दरभंगा : दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 7 दिसंबर 2018

दरभंगा : दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

नेपाल, भूटान एवं बांग्लादेश एवं भारत के विभिन्न राज्यो से प्रतिभागियों ने की शिरकत
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दरभंगा (आर्यावर्त डेस्क) । ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रशासन विभाग द्वारा आयोजित वैश्वीकरण के दौर में पर्यटन के उभरते परिदृश्य विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ आज हुआ। सम्मेलन का उदघाटन सत्र  विश्वविद्यालय के जुबली हॉल में संपन्न हुआ। उद्घाटन सत्र की शुरुआत सम्मेलन के आयोजक सचिव प्रोफेसर हरे कृष्णा सिंह के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने मचाशीन आगत अतिथियों को पुष्प गुच्छ प्रदान कर सम्मानित किया। कुल गीत गायन के पश्चात परंपरानुसार दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। पूर्व वाणिज्य विभागाध्यक्ष प्रोफेसर बीबीएल दास ने सम्मेलन के विषय पर थीम प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। मुख्य वक्ता प्रोफेसर अतुल परबतियार, टेक्सास विश्वविद्यालय अमेरिका ने पर्यटन के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं पर प्रकाश डाला। साथ ही साथ क्षेत्रीय परिवेश में बिहार में पर्यटन के प्रयाप्त पोषण के लिए ब्रांड बिहार को विकसित करने की आवश्यकता जताई। इतना ही नहीं विषय के साथ सर्वाधिक प्रचलित धर्म में से चार हिंदू, बौद्ध, जैन एवं सिख के आधार बिहार से जुड़े हैं। बिहार का ऐतिहासिक महत्व रहा है। यहां ग्रामीण पर्यटन के साथ ही स्वास्थ्य पर्यटन की पर्याप्त संभावनाएं हैं। उनके अनुसार पर्यटन के विकास के लिए शिक्षा एवं आधारभूत संरचना पर ध्यान देना आवश्यक है। जम्मू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पी एस मन्हास ने लोगों की यादों पर ध्यान देने की बात कही उनके अनुसार पर्यटन के विकास को पर्यटकों से जोड़ना जरूरी है। अगर पर्यटकों का अनुभव अच्छा रहेगा तो इसका सकारात्मक प्रभाव अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में कृषि पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। इसका दोहन किया जाना चाहिए उन्होंने बिहार के धार्मिक स्थलों की बहुलता को भी संदर्भित किया और यहां धार्मिक पर्यटन के विकास की संभावना को रेखांकित किया। हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय उत्तराखंड के प्रोफेसर एस के गुप्ता ने बिहार में शैक्षिक पर्यटन के अतीत वर्तमान और भविष्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने राज्य में विरासत में प्राप्त ऐतिहासिक स्थलों के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता जताई। पर्यटन के विकास से राज्य के सामाजिक आर्थिक विकास भी  होगा। राज्य में पर्यटन के विकास की संभावनाओं को मार्केटिंग के तकनीकों की सहायता से लाभदायक स्थिति में बदला जा सकता है। मार्केटिंग के लब्ध प्रतिष्ठित विद्वान प्रोफेसर जगदीश सेठ के द्वारा प्रेषित वीडियो क्लिप को भी कार्यक्रम में प्रसारित किया गया। प्रोफेसर सेठ के अनुसार पर्यटन क्षेत्र के समुचित विकास के लिए देसी पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है।  थाईलैंड, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका जैसे देश पर्यटकों के  प्राथमिकता सूची में गंतव्य स्थलों में शामिल हैं। हमे उनसे सीख लेने की जरूरत है। समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय विश्वविद्यालय गया के उपकुलपति प्रोफेसर ओ पी राय ने सेवा क्षेत्र से जुड़े पर्यटन को विकसित करने पर जोर दिया। प्रोफेसर राय ने इसके लिए कानून एवं व्यवस्था की अच्छी स्थिति बनाए रखने की अहमियत जताई।  ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलसचिव कर्नल एनके राय ने कुलपति प्रोफेसर एसके सिंह का संदेश सभा में रखा। ज्ञातव्य हो कि प्रोफ़ेसर सिंह की  अनुपस्थिति में उप कुलपति प्रोफेसर जय गोपाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने पर्यटन के विकास पर बल देने की अनिवार्यता जताई। उनके अनुसार पर्यटन के विकास से सांस्कृतिक विकास को भी गति मिलती है। अर्थ व्यवस्था सुदृढ़ होती है। ऐसी स्थिति में पर्यटन क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता सूची में सर्वोपरि रखने की जरूरत है। कार्यक्रम का समापन वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रोफेसर  अजीत कुमार सिंह के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। मंच संचालन स्नातकोत्तर वाणिज्य विभाग के डॉ दिवाकर झा ने किया। सम्मेलन के प्रथम एवं द्वितीय तकनीकी सत्रों को प्रबंधन भवन के सभागार में आयोजित किया गया। प्रथम तानिकी सत्र में कुल 38 पत्रों का तथा दूसरी तकनीकी सत्र में 43 पत्रों का वाचन हुआ। सत्रों की अध्यक्षता क्रमशः प्रोफेसर एस के गुप्ता एवं प्रोफेसर पी एस मन्हास ने की। सत्रों में  आदिति लहरी, दिल्ली एवं हित नाथ ढकाल, भूटान ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। सत्रों के प्रतिवेदक डॉ शैलेंद्र कुमार झा एवं डॉ बी के मिश्रा थे। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के प्रतिवेदक पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय पटना के प्रोफेसर आर यू सिंह थे। संध्याकाल सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होना है जिसका आयोजन स्थल जुबली हॉल है।
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