बिहार : जेल जाने वालों को 45 साल के बाद भी जेपी सेनानी सम्मान नहीं - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 20 जून 2019

बिहार : जेल जाने वालों को 45 साल के बाद भी जेपी सेनानी सम्मान नहीं

बांसकोठी क्रिश्चियन काॅलोनी के जौर्ज केरोबिन,मखदुमपुर मोहल्ला के भरत भूषण,नन्द लाल सिंह, राजेश पासवान, सूर्यदेव, लोलो,सत्यप्रिय आदि ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकार से मांग की है कि सी0एल0ए0 एक्ट 1942 के तहत जेल जाने वालों को भी सरकार सम्मानित करे। फिलवक्त सी0एल0ए0 एक्ट 1942 राजनीतिक कैदियों को हाशिये पर ही रख दिया गया है।   
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पटना,13 जून। लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी के आह्वान पर स्कूल-काॅलेज छोड़कर जेल जाने वालों को 45 साल के बाद भी जेपी सेनानी सम्मान से सम्मानित नहीं किया जा रहा है। जेपी सेनानियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, सांसद अश्विनी चैबे आदि के पास आवेदन लिख-लिखकर थकहार गए हैं। परन्तु कोई सुनवाई नहीं होने पर मायुष हो गए हैं। आज भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास आवेदन देने का साहस जुटा रहे हैं। बताते चले कि 5 जून 1974 को ऐतिहासिक गांधी मैदान, पटना में लोकनायक ने आह्वान किया था कि निकम्मी कांग्रेसी सरकार को उखाड़ फेक दी जाए। तब 13 जून को सचिवालय के द्वार पर धरना देकर ‘माननीय‘ को विधान सभा में जाने के रोकने के एवज में गिरफ्तार किये गये। सत्याग्रहियों को आज के ही दिन 13 जून 1974 को बक्सर केन्द्रीय कारा में बंदी बनाया गया। मगर हुजूर के द्वारा बिहार विधान सभा के द्वार पर सत्याग्रह करने वालों को जेपी सेनानी सम्मान से सम्मानित करने का कदम नहीं उठाया गया। इन सत्याग्रहियों का दोष सिर्फ यह है कि इनको मीसा और डी.आई.आर. के तहत गिरफ्तार नहीं किया गया। इनको सी.एल.ए.के तहत गिरफ्तार किया गया। जबकि दोनों कानून 1942 के तहत ही है।

45 साल से इंतजार 
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के द्वारा लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सेनानियों के साथ बुरा सलुक किया जा रहा है। हुजूर, ने मीसा और डी0आई0आर0 के तहत जेल जाने वालों को दुलार किया जा रहा है। वहीं बिहार विधान सभा के द्वार पर सत्याग्रह करने वालों को किया दुत्कार दिया जा रहा है। केवल इस लिये दुत्कार किया जा रहा है कि पुलिस अधिकारियों ने उनको सी0एल0ए0 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा है। बस सी0एल0ए0 के तहत गिरफ्तार करने वालों को हुजूरेवाला के द्वारा सजा दी जा रही है। उनको सम्मान के योग्य नहीं समझा जा रहा है। इससे बिहार विधान सभा के द्वार पर सत्याग्रह करने वाले साढे़ तीन हजार जेपी सेनानियों को तीव्र आक्रोश व्याप्त है।

 जेपी सेनानी सम्मान से सम्मानित 
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के पहल पर लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन के दौरान 1974 में जेल सफर करने वालों जेपी सेनानी सम्मान से सम्मानित किया जा रहा है। एन0डी0ए0 सरकार ने निर्णय ले रखा है कि जो जेपी सेनानी भारतीय दण्ड संहिता के तहत मीसा और डी0आई0आर0 में जेल गये उनको ही सम्मानित किया जाए। अभी हुजूर के द्वारा उनको ही तवज्जों देकर दुलार किया गया है। वहीं सी0एल0ए0 के तहत जेल जाने वालों को सरकार के द्वारा दुत्कार ही दिया जा रहा है।

