बिहार : बिहार के सासाराम में मीरा कुमार छेदी पासवान की सीधी भिडंत - Live Aaryaavart

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बुधवार, 15 मई 2019

बिहार : बिहार के सासाराम में मीरा कुमार छेदी पासवान की सीधी भिडंत

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पटना 14 मई, बिहार में इस बार के लोकसभा चुनाव में सातवें और अंतिम चरण में सासाराम (सु) सीट पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और कांग्रेस उम्मीदवार मीरा कुमार तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी छेदी पासवान के बीच सीधी टक्कर होगी। बिहार में सातवें तथा अंतिम चरण के लिये 19 मई को सासाराम (सु) में मतदान होना है । सासाराम संसदीय क्षेत्र की पहचान पूर्व उप-प्रधानमंत्री स्‍व.जगजीवन राम की कर्मभूमि के तौर पर होती है, जिन्‍हें लोग आज भी बाबूजी के नाम से याद करते हैं। जगजीवन राम वर्ष 1952 से लेकर 1984 तक आठ बार यहां से सांसद चुने गए।सासाराम कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है। जगजीवन बाबू की विरासत अब उनकी पुत्री मीरा कुमार संभाल रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी कि सीमा से लगी सासाराम संसदीय सीट पर इस बार सियासी लडाई काफी रोचक होगी । कांग्रेस की टिकट पर जगजीवन राम की पुत्री मीरा कुमार प्रत्याशी बनायी गयी हैं वहीं भाजपा की टिकट पर निवर्तमान सासंद छेदी पासवान चुनावी रणभूमि में ताल ठोक रहे हैं। इस बार के चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों दल के प्रत्याशी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी मीरा कुमार सासाराम में पूर्व में किये गये काम को आधार बनाकर जबकि भाजपा उम्मीदवार छेदी पासवान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश में किये विकास कार्यों के नाम पर वोट मांग रहे हैं।इस सीट पर जहां मीरा कुमार के सामने अपने पिता बाबू जगजीवन राम की विरासत बचाने की चुनौती है, तो वहीं भाजपा प्रत्याशी छेदी पासवान के सामने इस क्षेत्र से चौथी बार जीत दर्ज करने की चुनौती है। सासाराम की ऐतिहासिक पहचान है। यह रोहतास जिले का मुख्‍यालय है। अफगानी शासक शेरशाह सूरी का मकबरा आज भी यहां उनकी स्‍मृतियों को संजोए हुए है।भारत-अफगान शैली में लाल बलुआ पत्थर से बना मकबरा झील के बीच में है। शेरशाह द्वारा बनवाया गया देश का प्रसिद्ध ग्रांड ट्रंक रोड इसी शहर से होकर गुज़रता है। यहीं पर एक पहाड़ी पर गुफा में अशोक का लघु शिलालेख संख्या एक को उकेरा गया है। इसी क्षेत्र में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र का निवास स्थान है।यहां की अर्थव्‍यवस्‍था कृषि आधारित है। इसे धान का कटोरा भी कहा जाता है। सासाराम को पहले शाहाबाद नाम से जाना जाता था। यहां से जगजीवन राम लगातार आठ बार जीते। वर्ष 1952 के आम चुनाव में जगजीवन राम ने शाहाबाद (दक्षिण) संसदीय सीट से कांग्रेस की टिकट पर जीत हासिल की। इसके बाद जगजीवन राम सासाराम संसदीय सीट से वर्ष 1957, 1962 ,1967 और 1971 में भी कांग्रेस की टिकट पर जीत हासिल कर संसद पहुंचे।

