बिहार : पटना महाधर्मप्रांत के प्रवक्ता फादर अमल राज ने एकसिरे से नकारा - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 29 मार्च 2019

बिहार : पटना महाधर्मप्रांत के प्रवक्ता फादर अमल राज ने एकसिरे से नकारा

नवगठित क्रिश्चियन वेलफेयर एसोसिएशन के सुशील लोबो चाहते हैं कि फादर और सिस्टर राजनीति में भाग लेंक्यों पड़े हो फादर और सिस्टरों के चक्कर में राजन क्लेमेंट साह हैं टक्कर में?
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पटना,29 मार्च। नवगठित क्रिश्चियन वेलफेयर एसोसिएशन, बिहार,पटना से जुड़े हैं सुशील लोबो। उन्होंने पटना धर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष, पटना महाधर्मप्रांत में कार्यरत फादर -सिस्टर के साथ क्रिश्चियन बंधुओं के समक्ष राजनीतिज्ञों की तरह सात सवाल उछाला है। फादर और सिस्टरों को राजनीति में भाग लेने की वकालत करने में जुट गए हैं। मगर इस तरह की चर्चाओं पर फादर और सिस्टर पसंद ही नहीं करते हैं। उनके सात सवालों को एकसिरे से नकार दिया है पटना महाधर्मप्रांत के प्रवक्ता फादर अमल राज ने। सुशील लोबो से कहा गया कि क्यों पड़े हो फादर और सिस्टरों के चक्कर में राजन क्लेमेंट साह हैं टक्कर में ?

नवगठित क्रिश्चियन वेलफेयर एसोसिएशन 
इससे जुड़े सुशील लोबो ने कहा है कि जिस प्रकार हिंदू और मुस्लिम समुदायों के धर्मगुरु लोग जमकर राजनीति किया करते हैं, तो ईसाई समुदाय के धर्मगुरु क्यों न राजनीति करें? उनका उठाया गया सात सवाल है। वे सीधे रोेम के द्वारा निर्मित कैनन लाॅ अड़चन पर सवाल उठा देते हैं, क्या इस लाॅ से प्रभावित होते हैं ? उसके बाद भारत में आकर भारतीय संविधान पर सवाल उछाल दे रहे हैं? क्या सिर्फ भारतीय ईसाई फादर-सिस्टरों पर रोक लगा रखा हैहै ? उसके बाद वेटिकन सिटी में रहने वाले पोप पर से पूछते हैं कि क्या आपसे किसी तरह का दवाब है? नयी दिल्ली में है स्थित सी. बी. सी. आई. से रूकावट है? इसके बाद मिशनरियों के क्षमता पर सवाल खड़ा कर दिया है? लोगों पर (अयाजक वर्ग ) सवाल उठा दिए हैं कि इनके पास भी दवाब देने की क्षमता नही है ? सवाल उठाने के बाद कहा कि समय-समय पर कैनन  लाॅ में बदलाव किया जाए ताकि हम अपनी बातों को धर्मगुरुओ और अयाजकों के माध्यम से संसद, विधानसभा ,राज्य सभा और गांव-शहर के कोने-कोने मे रख  सके । सुशील लोबो कहते हैं कि ईसाई समुदाय को शर्म आनी चाहिए कि हमारे याजक वर्ग अभी भी राजनीतिक मे पीछे  चल रहे है  ऐसा क्यों ? इन बिन्दुओ पर गम्भीरता से सोचे और देखे कैसे  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मंत्री आदित्यनाथ योगी  जी और न जाने कितने धर्मगुरु राजनीति कर अपनी समुदाय और धर्म की रक्षा मे सक्रिय है।तो फिर ईसाई धर्म गुरु पीछे क्यों ?
      
पटना महाधर्मप्रांत के प्रवक्ता हैं फादर अमल राज
पटना महाधर्मप्रांत के प्रवक्ता फादर अमल राज ने कहा कि ईसाई समुदाय के फादर और सिस्टर धार्मिक नेता हैं।हमलोग राजनीतिक नेता नहीं है। किसी तरह की मनाही रोम के पोप और रोम से निर्मित कैनल लाॅ में उल्लेख नहीं है। मगर हमलोग खुद को धार्मिक नेता मानकर राजनीति के दलदल में नहीं जाते हैं। कई फादर लोग हैं धार्मिक नेता होते हुए भी चुनावी दलदल में तकदीर चमकाने गए हैं। एक सवाल के जवाब में फादर अमल राज ने कहा कि कुछ मसले पर धार्मिक नेताओं को लचीलापन रखना पड़ता है। सर्वविदित है कि अल्पसंख्यकों को रिझाने के लिए बिहार अल्पसंख्यक आयोग में राजनीतिक अध्यक्ष पद पर मुस्लिम और उपाध्यक्ष पद पर ईसाई समुदाय को मनोनीत कर लिया जाता है। येसु समाजी फादर पीटर और एन.डी.ए. की सिस्टर सुधा वर्गीस को उपाध्यक्ष पद पर मनोनीत किया गया है। फादर अमल दास ने कहा कि इंदिरा गांधी आर्युविज्ञान संस्थान में सी.एम.नीतीष कुमार के द्वारा प्रार्थना स्थल निर्माण करने के लिए जमीन दी गयी थी। जिस पर हंगामा हाने के कारण माननीय न्यायालय के द्वारा स्टे लगा दिया गया है। संस्थान कर्मी सीढ़ी के नीेचे प्रार्थना करने को मजबूर हैं।वर्तमान माहौल में अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय को डर लगता है जिसके कारण अल्पसंख्यकों को मिलने वाले कल्याण और विकास कार्यों से वंचित होना पड़ता है।

अयाजक वर्ग को प्रोत्साहन देने में समय लगाने की मांग
इस समय ईसाई लोकधर्मी राजनीति द्वार पर दस्तक दे रहे हैं। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अल्पसंख्यक विभाग के उपाध्यक्ष सिसिल साह हैं। वहीं बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश मंत्री हैं चैाकीदार राजन क्लेमेंट साह। इनको नवगठित क्रिश्चियन वेलफेयर एसोसिएशन व अन्य लोकधर्मी प्रोत्साहन दें। ऐसा करने से राजनीति में दूर का रास्ता तय कर सकेंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार सच में चैाकीदारी करने में लगे हैं चैाकीदार राजन क्लेमेंट साह। मिशनरी अथवा अयाजक लोगों की समस्या को निपटारा करने के लिए दिन-रात बराबर करके रख देते हैं। ऐसे में नवगठित क्रिश्चियन वेलफेयर एसोसिएशन, बिहार,पटना से जुड़े सुशील लोबो को मूल्यांकन करना चाहिए। क्यों पड़े हो फादर और सिस्टरों के चक्कर में राजन क्लेमेंट साह हैं टक्कर में?

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