोरंजन प्रसाद सिन्हा ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय गांधी जी के बताए एक आदर्श मंत्र का चयन कर उसे अपने क्रियाकलाप में आत्मसात करने का प्रयत्न करेगा। कुलपति ने गांधी को विश्व के उन चुने हुए नेताओं में एक बताया जिन्होंने नेतृत्व की अगली कई पीढ़ियां ही नहीं तैयार कीं बल्कि उनके लिए समन्वयकारी आदर्श भी स्थापित किए। गांधी की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने किसी भी तरह की वैकल्पिक शून्यता की जगह नहीं छोड़ी. आने वाले समय में गांधी और भी प्रासंगिक होंगे। प्रति कुलपति प्रो हनुमान प्रसाद शर्मा ने कार्यक्रम की समाप्ति पर धन्यवाद ज्ञापन करते हुए अपना वक्तव्य रखा. उन्होंने कुलपति प्रो सिन्हा को धन्यवाद देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन छात्र छात्राओं को ना सिर्फ वर्तमान से जोड़ते हैं बल्कि अतीत और भविष्य के मुख्य प्रवाह से भी जोड़ते हैं। उन्होने कहा कि न्याय पूर्ण समाज की स्थापना के लिए हो रहे सभी कालीन आंदोलन महात्मा गांधी के ऋणी हैं। उन्हें याद रखना हमें हर दृष्टिकोण से सशक्त व सकारात्मक बनाता सांस्कृतिक कार्यक्रम का संयोजन इतिहास विभाग की प्रो अमिता कुमारी ने किया। उन्होंने बताया कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम गांधी के विचारों को सरल एवं आकर्षक बनाकर नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद करेंगे. डॉ राजीव रंजन सिन्हा, डॉ अच्युत चेतन एवं डॉ अमिता कुमारी ने निर्णायक मंडल की भूमिका अदा की. कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ सिकंदर यादव, डॉ प्रमोदिनी हंसदा, प्रो वाई पी राय, डॉ बी के ठाकुर, डॉ शम्भूनाथ झा, डॉ काशी झा, डॉ डी एन गोराई, डॉ विनोद कुमार, डॉ दिलीप कुमार, डॉ अमरनाथ झा , डॉ संजीव सिन्हा, डॉ स्वतंत्र सिंह आदि उपस्थित थे। पुरस्कार वितरण कुलपति प्रो मनोरंजन प्रसाद सिन्हा , प्रति कुलपति प्रो हनुमान प्रसाद शर्मा, डी एस डब्लू डॉ गौरव गांगुली, डीन प्रो वाई पी राय, एस पी कॉलेज की प्राचार्य डॉ प्रमोदिनी हांसदा, डॉ पी के वर्मा व प्रो प्रशांत ने किया

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