दीघा मखदुमपुर से दर्जनों जेल गए थे
मखदुमपुर दीघा निवासी सत्यप्रिय ने कहा कि हम लोगों के द्वारा प्रेषित आवेदन पत्र पर किसी तरह का विचार नहीं हो रहा है। उप मुख्यमंत्री के जनता दरबार में आवेदन दिया गया है तब भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने की सूचना है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के द्वारा वर्ष 1974 में संचालित जन आंदोलन के दौरान में विभिन्न तरह के आंदोलनों में अनेक लोग जेल गये थे। ऐसे लोगों को पुलिस प्रशासन के द्वारा किसी को मीसा में तो किसी को डी0आई0आर0 एक्ट 1942 के तहत बंदी बनाया गया था। इसके अलावे पुलिस प्रशासन ने सी0एल0ए0 एक्ट 1942 का उपयोग कर आंदोलनकारियों को बंदी बनाकर जेल भेज दी थी। इन सभी बंदियों को जेल में राजनैतिक बंदियों की तरह ही सुविधा दी गयी। जेल के बाहर सरकार के द्वारा इन राजनैतिक बंदियों को दो खेमे में विभक्त कर सुविधा दी जा रही है। ऐसा महसूस किया जा रहा है कि एनडीए एक की सरकार ने 1974 के दौरान जेल में राजनैतिक बंदियों की सुविधा भोग चूकने वालों को दो खेमे में विभक्त कर जेपी सेनानियों को सम्मानित किया जा रहा है। नीतीश सरकार ने केवल मीसा और डी0आई0आर0 के तहत जेल जाने वालों को ही सम्मानित करने की घोषणा कर दी है। इस तरह सरकार के द्वारा सी0एल0ए0 एक्ट 1942 के तहत बंदी बनकर जेल सफर करने वालों को सुधि ही नहीं ली । इसके कारण जेपी सेनानियों में काफी आक्रोश है। ऐसे लोग स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं।

शाह आयोग का गठन 
लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन की आंधी में बह गयी कांग्रेस सरकार के बाद जनता पार्टी की सरकार वर्ष 1977 में सत्ता की कमान थामी। तब उसने शाह आयोग का गठन किया था। आयोग से अपेक्षा की गयी थी कि वह जेपी आंदोलन के दरम्यान जेल यातना सहने वालों को किस तरह से सम्मानित किया जाए। उनसे पर अनुशंसा करने को कहा गया था। शाह आयोग ने अनुशंसा कर दी मगर सामाजिक न्याय के मसीहा ने सूबे की गद्दी पर 15 वर्षों तक विराजमान रहे। सत्ता के नशा में रहकर उनके द्वारा जेपी सेनानियों को सम्मानित करने की दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाया। सामाजिक न्याय के पक्षधर लालू और राबड़ी सरकार ने शाह आयोग की अनुशंसाओं की ओर एकदम टेड़ी नजर रखें।  एक तरह से कहा जा सकता है कि सामाजिक न्याय के हितैषी सरकार ने आयोग की अनुशंसाओं को ठंडे बस्ते में ही डाले रखा।

सत्तासीन होने वाले एनडीए एक की नीतीश सरकार 
सामाजिक न्याय की सरकार को समूल नष्ट करके सत्तासीन होने वाले एनडीए एक की नीतीश सरकार ने लगे हाथ 28 वर्षों के बाद जेपी सेनानियों को याद करके उनको सम्मानित करने का निश्चय किया। हालांकि 1974 में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चलाये गये आंदोलन के दौरान शहीदों के आश्रितों/घायलों एवं जेल जाने वालों को सम्मानित करने हेतु गठित मंत्रियों के समूह की दिनांक 01.10.2007 में ही बैठक की गयी थी। इस बैठक लिये गये निर्णयों के अनुपालन की समीक्षा की गई। वहीं लोकनायक जयप्रकाश के नेतृत्व में चलाये गये आंदोलन के दौरान 18.03.74 से 21.03.77 तक राज्य के काराओं में मीसा एवं डी0आई0आर0 में संसीमित राजनैतिक बंदियों का स्पष्ट प्रतिवेदन कारा महानिरीक्षक को शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया । इस प्रतिवेदन के आलोक में इस तथ्य का भी सत्यापन कर लेने की हिदायत दी गयी कि एक ही कैदी उक्त अवधि में कई काराओं में रखे गये थे ऐसे राजनीतिक कैदियों की गणना एक ही बार होनी चाहिए। बैठक में यह भी कहा गया कि सी0एल0ए0 में कुछ राजनैतिक बंदी संभवत बंद हुए थे ऐसे राजनैतिक बंदियों की सूची भी काराओं से प्राप्त कर ली जाए। ऐसे राजनैतिक बंदियों के पक्ष में स्पष्ट आदेश निर्गत नहीं किया गया। केवल जोर मीसा एवं डी0आई0आर0 को ही दिया गया । मीसा एवं डी0आई0आर0 में राजनैतिक एवं अपराधी दोनों कोटि के लोग उक्त अवधि में काराओं में बंद किये गये थे। प्रतिवेदन में सिर्फ राजनैतिक कैदियों को ही समाविष्ट किया जाय। झारखंड से भी वाछित कोटि का प्रतिवेदन कारा महानिरीक्षक बिहार, कारा निरीक्षक झारखंड से समन्वय स्थापित कर उपलब्ध कराए। उक्त अवधि मकं संदर्भगत आंदोलन में पुलिस फायरिंग में कुछ लोगों की मृत्यु हुई थी और कुछ घायल हुए थे। ऐसे मृत एवं घायल होने के कारण अपंग व्यक्तियों की विवरणी भी प्राप्त करनी होगी। उक्त अवधि में मीसा में बंद व्यक्यिों का प्रतिवेदन गृह प्रतिवेदन गृह विभाग में उपलब्ध होना चाहिए। यह प्रतिवेदन चिन्हित कर उपलब्ध करायी जाय।

