परमार्थ निकेतन शिविर प्रयागराज में गणतंत्र दिवस के अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, श्री मधुसूदन नायडू जी, साध्वी भगवती सरस्वती ने किया ध्वजारोहणपरमार्थ निकेतन शिविर में अध्यात्म के साथ देशभक्ति का अद्भुत संगमभारत की शान व जान तिरंगा फहराकर भारतीय रंग में रंगे विदेशी श्रद्धालु राष्ट्रगान और वंदे मातरम् से गूंजा अरैल क्षेत्रदेवभक्ति से पहले देशभक्ति-पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वतीजीवंदेमातरम्, हम होंगे कामयाब और भारत माता की जय का उद्घोषध्वजारोहण समारोह में 25 से अधिक देशों के श्रद्धालुओं ने किया सहभाग
प्रयागराज/ऋषिकेश, 26 जनवरी। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, श्री मधुसूदन नायडू जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी ने अरैल क्षेत्र, परमार्थ निकेतन शिविर प्रयागराज के प्रांगण में ध्वजारोहण किया। पूरा प्रांगण देशभक्ति के रंग में रंगा हुआ था। स्वामी जी महाराज ने तिरंगा झंडा फहराकर ’’देवभक्ति और देशभक्ति चले साथ-साथ’’, का संदेश दिया। अरैल क्षेत्र ’’राष्ट्रगान और वंदेमातरम्’’ के संगीत से गूंज रहा था। परमार्थ निकेतन शिविर में उपस्थित सभी देशी-विदेशी, प्रवासी भारतीय, पूर्वोत्तर के लगभग सभी प्रांतों से आये सैंकडों श्रद्धालु, अध्यात्म के साथ देशभक्ति के रंग में रंगे दिखायी दे रहे है। अत्यंत उत्सुकता और कौतूहल से सभी साधक तिरंगा लहराते हुये ’’भारत माता की जय’’ के नारे लगा रहे थे। संगम में उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और पूर्वोत्तर से आये सैकड़ों श्रद्धालुओं का अद्भुत संगम दिखायी दे रहा है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि मुझे लगता है ’’अब देव भक्ति से पहले देश भक्ति होनी चाहिये। भारत का एक मजबूत लोकतंत्र है इसे और मजबूत बनाने के लिये हर दिल में देश भक्ति का दीप जलाना होगा। भारत, देश सभी संस्कृतियों, वर्गो, वर्णो, भाषाओं, वेशभूषाओं एवं परम्पराओं का सुन्दर बगीचा है इसमें सबके साथ और सबके विकास की खुशबू सदैव फैलती रहे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने गणतंत्र दिवस पर संदेश दिया कि ’’हम सभी भेदभाव से ऊपर उठकर सब एक होकर यह सोचे कि हम सभी भारतीय है तथा सभी एक परमात्मा की संतान है। हम सभी मिलकर देश की एकता, अखण्डता, समरसता और सद्भाव के लिये काम करे। आज इस देश को वास्तव में किसी चीज की आवश्यकता है तो वह है स्वच्छता, समरसता और सजगता यह सद्भाव बना रहे यही इस देश का संगम है। उन्होंने देश की रक्षा करने वाले सैनिकों को प्रमाण करते हुये कहा कि भारत के प्रत्येक सैनिकों की हर धड़कन और हर श्वास इस देश के लिये धड़कती है इसलिये हमारा तिरंगा लहराता है। आज हमारे देश के सभी सैनिकों को जो किसी संत से कम नहीं है उनको प्रणाम करते है और अपने को गौवरान्वित मानते है कि जब तक वो जिंदा है तब तक इस देश की अस्मिता जिंदा है, एकता, अखण्डता और इस देश की सुरक्षा जिंदा है। आज इस देश को उत्तर, दक्षिण, पर्व और पश्चिम के संगम की आवश्यकता है। स्वामी जी महाराज देश की उन सभी माताओं और वीरांगनाओं को प्रणाम करते हुये कहा कि धन्य है ओ मातायें जिन्होंने श्री नरेन्द्र मोदी जैसे ऊर्जावान प्रधानसेवक दिये जिनकी हर श्वास इस देश के लिये है। स्वामी जी महाराज ने कहा कि देश भक्ति से तात्पर्य अपने देश को चमन