नोटबंदी ने देश की अर्थव्यवस्था को किया तहस-नहस, मजदूरों-किसानों पर सर्वाधिक मार : कुणाल - Live Aaryaavart

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शनिवार, 10 नवंबर 2018

नोटबंदी ने देश की अर्थव्यवस्था को किया तहस-नहस, मजदूरों-किसानों पर सर्वाधिक मार : कुणाल

2019 में देश की जनता मोदी सराकर को सिखाएगी सबक.
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भाकपा-माले के बिहार राज्य सचिव कुणाल ने कहा है आज से दो साल पहले मोदी सरकार ने पूरे तामझाम के साथ नोटबंदी का ऐलान किया था और उसे काले धन के खिलाफ एक मास्टरस्ट्रोक बताया था. परंतु आज इस बारे में सरकार में बैठे लोगों ने अप्रत्याशित खामोशी अख़्तियार कर ली है और उसकी चर्चा तक नहीं कर रहे हैं क्योंकि यह नोटबंदी देश और खासकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक हादसा साबित हुई है. इसकी सर्वाधिक मार मजदूर व किसानों पर पड़ी है. कृषि मजदूरी में लगातार गिरावट है और किसानों के भी सामने कई संकट खड़े हो गए हैं. विगत दो वर्षों में देश के अंदर बेरोजगारी की दर काफी बढ़ गई है. इस प्रकार नोटबदी ने अर्थव्यवस्था और समाज के हर क्षेत्र में कई गंभीर समस्याओं को खड़ा कर दिया है.  उन्होंने आगे कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए था कि नोटबंदी से काले धन का खात्मा क्यों नहीं हुआ़़. नोटबन्दी देश के अंदर मौजूद कालेधन से लड़ने के नाम पर की गयी थी. लेकिन आज के दिन तक मोदी सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक देश में काले धन संबंधी आंकड़े तक जारी करने में भी विफल रही है. हालिया एक रिपोर्ट के मुताबिक आज 2016 से भी ज्यादा मुद्रा प्रचलन में हैं. जाहिर है कि यह पूरा मामला देश की गरीब जनता का पैसा पूंजीपतियों के हवाले कर देने की कवायद मात्र था हमारी पार्टी मानती है कि 8 नवबंर 2016 की नोटबंदी ने हमारे देश की अर्थव्यवस्था के लिए ठीक वही संदेश दिया है जो संदेश 6 दिसंबर 1992 की घटना ने देश के सेकुलर राजनीति के संबंध में दी थी. ये दोनों घटनाएं देश की जनता के लिए गंभीर हादसे साबित हुए हैं. आने वाले दिनों और आगामी लोकसभा चुनाव में देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद व पीछे धकेलने के अपराध में देश की जनता मोदी सरकार को निश्चित तौर पर सबक सिखाएगी और उसे गद्दी से उखाड फेकेंगी. इस प्रकार नोटबंदी मोदी सरकार द्वारा की गई भूल नहीं बल्कि जानबूझकर व सुनियोजित तरीके से किया गया अपराध था.
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