बिहार : सातवीं वेतनमान भोगने वाले कर्मियों ने राजू पीटर ग्राबिएल के प्रति न्याय नहीं किया - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 26 मार्च 2019

बिहार : सातवीं वेतनमान भोगने वाले कर्मियों ने राजू पीटर ग्राबिएल के प्रति न्याय नहीं किया

जिस माह में कोई नहीं मरता हैं तो उस माह में हाथ मलते रह जाने वाले शख्स के प्रति सोचा और न ही विचार ही किया। इस ओर पटना महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विलियम डिसूजा निर्णय लें। इस मंहगाई में कैसे राजू की जिंदगी कटती है उस पर सोचने की जरूरत है।
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पटना,25 मार्च। कुर्जी पल्ली में है बालूपर मोहल्ला। यहां पर ईसाई समुदाय के लोग भी रहते हैं। इसी मोहल्ले में रहते हैं राजू पीटर ग्राबिएल। पहले बांसकोठी में रहते थे। यहां पर रहने के बाद शिवाजी नगर में रहे। अभी बालूपर (ससुराल) में रहते हैं। उनके पिता ग्राबिएल संत जेवियर हाई स्कूल के परिसर में स्थित जैसुइट हाऊस में कार्यरत थे। इनके पिता काफी बीमार हो गए। इसके कारण घर की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब हो गयी। घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के क्रम में जवानी में ही मजदूर हो गए। इसी अवस्था में रिष्तेदार जोसेफ एलियास की संगति में आ गए। जोसेफ एलियास और उनकी पत्नी मुर्दों के पर्व के अवसर पर कब्र पर मिट्टी चढ़ाने,लिपने-पोतने और उसे रौनकदार बनाने का कार्य किया करते थे। जिन कब्रों में कार्य किए। उनके परिजनों से मुंह मांगी रकम बटोर लिया करते थे। इसमें राजू भी योगदान करने लगा। जो आज भी जारी है।  बताते चले कि कब्र पर मिट्टी चढ़ाने,लिपने-पोतने के बाद उनके परिजनों से मुंह मांगी रकम बटोरने की आदत को ही विस्तार करके पल्ली पुरोहित ने जोसेफ एलियास को किसी ईसाई की मृत्यु होने पर कब्र खोदने का भी कार्य करवाने लगे। आदत के अनुसार जोसेफ एलियास कब्र खोदने के बाद मृतक के परिजनों से मुंह मांगी रकम बटोरने लगा। इसमें राजू पीटर ग्राबिएल ने योगदान करने लगे। उनके साथ राजू भी कब्र खोदने का कार्य करने लगा।  बताते चले कि नौजवान राजू के क्रियाकलाप से लोग और पल्ली पुरोहित प्रभावित होने लगे। पल्ली पुरोेहित नौजवान राजू पर विष्वास व्यक्त करने लगे। पल्ली पुरोहित द्वारा यकीन करने का फल राजू को मिला। किसी भी ईसाई व्यक्ति की मृत्यु होने पर पल्ली पुरोहित राजू को ही कब्र खुलवाने को लेकर काॅल करने लगे। कब्र खोदने की कीमत मृतक के परिजनों से वसूलने लगे। यह सिलसिला 1979 से 2019 तक जारी है। 1981 में राजू मैट्रिक उत्र्तीण हुए। इस बीच राजू विवाह किए। अभी तीन बच्चे हैं। तीन बच्चों की मां ब्यूटी पार्लर में कार्यरत हैं। तीन बच्चों के पिता कब्र खुदवाने का कार्य करने में लगे हैं। इस तरह का कार्य करते राजू 40 साल गुजार दिए। 

बताते चले कि पल्ली पुरोहित ही किसी कब्रिस्तान की रखरखाव के प्रति जिम्मेवार होते हैं। किसी एक व्यक्ति को बहाल किया जाता है। जो व्यक्ति बहाल होते हैं वे कब्रिस्तान को जंगल होने से बचाते हैं। उसको पल्ली पुरोहित के द्वारा मानदेय अथवा मजदूरी दी जाती है। मगर कब्र खोदवाने वाले जिम्मेवार व्यक्ति को पल्ली पुरोहित के द्वारा न मानदेय अथवा मजदूरी ही दी जाती है। यह जिम्मेवार व्यक्ति पूर्णतः आकाशवृत्ति पर निर्भर है। अगर कोई ईसाई की मौत होने के बाद ही कब्र खुदवाता है। इसके बाद परिजन राशि देते हैं। अभी कुर्जी पल्ली परिषद ने एक कब्र को खोदने की कीमत 2 हजार निर्धारित किया है। इस तरह की राषि निर्धारित करने से राजू पीटर ग्राबिएल नाराज हैं। किसी माह में कोई ईसाई की मृत्यु नहीं होती है। तो राजू हाथ मलते रह जाता है। कोई 2 हजार से अधिक ही कब्र है। उसकी पूरी जानकारी राजू ने पास है। राजू तो कम्प्यूटर नहीं हैं पर कब्र की कोपी दिमाग में पेस्ट करके रखे हैं। उस हिसाब से कीमत नहीं मिलती है। कब से 15 हजार रू. मिलना चाहिए।जिस माह में कोई नहीं मरता हैं तो उस माह में हाथ मलते रह जाने वाले शख्स के प्रति सोचा और न ही विचार ही किया। इस ओर पटना महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विलियम डिसूजा निर्णय लें। इस मंहगाई में कैसे राजू की जिंदगी कटती है उस पर सोचने की जरूरत है।  बताते चले कि 24 घंटे राजू पीटर ग्राबिएल व्यस्त रहता है। हमेशा पुरोहित के काॅल की ओर ध्यान लगाकर बैठा रहता है। किसी ईसाई की मौत होने पर मृतक के परिजन आकर पल्ली पुरोहित को अंतिम धर्मरीति अदा करने की सूचना देते हैं। इसके बाद तुरंत पुरोहित राजू को काॅल करते हैं। काॅल होते ही बाद तुरंत पल्ली पुरोहित के पास आ जाना है। यहां पर पहुंचने के बाद मृतक के परिजन कब्र को दिखाते हैं। जहां पर कब्र खोदना है। चालीस वर्ष के अनुभव के आधार पर राजू ही मृतक के बताये कब्र की पुष्टि करता है। अगर मृतक के परिजन गलत कब्र बताते हैं तो उसे सही कब्र बताने में योगदान करता है।  बताते चले कि कुर्जी कब्रिस्तान में ईंच भर भी जगह नहीं है। इस लिए कब्र में ही कब्र तैयार किया जाता है। अगर किसी के पास कब्र नहीं है। तो उसे नयी जमीन देने के एवज में 25 हजार रूपए जमीन की कीमत दी जाती है। जो रजिस्ट्री नहीं की जाती है। 

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