भारतवंशियों के गौरवमयी सत्कार के लिये सभी तैयारी पूरी : सुषमा - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

बुधवार, 16 जनवरी 2019

भारतवंशियों के गौरवमयी सत्कार के लिये सभी तैयारी पूरी : सुषमा

prepration-done-for-nri-said-sushma
लखनऊ, 16 जनवरी, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बुधवार को कहा कि दुनिया भर में अपने हुनर का लोहा मनवा रहे भारतवंशियों को देश की गरिमापूर्ण संस्कृति से रूबरू कराने और उनके अनुभव का लाभ लेने के मकसद से उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी वाराणसी में 21 जनवरी से शुरू होने वाले प्रवासी भारतीय दिवस के लिये सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं।  श्रीमती स्वराज ने यहां पत्रकारों से कहा कि तीन दिनो तक चलने वाले इस आयोजन में अब तक 5802 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराये है जो पिछली बार की अपेक्षा तीन गुना से भी ज्यादा है। उन्होने कहा कि इस गरिमामयी आयोजन के जरिये देश के विकास में प्रवासी भारतीयों के अनुभव का लाभ उठाया जायेगा।  उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय दिवस का शुभारम्भ 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे जबकि 23 जनवरी को समापन समारोह को राष्ट्रपति नरेन्द्र मोदी संबोधित करेंगे। इससे पहले 21 जनवरी को युवा प्रवासी दिवस के साथ साथ उत्तर प्रदेश प्रवासी दिवस आयोजन किया जायेगा जिसमें नार्वे के युवा संसद सदस्य हिमांशु गुलाटी और न्यूजीलैंड के युवा सांसद चरणजीत सिंह बख्शी विशिष्ट अतिथि होंगे। उत्तर प्रदेश प्रवासी सम्मेलन में 1000 से भी प्रवासियों के भाग लेने की संभावना है।  श्रीमती स्वराज ने कहा कि 22 जनवरी को मारीशस के प्रधानमंत्री पी जगन्नाथ विशिष्ट अतिथि की भूमिका निभायेंगे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहल पर वर्ष 2003 में प्रवासी भारतीय दिवस के आयोजन की शुरूआत हुयी थी जिसमे उन्होंने प्रवासी भारतीयों से कहा था कि हमें आपका धन नहीं अनुभव का लाभ चाहिए, तब से ये परंपरा चली आ रही है। वर्ष 2015 तक दिवस हर साल मनाया जाता था।  वर्ष 2014 में केन्द्र में नरेन्द्र मोदी सरकार के अस्तित्व में आने के बाद इस बात पर विचार किया गया कि इस महत्वपूर्ण आयोजन को हर साल की बजाय हर दूसरे वर्ष में मनाया जाये। इसके पीछे मंशा थी कि अंतराल की अवधि में भारत में संबधित विषय को लेकर विचार गोष्ठियां आयोजित की जाये अौर आमंत्रित अतिथियों के सुझावों को अमल में लाया जा सके।

कोई टिप्पणी नहीं:

Loading...