बनाने के लिये तथा उसमें अमन और शान्ति बनी रहे इसलिये सबको सदैव प्रयत्न करते रहना होगा। उन्होंने कहा कि हम तभी तक सुरक्षित है जब तक हमारा देश सुरक्षित है इसलिये अपनी-अपनी देव भक्ति करे परन्तु देश भक्ति पहले हो। स्वामी जी महाराज ने कहा कि ’’भारत एक भूमि का टुकडा नहीं है बल्कि भारत, तो एक जीता जागता राष्ट्र है, भारत, शान्ति की धरती है और शान्ति का पैगाम देती है। हमारा तो मंत्र भी ऊँ शान्तिः, शान्तिः, शान्तिः है और यें शान्ति सब के लिये है। आईये इस पावन प्रयागराज की धरती में इस भाव को आत्मसात कर शान्ति के साथ आगे बढ़ें तथा संकल्प से सिद्धि एवं समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ें।’’ स्वामी जी महाराज ने देश के युवाओं एवं प्रवासी भारतीयों से आह्वान किया कि वे जहां भी रहे परन्तु अपनी जड़ों से जुड़े रहें। जब तक हम भारत के प्राचीन इतिहास से नहीं जुड़ेगे तब तक उसकी दिव्य और भव्य संस्कृति और सभ्यता के विषय में नहीं जान पायेंगे। भारत की गौरवमयी संस्कृति को जानने के लिये उसके इतिहास को जानना बहुत जरूरी है।
श्री मधुसूदन नायडू जी ने कहा, भारत सदियों से भगवान की ही भक्ति में रत रहा है इसलिये इसका नाम भारत है। जो भक्ति में रत है वही भारतीय है। उन्होने कहा कि इस देश की रक्षा हमारे सैनिक करते है, वे देश के प्रथम रक्षक है तथा देश की अन्दर से रक्षा करने वाले हमारे पूज्य संत है जो हमारी संस्कृति को बनाये रखते है और उसकी रक्षा करते है, बिना संस्कृति के कोई भी देश जीवित नहीं रह सकता। एक ओर सैनिक और दूसरी ओर संत दोनों से ही भारत बना हुआ है।साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि 70 वर्ष पूर्व भारत को विदेशियों से स्वतंत्रता मिली थी जिससे हमारी भूमि तो आजाद हो गयी परन्तु हमारा मन अभी भी फ्री नहीं हो पाया। उन्होने कहा कि हमारे दिलों में जो भेदभाव है, वर्णो को लेकर, वर्गो को लेकर, भाषा को लेकर, रंग को लेकर, इस सब से स्वतंत्र होना ही सच्ची स्वतंत्रता है। आज गणतंत्र दिवस पर हम सभी एक संकल्प लेकर जायें ’’हम एक है, हमारा देश एक है’’ जिस प्रकार यहां प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है उसी प्रकार हमारे दिलों का भी संगम हो यही सच्ची स्वतंत्रता है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा, आज ’’संगम के किनारे, हाथ खड़े हो सारे, संकल्प हों हमारे कि पेड़ लगायेंगे प्यारे’’ का संकल्प सभी को कराया। उन्होने कहा कि जिस प्रकार मन्दिरों में कीर्तन होते हैं अब पेड़ कीर्तन भीं हो; पेड़ संकीर्तन हो, हनुमान चालीसा पढ़े लेकिन अब समय आ गया कि हम सफाई चालीसा भी पहले पढ़ें। भारत के यशस्वी और ऊर्जावान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने लाल किले की प्राचीर से स्वच्छ भारत का संकल्प दिलवाया था तब से अब तक साढे़ चार साल में 9 करोड़ टाॅयलेट बन गये है इस देश में अब ये टाॅयलेट तो गये है और बने रहे है अब इन्हें स्वच्छ रखना हमारा कर्तव्य है। अब आगे भी यह शौचालय यात्रा जारी है। हम यह न भूलें कि शौचालय यात्रा-स्वच्छता यात्रा है। हम जितना स्वच्छ रहेंगे, उतना ही स्वस्थ रहेंगे। स्वच्छ और स्वस्थ राष्ट्र ही प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सकता है। स्वामी जी महाराज ने सभी को जल संरक्षण का संकल्प कराया।

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