बिहार : आज जहानाबाद संसदीय के अतरी विधान सभा में चला अभियान - Live Aaryaavart

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रविवार, 21 अप्रैल 2019

बिहार : आज जहानाबाद संसदीय के अतरी विधान सभा में चला अभियान

मतदाता जारूकता अभियान जोरशोर से जारी , यहां के 11 गांवों की विकराल समस्या है। कुल 7 हजार 6 सौ 75 वनभूमि पर रहने वाले महादलित परेशान हैं।उनको पर्चा मिल ही नहीं रहा है। वर्तमान सरकार को छोड़ अन्य प्रत्याशी को वोट देने का किया है निश्चय।
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अतरी। जहानाबाद संसदीय क्षेत्र तीन जिलों के विधानसभा क्षेत्रों से मिलकर बना है। जहानाबाद संसदीय क्षेत्र में अरवल जिले का अरवल और कुर्था, जहानाबाद जिले का जहानाबाद,घोसी और मखदुमपुर तथा गया जिले का अतरी विधानसभा क्षेत्र शामिल है। पुराने जहानाबाद संसदीय क्षेत्र से पटना जिले का मसौढ़ी विधानसभा क्षेत्र निकल गया है और गया जिले का अतरी शामिल हुआ है। जहानाबाद जिले के किसी विधानसभा क्षेत्र के नाम में परिवर्तन नहीं हुआ है। 

बिहार का जहानाबाद नक्सल प्रभावित जिला है और सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है।यह इलाका कई नक्सली हमलों का गवाह रहा है और नक्सलियों के रेड कॉरिडोर का हिस्सा माना जाता है। जहानाबाद लोकसभा क्षेत्र लंबे समय तक वामपंथ का सियासी गढ़ रहा है। इसके बाद यहां से कांग्रेस और जनता दल के उम्मीदवार भी जीते।1957 और 1962 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सत्याभामा देवी, 1977 में जनता पार्टी के हरि लाल प्रसाद सिन्हा, 1980 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महेन्द्र प्रसाद, 1984, 1989, 1991 और 1996 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के रामाश्रय प्रसाद सिंह,1998 राष्ट्रीय जनता पार्टी के डाक्टर सुरेन्द्र प्रसाद यादव, 1999 में जनता दल(गठबंधन) के अरूण कुमार और 2004 में राष्ट्रीय जनता दल के गणेश प्रसाद सिंह, 2009 में जनता दल (गठबंधन) के जगदीश शर्मा और 2014 में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अरूण कुमार विजय हुए। 1998 के बाद से इस सीट से हर बार सांसद बदलते रहने की परंपरा दिखी। 2014 के चुनाव में इस सीट से एनडीए की सहयोगी आरएलएसपी के उम्मीदवार डॉ. अरुण कुमार जीते। लेकिन बाद में पार्टी से मतभेद के बाद अलग हो गए। 2019 चुनाव से पहले आरएलएसपी भी एनडीए से अलग होकर महागठबंधन के खेमे में आ गई। इस कारण से जहानाबाद की सियासी लड़ाई काफी रोचक हो गई है।

वर्तमान डबल इंजिन की सरकार से नाखुश हैं महादलित। जहानाबाद संसदीय क्षेत्र के अतरी विधान सभा में मतदाता जागरूकता अभियान चलाया गया। यहां के प्राथमिक विघालय, तितमो में सैकड़ों की संख्या में महादलित मतदाताओं ने बैठक की। इस बैठक में वर्तमान सरकार के प्रत्याशी को छोड़कर अन्य किसी भी प्रत्याशी को विजयी बनाने का निश्चय किया गया। मतदाता जागरूकता अभियान चलाने वाले शत्रुघ्न दास और अर्जुन पासवान ने कहा कि वन भूमि पर रहते हैं। मगर वनाधिकार कानून 2006 के तहत पर्चा नहीं मिल रहा है। यह एक गांव की समस्या नहीं है। कुल 11 गांवों की विकराल समस्या है। कुल 7 हजार 6 सौ 75 वनभूमि पर रहने वाले महादलित परेशान हैं। कई बार ग्राम में बैठक कर प्रस्ताव पारित कर मुखिया और अंचल पदाधिकारी को दिया गया। मगर सुनवाई नहीं हुई। 

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