भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का धरोहर है कुम्भ : वी के सिंह - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2019

भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का धरोहर है कुम्भ : वी के सिंह

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कुम्भनगर, 22 फरवरी, दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर कुम्भ केवल मेला या तीन नदियों का संगम ही नहीं बल्कि यह भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की धरोहर है। विदेश राज्य मंत्री जनरल वी के सिंह के नेतृत्व में करीब 190 देशों के भारतीय संस्कृति में रुचि रखने प्रतिनिधि मण्डल को शुक्रवार को तीर्थराज प्रयाग पहुंचा। स्वास्थ्यमंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने प्रयागराज के बमरौली हवाई अड्डे पर सभी का आगवानी की। विदेशी प्रतिनिधि मण्डल के साथ संगम नोज पर पहुंचे जनरल वी के सिंह ने संवाददाताओं से कहा,“आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर कुंभ केवल मेला या तीन नदियों का संगम ही नहीं बल्कि यह भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की धरोहर है।” श्री सिंह ने कहा कि कुंभ को लेकर “भारत की विविधता में एकता” का भाव पता चलता है। यहां आध्यात्मिक गुरूओं से लेकर एक साधाराण इंसान भी पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अन्त: सलीला स्वरूप में प्रवाहित सरस्वती में अलग-अलग मतो और विचारों के लोग अस्पृश्यता को भूलाकर एक साथ आस्था की डुबकी लगाते हैं। उन्हाेंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस प्रकार विश्वसतर पर इसकी ब्रांडिंग किया है, वैश्विकस्तर पर यह केवल ‘यूनेस्को’ का टैग के साथ नहीं रहे बल्कि दुनियां इसकी महत्ता और भव्यता को अच्छी प्रकार समझे। कुम्भ की महत्ता दुनिया के मन में अच्छी प्रकार से बैठ रहा है। इसकी महत्ता यदि नहीं होती तो प्रतिनिधि मण्डल के साथ साऊदी अरब से कोई महिला यहां नहीं आती। लेकिन वह आयी और इसकी भव्यता को देखकर अविभूत हो गयी। यह दुनिया के लिए अपने आप में एक बड़ा संदेश है। श्री सिंह ने कहा कि विश्व को हम कुम्भ के प्रबंधन बताना चाहते हैं आध्यात्मिक महत्व से रू-ब-रू कराना चाहते हैं। प्रबंधन की दृष्टि से कुंभ अपने आप में एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर पूरा विश्व इसकी महत्ता और भव्यता को समझे। पुलवामा हमले को लेकर पाकिस्तान से आने वाले प्रतिनिधि मण्डल में किसी सदस्य के नहीं आने के बारे में विदेश राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि वहां के सिन्धी कांउसिल के मुखिया डा रमेश कुमार बाजवानी की तमन्ना थी कि वह भी कुंभ में आकर त्रिवेणी की संगम में आस्था की डुबकी लगायें, और उनकी तमन्ना पूरी भी हुई है। ऐसा नहीं है कि पाकितान से कोई नहीं आया। 

गौरतलब है कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस अवसर स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री का विजन रहा है वैश्विक स्तर पर कुम्भ की चर्चा होनी चाहिए। भारत का स्थान विश्व गुरू का रहा है। भारत का प्राचीन इतिहास इसके धर्मिक और आध्यात्मिक इतिहास के साथ भी जुड़ता है। इन सभी चीजों को अध्ययन करने पर पता चलता है कि कुंभ एक ऐसा स्थान है जहां पर “ अनेकता में एकता” का सही दर्शन कर सकते हैं। श्री सिंह ने एक सवाल के जवाब में कहा कि दुनिया के श्रद्धालु जब यहां बेहतर व्यवस्था देखते हैं और उसकी चर्चा करते हैं तो इसकी खूबियां भी दूर दूर तक पहुंचती हैं। कुंभ दर्शन के लिए दुनिया के राजदूत यहां आये इसके साथ ही 190 देशों के और भी प्रतिनिधि यहां आने के बाद अपने मुल्क जाने के बाद चर्चा करते हैं जिससे पर्यटन को स्वाभाविक रूप से बल मिलता है।  विदेशी प्रतिनिधि मण्डल को कुम्भ में आकर आध्यात्मिक और भारतीय संस्कृति की विरासत को नजदीक से समझने का मौका मिला। ये विदेशी मेहमान भारतीय संस्कृति में रूचि रखने वाले हैं और अपने वतन को लौटकर इसपर शोध करेंगे। कुम्भ भ्रमण के दौरान प्रतिनिधि मण्डल दल सबसे पहले अरैल स्थित संस्कृति ग्राम, अक्षयवट का दर्शन के बाद संगममें आस्था की डुबकी लगायी। स्नान के बाद प्रतिनिधि मण्डल किला घाट होते हुए पुन: अरैल जेटी तक जलमार्ग से गया। इसके बाद उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के सांस्कृतिक पण्डाल में आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महराज के वीडियो सम्बोधन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अवलोकन किया और शाम को विशेष चार्टेड विमान से दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

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