वर्ष 1977 में आपातकाल के बाद जगजीवन राम ने इंदिरा गांधी से नाता तोड़ लिया था, तब भी सासाराम संसदीय क्षेत्र के लोग ‘बाबूजी’ के पक्ष में मजबूती से खड़े थे। जगजीवन राम ने भारतीय लोक दल (बीएलडी) की टिकट पर 1977 का लोकसभा चुनाव सासाराम संसदीय क्षेत्र से लड़ा एवं मजबूती के साथ जीत दर्ज की। वर्ष 1980 में जगजीवन राम ने जनता पार्टी और वर्ष 1984 में इंडियन कांग्रेस (जगजीवन) के टिकट पर चुनाव जीता।बाबू जगजीवन राम के निधन के बाद जब वर्ष 1989 के आम चुनाव हुये तब कांग्रेस ने मीरा कुमार को सासाराम संसदीय सीट से पार्टी का टिकट दिया था तब लोगों ने मान लिया था कि सासाराम में जगजीवन युग की वापसी हो जाएगी, लेकिन इस धारणा को छेदी पासवान ने ध्वस्त कर दिया। जनता दल के प्रत्याशी के रूप में छेदी पासवान ने एक लाख से ज्यादा वोटों से मीरा कुमार को शिकस्त दी थी।वर्ष 1991 के आम चुनाव में भी जनता दल प्रत्याशी छेदी पासवान ने कांग्रेस उम्मीदवार मीरा कुमार को मात दे दी। वर्ष 1996 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी और पूर्व आइएस ऑफिसर मुनि लाल ने जनता दल उम्मीदवार छेदी पासवान को पराजित कर सासाराम संसदीय क्षेत्र में पहली बार भाजपा का कमल खिलाया। इसके बाद वर्ष 1998 और वर्ष 1999 के चुनाव में भी भाजपा के मुनिलाल निर्वाचित हुये। वर्ष 2004 और वर्ष 2009 के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीरा कुमार ने भाजपा उम्मीदवार मुनि लाल को शिकस्त दे दी।दो बार मुनिलाल के हारने के बाद भाजपा ने 2014 में छेदी पासवान पर दांव लगाया। छेदी पासवान ने मीरा कुमार को कड़े मुकाबले में 63327 हजार के मतो के अंतर से पराजित किया था। जदयू प्रत्याशी और पूर्व आइएस ऑफिसर के.पी.रमैय्या तीसरे स्थान पर रहे। सासाराम सुरक्षित संसदीय क्षेत्र के छह विधानसभा क्षेत्रों में तीन क्षेत्र कैमूर जिले के और तीन रोहतास जिले के हैं। इस संसदीय क्षेत्र में मोहनिया (सु), भभुआ, चैनपुर, चेनारी (सु), सासाराम और करगहर विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। वर्ष 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में छह में से तीन सीट भाजपा के खाते में गयी थी। वहीं राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा),राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल यूनाईटेड (जदयू) उम्मीदवार एक-एक सीट पर जीतने में कामयाब रहे थे। भभुआ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रहे आनंद भूषण पांडेय का निधन हो गया है। उपचुनाव में उनकी पत्नी रिंकी रानी पांडेय भाजपा की टिकट पर चुनाव जीतीं।चैनपुर से वृज किशोर बिंद (भाजपा) ,चेनारी (सु) से ललन पासवान(रालोसपा) , सासाराम से अशोक कुमार (राजद) ,मोहनिया (सु) से निरंजन राम (भाजपा) और करगहर से वशिष्ठ सिंह (जदयू) विधायक हैं।

सतरहवें आम चुनाव (2019) में सासाराम से कुल 13 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें भाजपा , कांग्रेस , बहुजन समाज पार्टी (बसपा), और छह निर्दलीय समेत 13 उम्मीदवार शामिल हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में करीब 17 लाख 72 हजार मतदाता हैं। इनमें करीब नौ लाख 28 हजार पुरुष और आठ लाख 44 हजार महिला शामिल हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव में महागठबंधन की प्रत्याशी मीरा कुमार और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) प्रत्याशी छेदी पासवान के बीच सीधा मुकाबला है। मीरा कुमार को इस बार राष्ट्रीय जनता दल, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी सहित कई छोटे दलों का समर्थन है, जबकि जदयू इस बार के चुनाव में भाजपा के साथ है। रालोसपा पिछले चुनाव में राजग के साथ थी, लेकिन इस बार वह महागठबंधन के साथ है। इस क्षेत्र में दुर्गावती जलाशय परियोजना का शिलान्यास तत्कालीन केंद्रीय कैबिनेट मंत्री जगजीवन राम ने 1976 में किया था। वह परियोजना पूर्ण नहीं हो पाई थी। इसे पूरा कराकर 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने उद्घाटन किया, हालांकि अभी भी नहरों का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। शेरशाह इंजीनियरिंग कॉलेज का शिलान्यास और केंद्रीय विद्यालय भवन का निर्माण हुआ। आरा रेल का विद्युतीकरण,ग्रामीण सड़क, पेयजल आदि से जुड़े कार्य भी हुए हैं। इस क्षेत्र में कई तरह की समस्‍याएं भी हैं, जिनमें किसानों को उपज का वाजिब दाम दिलाना, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, पर्यटन स्थलों का विकास का आदि प्रमुख हैं। मुंडेश्वरी-आरा रेललाइन का निर्माण भी बड़ा मुद्दा है।रोहतास जिले के पंडुका गांव की सोन नदी पर पुल निर्माण नहीं होने का दर्द क्षेत्र के लोगों को साल रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में विकास नहीं होने से इस क्षेत्र के लोगों में नाखुशी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में एक भी अंगीभूत महिला कॉलेज नहीं है। संबद्ध कॉलेजों में छात्राएं डिग्री प्राप्त कर रही हैं। सरकारी स्कूलों की हालत भी बहुत अच्छी नहीं है।

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