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बुधवार, 10 जुलाई 2019

कर्नाटक में ‘शिकार’ की राजनीति का विपक्ष का आरोप, सदन से बर्हिगमन

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नयी दिल्ली, 09 जुलाई, कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस -जनता दल सेकुलर गठबंधन के विधायकों के इस्तीफे और सरकार गिराने के आरोपों को लेकर लोकसभा में विपक्ष ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विरुद्ध नारेबाजी और सदन से बहिर्गमन किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा ‘शिकार’ की राजनीति करके लोकतंत्र को नष्ट कर रही है। इस पर सत्तापक्ष ने कहा कि कर्नाटक में जो भी हो रहा है, वह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है। वह अपने घर को संभाल नहीं पा रही है और यहां उसके सदस्य सदन काे बाधित कर रहे हैं। लोकसभा में प्रश्नकाल के बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाने के बाद जैसे ही शून्यकाल आरंभ करने की घोषणा की, कांग्रेस के सदस्य खड़े हो गये और कर्नाटक में राजनीतिक उठापटक का विषय उठाने लगे तो अध्यक्ष ने इसकी अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सदस्य कल इस विषय को उठा चुके हैं और एक विषय दो बार नहीं उठाया जा सकता। इससे कांग्रेस के स्य उत्तेजित हो गये और नारेबाजी करने लगे। उन्होंने ‘वी वांट जस्टिस’, ‘लोकतंत्र को कुचलना बंद करो’, ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ और ‘मोदी सरकार हाय हाय’ के नारे लगाने शुरू कर दिये। कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने वाले श्री राहुल गांधी ने भी अपने स्थान पर बैठे बैठे नारे लगाये। इस बीच अध्यक्ष के नाम पुकारने पर विभिन्न सदस्याें ने इस बीच अपने-अपने क्षेत्र के मुद्दे उठाये। बाद में कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सदस्य आसन के सम्मुख पहुंच गये और नारेबाजी जारी रखी। तभी संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने नियम पुस्तिका का हवाला देते हुए कहा कि नियम 197 के तहत स्पष्ट किया गया है कि एक विषय को दो बार नहीं उठाया जा सकता है। कर्नाटक के बारे में कांग्रेस के नेता भाजपा पर जो भी आरोप लगा रहे हैं, वह सरासर गलत है। वहां सत्तारूढ़ दल के विधायकों के इस्तीफे का सिलसिला श्री राहुल गांधी के आह्वान पर शुरू हुआ है।

अध्यक्ष श्री बिरला ने भी विपक्षी सदस्यों को कड़े शब्दों में कहा कि वे सदन में कागज नहीं लायें अन्यथा उनके विरुद्ध कार्यवाही करेंगे। वह अंतिम चेतावनी दे रहे हैं। इसके बावजूद हंगामा नहीं थमा। इस पर श्री बिरला ने सभी विपक्षी सदस्यों से अपनी सीट पर जाने की अपील करते हुए कहा कि विपक्ष ने उन्हें कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया था जिसे उन्होंने अस्वीकृत किया है, लेकिन उन्होंने हमेशा ही हर सदस्य को शून्यकाल में बारी के बिना भी मुद्दा उठाने का मौका दिया है और देते रहेंगे। सदन की गरिमा को वैश्विक स्तर का बनाना है। इसलिए नारेबाजी और तख्तियों को बंद करने की आवश्यकता है। कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि वह अध्यक्ष की पीड़ा को समझते हैं, लेकिन सदन की उत्पादकता बढ़ी है तो उसमें कांग्रेस के सदस्यों का सहयोग भी है। विपक्ष विवाद करता है और सरकार निर्णय लेती है। हम अपना कर्तव्य निभा रहे हैं, सरकार अपना फर्ज़ निभाये। उन्हाेंने कहा कि पिछले सदन में सरकार के कद्दावर नेता अरुण जेटली ने कहा था कि सदन को बाधित करना भी लोकतंत्र का एक औजार है। श्री चौधरी ने कर्नाटक का मामला उठाते हुए कहा कि वहां ‘शिकार’ की राजनीति चल रही है। भाजपा के लोग कह रहे हैं कि आज कर्नाटक में हो रहा है, कल मध्यप्रदेश की बारी है। ये लोग निर्वाचित सरकारों को तोड़ रहे हैं। इस प्रकार की राजनीति से लोकतंत्र को खतरा है। सरकार की नीति और नीयत ठीक नहीं है। इसे बंद किया जाये और लोकतंत्र को बचा कर रखा जाये। सदन के उपनेता राजनाथ सिंह ने कहा कि कर्नाटक में जो कुछ भी हो रहा है, वह कांग्रेस के घर के अंदर का मामला है। ये कर्नाटक में अपने घर को संभाल नहीं पा रहे हैं और यहां सदन को बाधित कर रहे हैं। इसे कदापि स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इससे असंतुष्ट श्री चौधरी के नेतृत्व में विपक्षी कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सदस्य बहिर्गमन कर गये।

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