बिहार : ' सत्ता की सूली' का लोकार्पण, 'सूली पर लोकतंत्र ' पर जमकर चरचा - Live Aaryaavart

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रविवार, 12 मई 2019

बिहार : ' सत्ता की सूली' का लोकार्पण, 'सूली पर लोकतंत्र ' पर जमकर चरचा

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पटना, 12 मई । संसदीय लोकतंत्र में पर्दे के पीछे सत्ता के घिनौने चरित्र, हत्या की राजनीति को परत दर परत श्रृंखलाबद्ध ढंग से उजागर करती है महेंन्द्र मिश्र की किताब 'सत्ता की सूली' । इसका लोकार्पण जाने-माने अर्थशास्त्री एवं पूर्व निदेशक , ए.एन.सिन्हा ईंस्टीच्यूट ऑफ सोशल स्ट्डीज के प्रो.एम. दिवाकर ने की।सह लोकार्पणकर्ता श्री विनय ओहदार, मीरा दत्त और श्री सत्य नारायण मदन भी मौजूद थे।  विमोचन विमर्श का आयोजन लोकतांत्रिक जन पहल की ओर से आज यहां पटना में स्थित गांधी संग्रहालय में किया गया । विमोचन के संदर्भ में 'सूली पर लोकतंत्र' विषय पर चरचा की शुरूआत एडवोकेट श्री अशोक कुमार ने की। श्री सत्य नारायण मदन ने कार्यक्रम व पुस्तक के संदर्भों को रखा।  प्रो.दिवाकर ने पुस्तक के उद्धरणों का विस्तार से हवाला देते हुए कहा कि लेखक ने साहस के साथ तथ्यों को सामने लाया है, इसके लिए वे बधाई व प्रशंसा के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात में हरेन पांड्या की हत्या से लेकर महाराष्ट्र में जस्टिस लोया की हत्या में सिलसिलेवार ढंग से सात हत्याएं हुई।सभी हत्याओं की कड़ी जुड़ी  हुई है। प्रो.दिवाकर ने कहा कि राजनीतिक हत्याएं पहले भी हुई हैं लेकिन राज्य की संस्थाओं का जितना पूर्व नियोजित उपयोग उक्त घटनाओं में दिखता है वैसा पहले नहीं हुआ था।एक-एक करके सभी गवाहों की हत्या अनेक सवालों को खड़ा करती है। किताब के लेखक श्री महेंद्र मिश्र ने कहा कि समाजकर्मी व पत्रकार होने के नाते सच को सामने लाना हमारा दायित्व है।उन्होंने कहा कि इसके चलते मेनस्ट्रीम मीडिया को छोडकर काम करना पड़ा । श्री विनय ओहदार ने कहा कि कानून के शासन का उल्लंघन राज्य द्वारा ही किया जाता है। उन्होंने कहा कि केवल तकनीकी कारण से हजारों गरीब दलित जेलों मे बंद है। मीरा दत्त ने कहा कि हमें उम्मीद है कि यह किताब लोगों को राजनीति व सत्ता के वर्ग संबंधों को समझने में मदद करेगी। विमर्श में भाग लेनेवालों में अनुपम प्रियदर्शी, प्रो. रामस्वरूप भगत, कपिलेश्वर राम, प्रदीप प्रियदर्शी, विजय चौधरी, मुरारी, महेन्द्र यादव. अरविंद यरवदा एवं मनिषजी । अंत में श्री मणिलाल ने विमर्श के निष्कर्षों के साथ आगत साथियों को धन्यवाद दिया।

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