अब कोचों में चमड़े की सीट लगाने के विरूद आवाज बुलंद - Live Aaryaavart

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रविवार, 21 जुलाई 2019

अब कोचों में चमड़े की सीट लगाने के विरूद आवाज बुलंद

बडे़ विषाद के साथ यह कहना पड़ रहा है कि अहिंसक समाज पर आपके मंत्री काल में किया जा रहा यह बहुत बड़ा अन्याय है, जिससे कि समाज में बहुत रोष, नाराज़ी और घृणा का वातावरण निर्मित हो रहा है। 
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भोपाल, 20 जुलाई। अबतक रेलवे के कोचों में पोली विनायल की उत्तम क्वालिटी की सीटें की पता उपयोग होती थीं जो काफी किफायती, अग्निरोधक और आरामदायक थीं। इसमें बदलाव केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल जी के विभाग रेल मंत्रालय करने जा रहा है। अब मंहगा चमड़ा खरीदकर सीटों पर लगाने का प्रस्ताव प्रस्तावित है। 122, सर्वकल्याण विहार, में जीवदया जी रहते हैं। उन्होंने रेल मंत्री पीयूष गोयल, भारत सरकार,उद्योग भवन, नई दिल्ली-110001 को विषयक :-रेलवे द्वारा महात्मा गांधी जी के सिद्धांतों और अहिंसक समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ को लेकर चिट्ठी लिखा।   चिट्ठी में निवेदन किया गया है कि रेल मंत्रालय द्वारा महात्मा गांधी जी के सिद्धांतों की अवहेलना की जा रही है जबकि देश उनकी 150 वीं जयंती मना रहा है। अभी तक रेलवे के कोचों में पोली विनायल की उत्तम क्वालिटी की सीटें पता उपयोग होती थीं जो कि किफायती, अग्निरोधक और आरामदायक थीं। पर बड़ा अफसोस है कि अब रेलवे ने मंहगे चमड़े की खरीदारी के लिये टेंडर निकाला है और मंहगा चमड़ा खरीदकर सीटों पर लगाया जाना प्रस्तावित है (Ref. Stores/Fur/ICF/T.No. 07192670 dtd 04.06.2019)। रेल मंत्रालय का यह कदम एक तरफ तो हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के अहिंसा के सिद्धांत के साथ किया जा रहा क्रूर मजाक है और दूसरी तरफ यह जनता के टैक्स के पैसे के किफायती उपयोग के खिलाफ भी है। चमड़े के उपयोग से तमाम तरह की व्याधि और एलर्जी हो जाती है, यह जाना माना मेडिकल सत्य है। अत: इस तरह के निर्णय से रेल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की भी अनदेखी की गई है।  उपरोक्त संदर्भ में हमें बडे़ विषाद के साथ यह कहना पड़ रहा है कि अहिंसक समाज पर आपके मंत्री काल में किया जा रहा यह बहुत बड़ा अन्याय है, जिससे कि समाज में बहुत रोष, नाराज़ी और घृणा का वातावरण निर्मित हो रहा है।  चमड़ा प्राप्त करने के लिये पता नहीं कितने और कौन कौन से अबोल पशुओं का क्रूरता पूर्वक वध किया जायेगा? अब हमारे जैसे लोग जिनका चमड़े के उपयोग का आजीवन त्याग है, वह कैसे रेलवे में उन सीटों पर बैठ सकेंगे?  कैसे किसी जानवर की खाल पर बैठकर खाना खा सकेंगे? कैसे उन स्लीपरों पर लेट सकेंगे? कैसे चमड़े से होने वाली एलर्जी से अपने आपको बचा सकेंगे? रेलवे को अहिंसक समाज की भावनाओं से खिलवाड़ नहीं करना चाहिये।  हम शांतिप्रिय नागरिक हैं एवं राष्ट्र के विकास में सदैव ही सहयोगी रहते हैं।हमारी आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि रेल मंत्रालय के इस जन असंवेदनशील निर्णय को योजना को तुरंत रोकें ताकि अहिंसक जनों को न तो आंदोलन की राह अपनाना पड़े और न ही कोर्ट की शरण लेना पड़े।अंत में कहा गया कि आपके संतोषजनक उत्तर की प्रतीक्षा रहेगी। 

1 टिप्पणी:

rkkarnani ने कहा…

धान मंत्री से गुहार !

Man vs Wild का कार्यक्रम
मोदी जी थे बेयर ग्रिल्स के संग
अति सुन्दर था सब कुछ दीखा
पर्यावरण बचाना सीखा
एक बात थी इतनी सुन्दर
पैठ गयी जो मन के अंतस
"मैं भाला नहीं उठाना चाहता
मेरी मान्यता ,मेरी आस्था
देती नहीं मुझे इज़ाज़त| "
नमो की ये बात सुनकर
मन हो चला था रोमांचित !
हमने देखा सुना आपको
आप हमारी सुनिये गुणिये
ये कैसा विरोधाभास है
अहिंसा आस्था की जो करते बात
पशु चर्म उपयोग बढ़ाने को आमाद
रेल की सीटों में क्यों इसका प्रयोग
PM होने के नाते
आपके सिर जाता ये अभियोग
देर हुई नहीं,अब भी जागो
किसने निर्णय लिया,जवाब माँगो !

धार्मिक मार्मिक मान्यता आस्था
हर पथ के विपरीत ये रास्ता
आर्थिक पक्ष भी देखें गर आप
इतना महँगा, मन जायेगा काँप
क्यों ना एक तीर से दो शिकार करें
चर्म उपयोग का बहिष्कार करें
विशाल धन राशि की बचत करें
उसे गरीब वंचितों पर खर्च करें |

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