सी0एल0ए0 एक्ट 1942 में बंदी किये गये उनके पक्ष में मंत्री परिषद की बैठक में मंजूरी नहीं ली
मीसा एवं डी0आई0आर0 में बंद किये गये राजनैतिक कैदियों को सम्मानित करने का निर्णय की मुहर मंत्री परिशद की बैठक में लगा लिये। वहीं सरकार से एक भूल हो गयी । सरकार ने जन आंदोलन के दरम्यान सी0एल0ए0 एक्ट 1942 में बंदी किये गये उनके पक्ष में मंत्री परिषद की बैठक में मंजूरी नहीं ली। जिसका खामियाजा सी0एल0ए0 एक्ट 1942 बंदी जेपी सेनानी भुगत रहे हैं। मखदुमपुर,दीघा के ओमप्रकाश वर्मा ने कहा कि ऐसा करने से आंदोलनकारियों को जोर का झटका लगा है परिवार और समाज में उनका रूतबा दोयम दर्जा का हो गया है। सभी जगहों में जगहंसाई हो रही हैं । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाहिए कि सी0एल0ए0 एक्ट 1942 में भी गिरफ्तार राजनैतिक बंदियों को सम्मानित करने के लिए मंत्री परिषद की बैठक में निर्णय ले और इस बाबत मुहर लगा ले।

बांसकोठी क्रिश्चियन काॅलोनी के जौर्ज केरोबिन भी जेल गए
बांसकोठी क्रिश्चियन काॅलोनी के जौर्ज केरोबिन,मखदुमपुर मोहल्ला के भरत भूषण,नन्द लाल सिंह, राजेश पासवान, सूर्यदेव, लोलो,सत्यप्रिय आदि ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकार से मांग की है कि सी0एल0ए0 एक्ट 1942 के तहत जेल जाने वालों को भी सरकार सम्मानित करे। फिलवक्त सी0एल0ए0 एक्ट 1942 राजनीतिक कैदियों को हाशिये पर ही रख दिया गया है। इसको लेकर सन् चैहतर के जाबाज सिपाहियों में आक्रोश व्याप्त है। सन् चैहतर में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चलाये गये आंदोलन के दौरान विधान सभा भंग करने की मांग को लेकर चली ‘ जेल भरो अभियान ’के सिलसिले में 13 जून 1974 को विधान सभा के द्वार पर विधायकों के मार्ग अवरूद्ध कर इस्तीफा मांगने के सवाल पर गिरफ्तार कर केन्द्रीय कारा, बक्सर जाने वाले बांसकोठी, दीघा के जौर्ज केरोबिन ने कहा है कि उनके साथ अन्य साथियों को धारा 143, 188, 341, आई.पी.सी. गर्दनीबाग 24.6.74 सी0एल0ए0 एक्ट 1942 अधीन गिरफ्तार 13.6.74 को किया गया। फिलहाल ऐसे लोगों पर विचार नहीं किया जा रहा है।  जब इस संदर्भ में परामर्श समिति के पूर्व सदस्य कुमार शुभमूर्ति जी मुलाकात करके पूछा गया तो उनका कहना था कि सरकार के द्वारा प्रथम चरण में सिर्फ मीसा और डी0आई0आर0 के तहत जेल जाने वालों को ही सम्मानित किया जा रहा है। जो व्यक्ति सी0एल0ए0 के तहत जेल गये हैं उनके बारे में सरकार से वार्ता की जा रही है। सरकार के समक्ष सी0एल0ए0 वालों को भी सम्मानित करने का प्रस्ताव प्रेषित किया जाएगा। 

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