बेगुसराय : फिर से नीतीशे कुमार - Live Aaryaavart

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सोमवार, 5 नवंबर 2018

बेगुसराय : फिर से नीतीशे कुमार

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बेगूसराय (अरुण शाण्डिल्य) सियासत जनकल्याण के लिए हो तो कोई ताकत आपको झुका नहीं सकती है।धैर्य के साथ सिद्धांतों पर अडिग हो कर राजनीति किया जाए तो विजय आपके दरवाजे पर दस्तक खटखटाता है।नीतीश कुमार के राजनीतिक अवसान पर बहुत कुछ लिखा गया। तमाम तरह की खबरें चलाईं गईं।किसी ने नीतीश कुमार को लाचार बताया तो किसी ने एक प्रतिशत का नेता बताया।किसी ने अमित शाह के आगे मजबूर बताया।एनडीए में सीटों के बँटवारे की घोषणा के बाद सबको साँप सूँघ गया है। महाशक्ति माने जाने वाली भाजपा ने नीतीश कुमार के महत्व को समझने में भूल नहीं की है।वो जानती कि नीतीश कुमार होने के मायने क्या है।बहुत लोग और शायद मीडिया भी भूल रहा है कि देश के बीते दो दशकों में अटल बिहारी वाजपेयी के बाद जिन लोगों को भी विकास पुरुष कहा गया है उनमें मात्र दो राजनेता हैं। नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार ऐसे शख्स है जो बीते एक दशक से प्रधानमंत्री के दावेदार के रूप में देखे जाते रहे हैं।इसके पीछे इन महान शख्सियत के कार्यों की सफलता है।जिस बिहार को पूरी दुनिया चूका हुआ मान चुकी थी उस बिहार को पटरी पर लाने का काम नीतीश कुमार ने किया है।कभी इसी योगदान के कारण भाजपा नेता सीपी ठाकुर ने नीतीश कुमार के लिए नोबेल पुरस्कार की मांग की थी। गर्व करिए गुजरात के अहमदाबाद और औद्योगिक विकास पर जो दुनिया भर के बड़े औद्योगिक शहरों और क्षेत्रों को टक्कर देता है।यह भारत के लिए गर्व का विषय है।किसे नहीं मालूम है कि इसके पीछे नरेन्द्र मोदी की सफलता है। दोनों में समान बात यह है कि दोनों बेहद ही ईमानदार हैं।तभी नीतीश जी खम ठोक कर कहते है कि कफन में जेब नहीं होता है।ऐसा कहने का साहस किस नेता के पास है। यही वो ताकत है कि उपेन्द्र कुशवाहा जैसे लोग भी नीतीश को बड़ा भाई बता रहे हैं। नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के पर्याय बन चुके हैं। जब तक नीतीश कुमार है- तब तक विरोधी लाचार है।नीतीश कुमार एक ऐसे शख्सियत हैं जिन्हें कोई झुका नहीं सकता।
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